कानपुर के आर्यनगर से समाजवादी पार्टी विधायक अमिताभ बाजपेयी द्वारा उठाए गए विशेषाधिकार हनन मामले में उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने संज्ञान लिया है। विधानसभा सचिवालय ने कानपुर पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी से 15 कार्य दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
KANPUR/ कानपुर के आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक अमिताभ बाजपेयी द्वारा उठाए गए विशेषाधिकार हनन के मामले में उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने औपचारिक रूप से संज्ञान लिया है। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी पत्र में कानपुर पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को 15 कार्य दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पत्र विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे की ओर से जारी किया गया है। पत्र में विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों और संबंधित घटनाक्रम की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
क्या है पूरा मामला?
विधायक अमिताभ बाजपेयी ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 13 मई 2026 को आर्यनगर क्षेत्र में चल रहे सरकारी विद्यालयों के आधुनिकीकरण अभियान के दौरान कुछ व्यक्तियों और अधिकारियों के आचरण से न केवल वैध प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुआ, बल्कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का भी हनन हुआ। विधायक का कहना था कि उनके अधिकारों और दायित्वों के निर्वहन में बाधा उत्पन्न की गई, जो विधानसभा सदस्य के विशेषाधिकारों के दायरे में आता है।
किन अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल?
अमिताभ बाजपेयी ने अपने प्रार्थना पत्र में स्थानीय नेताओं के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने मामले में एसीपी चित्रांशू गौतम, इंस्पेक्टर मानवेंद्र सिंह, संबंधित अधिशासी अभियंता तथा कानपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की भूमिका की जांच कराने की भी मांग उठाई थी। विधायक ने आरोप लगाया था कि संबंधित अधिकारियों के कार्य और व्यवहार की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
पुलिस कमिश्नर और डीएम को भेजा गया पत्र
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कानपुर पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी मामले की जांच कर 15 कार्य दिवस के भीतर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि विधानसभा सचिवालय इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और तथ्यात्मक स्थिति जानने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है।
विधायक अमिताभ बाजपेयी की प्रतिक्रिया
विधानसभा सचिवालय की ओर से संज्ञान लिए जाने के बाद विधायक अमिताभ बाजपेयी ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी शिकायत पर विधानसभा अध्यक्ष ने ध्यान दिया है। अमिताभ बाजपेयी ने कहा कि वह विधानसभा अध्यक्ष का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए रिपोर्ट तलब की है। उनके अनुसार अब पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेंगे, जिससे सच्चाई सामने आएगी।
राजनीतिक महत्व भी बढ़ा
यह मामला केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच पहले से चल रहे विभिन्न मुद्दों के बीच यह प्रकरण भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि अभी तक विधानसभा सचिवालय की ओर से केवल रिपोर्ट मांगी गई है और किसी प्रकार का अंतिम निष्कर्ष या निर्णय सामने नहीं आया है। आर्यनगर विधायक अमिताभ बाजपेयी द्वारा उठाए गए विशेषाधिकार हनन मामले में विधानसभा सचिवालय का संज्ञान लेना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सभी की नजर कानपुर पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी है। रिपोर्ट के आधार पर विधानसभा स्तर पर आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।



