- गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर दिल्ली पुलिस का फैसला, रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड को बनाया गया वैकल्पिक ठिकाना, अभिजीत दिपके बोले- ‘अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा’
भारत 19/ नई दिल्ली। दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के प्रमुख केंद्र रहे जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। दिल्ली पुलिस के 11 अक्टूबर को जारी आदेश के बाद अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है। इस फैसले ने राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों के आयोजन को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।”
गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर फैसला
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से जारी स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर L&O/48/2026 के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने धरना-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थानों की समीक्षा करने के लिए एक समिति गठित की थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डिनोटिफाई किया गया है। नए आदेश में 28 अप्रैल 2022 को जारी पुराने स्टैंडिंग ऑर्डर में आंशिक संशोधन किया गया है।
दिल्ली में प्रदर्शन के लिए अब तीन निर्धारित स्थल
दिल्ली पुलिस के आदेश के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए तीन जगहें निर्धारित की गई हैं। इनमें मध्य दिल्ली का रामलीला मैदान, उत्तर-पश्चिम दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड शामिल है। इन स्थलों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी। इसके तहत अनुमति, आयोजन और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी शर्तें स्पष्ट होंगी।
अभिजीत दिपके बोले- अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उनका बयान, “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा”, फैसले के विरोध में उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आया है। CJP ने इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान किया था।
जंतर-मंतर का दर्जा बदलने का क्या होगा असर
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, कर्मचारियों और विभिन्न जनसमूहों के धरना-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद आयोजकों को नए स्थलों और वहां लागू नियमों के अनुरूप प्रदर्शन की योजना बनानी होगी। हालांकि, इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि शांतिपूर्ण विरोध का संवैधानिक अधिकार समाप्त हो गया है। किसी भी प्रदर्शन के लिए लागू अनुमति और कानून-व्यवस्था संबंधी नियम अलग से प्रभावी रहेंगे। अब नए स्थलों के लिए जारी होने वाली SOP अहम होगी, क्योंकि उसी से प्रदर्शन की अनुमति और आयोजन की व्यावहारिक शर्तें स्पष्ट होंगी।


