- ATS ने 19 वर्षीय नबील को किया गिरफ्तार, डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर खंगाला जा रहा नेटवर्क; आजमगढ़ के दीदारगंज से हुई गिरफ्तारी, ‘ला गालिब इल्लल्लाह’ ग्रुप के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश
भारत 19
उत्तर प्रदेश एटीएस ने AQIS से जुड़े डिजिटल नेटवर्क की पड़ताल के बाद आजमगढ़ के दीदारगंज से 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया है। ATS की जांच में सामने आया कि नबील ने ‘ला गालिब इल्लल्लाह’ नाम से WhatsApp ग्रुप बनाया था, जिसके जरिए युवाओं को AQIS की विचारधारा से जोड़ने और कट्टरपंथी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा था। उसके मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों से मिले डिजिटल साक्ष्यों ने जांच की दिशा को और व्यापक कर दिया है। अब एजेंसी ग्रुप से जुड़े लोगों, ऑनलाइन संपर्कों और नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगाल रही है।
WhatsApp ग्रुप बना युवाओं तक पहुंच का जरिया
ATS की जांच में WhatsApp ग्रुप नबील की ऑनलाइन गतिविधियों की अहम कड़ी के तौर पर सामने आया है। ‘ला गालिब इल्लल्लाह’ नाम से बनाए गए इस ग्रुप में युवाओं को जोड़े जाने की जानकारी मिली है। जांच एजेंसी के मुताबिक ग्रुप की गतिविधियों में AQIS की विचारधारा से संबंधित सामग्री और संदेशों का इस्तेमाल किया जा रहा था। नबील की भूमिका सिर्फ ग्रुप बनाने तक सीमित थी या वह इसके जरिए नेटवर्क को आगे बढ़ाने में भी सक्रिय था, इसकी पड़ताल जारी है।
मोबाइल ने खोली डिजिटल नेटवर्क की परत
गिरफ्तारी के बाद नबील के मोबाइल और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच की गई। ATS को AQIS की विचारधारा से संबंधित डिजिटल सामग्री के साथ कई ऑनलाइन समूहों और संपर्कों के साक्ष्य मिले हैं। जांच में ऐसे ऑनलाइन संपर्क भी सामने आए हैं, जिनकी कड़ियां भारत के बाहर तक जाती हैं। अब इन संपर्कों की पहचान और उनकी भूमिका को डिजिटल साक्ष्यों के जरिए जांचा जा रहा है।
विदेशी संपर्कों तक पहुंची जांच
ATS की पड़ताल में नबील के ऑनलाइन संपर्कों में विदेशों से जुड़े लोगों की मौजूदगी भी सामने आई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपर्कों का आपस में क्या संबंध था और नबील उनसे किस स्तर पर जुड़ा हुआ था। जांच के दौरान पाकिस्तान, तुर्किये और बांग्लादेश जाने तथा प्रशिक्षण से संबंधित बातचीत के साक्ष्य मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इन संपर्कों की वास्तविक भूमिका और उद्देश्य की पुष्टि के लिए डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
AQIS की विचारधारा से जुड़ी सामग्री मिली
ATS के अनुसार नबील के डिजिटल उपकरणों से AQIS और उससे जुड़े विचारकों की सामग्री मिली है। जांच में इस सामग्री के ऑनलाइन प्रसार और युवाओं तक पहुंचाने की गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। यही डिजिटल सामग्री अब जांच का महत्वपूर्ण आधार है। एजेंसी यह जोड़ने में लगी है कि कौन-सी सामग्री किस समूह में साझा हुई और उसके बाद उससे कौन-कौन लोग जुड़े।
अब ग्रुप के सदस्यों तक पहुंचेगी जांच
नबील की गिरफ्तारी के बाद ATS का अगला फोकस WhatsApp ग्रुप और उससे जुड़े डिजिटल संपर्कों पर है। ग्रुप में शामिल सदस्यों की पहचान, उनके आपसी संवाद और दूसरे ऑनलाइन समूहों से उनके कनेक्शन की पड़ताल की जा रही है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि नबील अकेले डिजिटल गतिविधियां चला रहा था या उसके पीछे युवाओं को जोड़ने वाला बड़ा नेटवर्क मौजूद था।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
ATS ने इस मामले में लखनऊ स्थित ATS थाने में मुकदमा दर्ज किया है। नबील के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 और 61(2) तथा UAPA की धाराओं 18 और 38 के तहत कार्रवाई की गई है। 12 सितंबर को ATS की टीम ने आजमगढ़ पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया। अब आगे की जांच में डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक पड़ताल के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने लाई जाएगी।
19 साल की उम्र में डिजिटल नेटवर्क की चिंता
इस मामले का अहम पहलू नबील की उम्र के साथ उसका ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए नेटवर्क तैयार करना है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह चुनौती इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कट्टरपंथी विचारधारा को फैलाने के लिए अब आमने-सामने संपर्क के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। नबील के मामले में WhatsApp ग्रुप से शुरू हुई जांच मोबाइल और दूसरे ऑनलाइन संपर्कों तक पहुंची है। यही डिजिटल कड़ियां अब यह तय करेंगी कि नेटवर्क की पहुंच कितनी दूर तक थी।
ATS की जांच अब नेटवर्क पर केंद्रित
नबील की गिरफ्तारी के बाद मामला अब सिर्फ एक युवक की गतिविधियों तक सीमित नहीं है। WhatsApp ग्रुप, मोबाइल से मिले साक्ष्य और विदेशी संपर्कों की कड़ियां जांच का केंद्र बन गई हैं। ATS अब यह पता लगाने में जुटी है कि ग्रुप में कौन-कौन लोग जुड़े थे, उनकी भूमिका क्या थी और डिजिटल संपर्क किस नेटवर्क तक पहुंचते थे। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।


