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सुप्रीम कोर्ट मार्च से पहले INDIA ब्लॉक को बड़ा झटका

  • CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को मिलने का समय नहीं दिया, वोट चोरी के आरोप, SIR पर रोक और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लेकर सोमवार को मार्च निकालने की तैयारी

भारत 19/ नई दिल्ली। चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर आंदोलन कर रहे विपक्षी INDIA ब्लॉक को सोमवार के प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट मार्च से पहले झटका लगा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मुलाकात की मांग स्वीकार नहीं की है। दोनों नेताओं ने सोमवार को शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने के लिए पत्र लिखा था। रविवार देर रात सामने आई जानकारी के मुताबिक, CJI की ओर से ईमेल के जरिए जवाब भेजा गया है। विपक्ष ने इसके बावजूद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी की है।

CJI ने मुलाकात से इनकार करने की बताई वजह

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, CJI की ओर से भेजे गए जवाब में कहा गया है कि विपक्ष जिन मुद्दों को उठाना चाहता है, वे अदालत में पहले से लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के पास प्रशासनिक स्तर पर किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल से इस तरह मुलाकात करने का अधिकार नहीं है। अदालत की भूमिका याचिका पर सुनवाई करने और फैसला देने की है। रिपोर्टों के अनुसार, जवाब में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यदि विपक्ष इन मुद्दों पर याचिका दाखिल करता है, तो अदालत उस पर सुनवाई कर सकती है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, जवाब में मंगलवार को सुनवाई के लिए याचिका लाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है।

वोट चोरी और SIR के मुद्दे पर निकलेगा मार्च

राहुल गांधी ने सोमवार, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। विपक्षी दलों की योजना CJI को ज्ञापन सौंपकर चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग करने की थी। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को ‘चलो दिल्ली–मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया है। विपक्ष की प्रमुख मांगों में कथित ‘वोट चोरी’ पर रोक, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है। विपक्ष ने चुनावों में पेपर बैलेट की वापसी की मांग भी उठाई है। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप और रखी गई मांगें हैं; इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

राष्ट्रपति को ज्ञापन देने के बाद बढ़ा आंदोलन

इससे पहले शुक्रवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं ने संसद से विजय चौक तक मार्च निकाला था और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपा था। विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर लगातार विरोध दर्ज करा रहा है। शनिवार को दिल्ली में युवा प्रदर्शनकारियों के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई और हिरासतों को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ था। राहुल गांधी ने सोमवार के मार्च को किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम बताने के बजाय नागरिकों, युवाओं और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों की साझा पहल बताया है। 

CJI के इनकार के बाद भी मार्च की तैयारी

CJI से मुलाकात का समय नहीं मिलने के बावजूद विपक्षी दलों ने मार्च की तैयारी जारी रखी है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारी सोमवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड क्षेत्र में एकत्र होकर सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ने वाले हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के भी मार्च में शामिल होने की खबर है। अब घटनाक्रम के दो प्रमुख पहलू हैं, विपक्ष मार्च के जरिए चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाना चाहता है, जबकि CJI के जवाब में इन मुद्दों को न्यायिक प्रक्रिया के जरिए उठाने का संकेत दिया गया है। सोमवार को मार्च की स्थिति और विपक्ष की अगली कानूनी रणनीति पर नजर रहेगी।

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