- सीसामऊ में 2022 के चुनाव में 60 बूथों पर दहाई वोट नहीं पा सकी थी पार्टी, करीब 90 बूथों पर संगठन कमजोर होने का आकलन; आर्यनगर और छावनी में भी लगातार दो चुनावों से हार, अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनस उस्मानी के सामने चुनौती
भारत 19
राजीव सक्सेना, कानपुर। दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा का कानपुर शहर में भले ही मजबूत आधार हो, लेकिन सीसामऊ, आर्यनगर और छावनी विधानसभा क्षेत्रों के कई बूथों पर संगठन नहीं है। कई बूथ पर तो चुनाव में बस्ता लगाने वाला नहीं होता। सीसामऊ में 2022 के विधानसभा चुनाव के बूथवार आंकड़े इस चुनौती की तस्वीर सामने रखते हैं। यहां 60 बूथ ऐसे थे, जहां पार्टी को दहाई का आंकड़ा भी नहीं मिला था। स्थानीय संगठन से जुड़े आकलन में करीब 90 बूथों पर संगठनात्मक स्थिति कमजोर होने की बात भी सामने आई थी। शहर के नेता अनस उस्मानी को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद इन इलाकों में संगठन की सक्रियता बढ़ाना और महत्वपूर्ण हो गया है।
सीसामऊ में 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद 2024 के उपचुनाव में भी भाजपा को जीत नहीं मिली। दूसरी ओर आर्यनगर और छावनी सीटों पर भी पार्टी पिछले दो विधानसभा चुनावों में हार का सामना कर चुकी है। तीनों क्षेत्रों में चुनौती केवल मतदाताओं तक पहुंच बनाने की नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं की मौजूदगी बढ़ाने और स्थानीय लोगों से नियमित संवाद कायम करने की भी है।
तीनों सीटों पर लगातार चुनावी चुनौती
सीसामऊ विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के इरफान सोलंकी को 79,163 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के सलिल विश्नोई को 66,897 मत हासिल हुए थे। इसके बाद 2024 के उपचुनाव में भी भाजपा यह सीट नहीं जीत सकी। घनी मुस्लिम आबादी वाले कई मोहल्लों में पार्टी का कमजोर प्रदर्शन उसके लिए चिंता का विषय रहा है। आर्यनगर में 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में सपा के अमिताभ बाजपेयी ने भाजपा प्रत्याशियों को हराया था। छावनी सीट पर 2017 में कांग्रेस और 2022 में सपा ने जीत दर्ज की। इन सीटों के चुनावी समीकरण अलग-अलग हैं। सीसामऊ में मुस्लिम वोटरों की भूमिका अहम है, वहीं आर्यनगर और छावनी में दूसरे सामाजिक वर्गों का समर्थन भी चुनावी परिणाम को प्रभावित करता है। भाजपा के लिए इन क्षेत्रों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर संगठन को सक्रिय करना जरूरी होगा।
60 बूथों पर दहाई वोट नहीं, 90 पर संगठन कमजोर
सीसामऊ में 2022 के विधानसभा चुनाव के बूथवार आंकड़ों को लेकर सामने आए स्थानीय आकलन में बताया गया था कि 60 बूथों पर भाजपा को 10 से कम वोट मिले। करीब 90 बूथों पर संगठन की स्थिति कमजोर होने की बात भी कही गई थी। ये आंकड़े उन इलाकों में पार्टी की चुनावी पहुंच और बूथ प्रबंधन की समीक्षा की जरूरत की ओर संकेत करते हैं। हालांकि, कम वोट मिलना और बूथ पर संगठन का न होना दो अलग-अलग स्थितियां हैं। इसलिए इन आंकड़ों के आधार पर पूरे क्षेत्र में संगठन की अनुपस्थिति का निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित बूथों पर पार्टी की मौजूदगी, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और पिछले चुनावों के प्रदर्शन का अलग-अलग आकलन जरूरी है।
अनस उस्मानी के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती
भाजपा ने मुस्लिम समाज के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक मोर्चे को संगठनात्मक जिम्मेदारी दी है। कानपुर के अनस उस्मानी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद शहर की इन सीटों पर पार्टी की गतिविधियों और संगठन की स्थिति पर ध्यान जाना स्वाभाविक है। चुनौती केवल मुस्लिम मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुंचाने की नहीं है। जिन इलाकों में भाजपा को कम वोट मिलते रहे हैं, वहां बूथ समितियों की मौजूदगी, स्थानीय कार्यकर्ताओं का नियमित संपर्क और लोगों की समस्याओं पर सक्रियता भी महत्वपूर्ण होगी। पार्टी को यह भी देखना होगा कि संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने वाले नेता इन इलाकों में कितनी नियमितता से पहुंचते हैं।
घर-घर संपर्क की योजना नहीं पकड़ सकी रफ्तार
लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा से जुड़े कुछ मुस्लिम नेताओं और महिलाओं ने मुस्लिम परिवारों तक पहुंच बनाने के लिए घर-घर संपर्क अभियान की योजना तैयार की थी। इसके तहत मुस्लिम महिलाओं की टोलियां बनाकर घरों तक पहुंचने और पार्टी की नीतियों व कार्यक्रमों की जानकारी देने का विचार था। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, योजना पर चर्चा हुई, लेकिन प्रस्तावित टोलियां व्यापक स्तर पर सक्रिय नहीं हो सकीं। पहल के प्रभावी ढंग से लागू न होने से पार्टी के सामने मुस्लिम बहुल बस्तियों में नियमित संपर्क बनाने का सवाल बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर पार्टी से जुड़े कुछ अल्पसंख्यक नेताओं का भी मानना है कि संगठन के भीतर समर्थन का आकलन करना आसान नहीं है। हालांकि, व्यक्तिगत अनुभवों को पूरे समुदाय या सभी कार्यकर्ताओं की स्थिति का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
2027 से पहले बूथ प्रबंधन पर नजर
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए कानपुर की इन तीन सीटों पर संगठनात्मक समीक्षा महत्वपूर्ण रहेगी। सीसामऊ में कम वोट पाने वाले बूथों की पहचान, कमजोर संगठनात्मक इकाइयों को सक्रिय करना और आर्यनगर व छावनी में पिछले चुनावों के परिणामों की समीक्षा पार्टी की तैयारियों का हिस्सा हो सकती है। अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनस उस्मानी के सामने भी स्थानीय संगठन के साथ बेहतर तालमेल बनाने और संपर्क अभियानों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की चुनौती रहेगी। अब यह देखना होगा कि पार्टी इन इलाकों में बूथ स्तर की सक्रियता बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाती है और आगामी चुनावों में इसका क्या असर पड़ता है।

