- जेपी जयंती पर प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचे सपा प्रमुख, स्मारक बेचने का लगाया आरोप, ब्रजेश पाठक ने लीज का किया बचाव; राजभर ने 865 करोड़ के खर्च और परिवारवाद पर साधा निशाना
भारत 19/ लखनऊ। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर रविवार को लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) सियासी टकराव का केंद्र बन गया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र में लोकनायक की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी और भाजपा सरकार पर स्मारक को बेचने का आरोप लगाया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र को बेचा नहीं गया, बल्कि बेहतर संचालन के लिए लीज पर दिया गया है। वहीं, कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने परियोजना की लागत, अधूरे निर्माण और संचालन समिति में परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा।
अखिलेश ने भाजपा पर लगाया स्मारक बेचने का आरोप
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर अखिलेश यादव गोमतीनगर स्थित JPNIC पहुंचे और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया। अखिलेश ने कहा कि उनकी सरकार ने जयप्रकाश नारायण की स्मृति में यह केंद्र बनवाया, लेकिन मौजूदा सरकार इसे निजी हाथों में सौंपकर बेचने जैसा काम कर रही है। सपा प्रमुख ने JPNIC की लीज व्यवस्था को लोकनायक की विरासत से जोड़ते हुए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, जयप्रकाश नारायण की स्मृति में बने केंद्र को निजी कंपनियों को सौंपना उनके विचारों और विरासत के सम्मान के अनुरूप नहीं है।
ब्रजेश पाठक ने लीज के फैसले का किया बचाव
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के JPNIC दौरे पर निशाना साधते हुए इसे श्रद्धांजलि के नाम पर राजनीतिक नाटक बताया। उन्होंने स्मारक बेचने के आरोप को गलत बताते हुए कहा कि सरकार ने केंद्र के बेहतर प्रबंधन और संचालन के लिए लीज पर देने का फैसला किया है। पाठक ने परियोजना की लागत को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि जिस परियोजना की शुरुआत करीब 17 करोड़ रुपये से बताई गई थी, उसकी लागत बढ़कर लगभग 850 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उन्होंने पांच सितारा सुविधाओं और स्विमिंग पूल जैसी व्यवस्थाओं पर खर्च को लेकर भी सवाल उठाए। ये आंकड़े उपमुख्यमंत्री के आरोपों के रूप में सामने आए हैं; परियोजना की लागत का आधिकारिक ब्योरा अलग से सत्यापित किया जाना जरूरी है।
राजभर ने खर्च और परिवारवाद को लेकर साधा निशाना
कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भी JPNIC को लेकर अखिलेश यादव पर हमला बोला। उन्होंने परियोजना पर 865 करोड़ रुपये खर्च होने के दावे का हवाला देते हुए अधूरे निर्माण को लेकर सवाल उठाए। राजभर ने संचालन समिति में अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका पर भी निशाना साधा। राजभर ने परियोजना की लागत, प्रबंधन और संचालन से जुड़े विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। उनके आरोपों का केंद्र यह रहा कि इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं हो पाया और परियोजना के संचालन को लेकर विवाद बना हुआ है। ये आरोप राजभर की ओर से लगाए गए हैं; खर्च और संचालन समिति से जुड़े तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
30 साल की लीज पर JPNIC का संचालन
JPNIC अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल रहा है। वर्ष 2016 में इसका उद्घाटन हुआ था, लेकिन केंद्र का निर्माण पूरी तरह पूरा नहीं हो सका। अगस्त 2026 में उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने इसके संचालन और रखरखाव के लिए निजी समूह को 30 साल की लीज देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सरकार के अनुसार, लीज लेने वाले समूह को केंद्र का शेष निर्माण कार्य पूरा करना होगा और संचालन की जिम्मेदारी संभालनी होगी। जमीन और संपत्तियों का स्वामित्व LDA के पास ही रहेगा। सरकार व्यवस्था को बेहतर प्रबंधन और अधूरे काम को पूरा कराने का रास्ता बता रही है, जबकि अखिलेश इसे स्मारक को निजी हाथों में सौंपने का फैसला मानते हैं। इसी लीज व्यवस्था को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जयप्रकाश नारायण की जयंती पर शुरू हुआ यह विवाद अब परियोजना की लागत, संचालन और राजनीतिक विरासत के मुद्दों तक पहुंच गया है।


