- शांतिपूर्ण विरोध के लिए सुविधाओं से लैस जगह तय करने पर जोर, शौचालय, पेयजल और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था हो, सक्षम अधिकारियों को उचित निर्णय लेने को कहा; दिल्ली में प्रदर्शन से पहले मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पाबंदियों को लेकर हुई सुनवाई
भारत 19/ नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह तलाशने को कहा है। अदालत का कहना है कि राजधानी में ऐसा स्थल होना चाहिए, जहां लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकें और उन्हें बुनियादी सुविधाएं भी मिलें। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस सुझाव पर सक्षम प्राधिकारियों को विचार कर उचित निर्णय लेने को कहा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आवाजाही व सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी है।
जंतर-मंतर के विकल्प पर क्यों हुई चर्चा?
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियों और राजधानी आने वाली ट्रेनों को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान उठा। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सार्वजनिक परिवहन पर प्रस्तावित पाबंदियों को लेकर सवाल उठे। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार जंतर-मंतर के अलावा किसी अन्य स्थल को प्रदर्शन के लिए निर्धारित करने के सुझाव पर विचार करेगी।
प्रदर्शनकारियों को मिलेंगी बुनियादी सुविधाएं
अदालत ने कहा कि वैकल्पिक स्थल ऐसा होना चाहिए, जहां प्रदर्शनकारियों के लिए पर्याप्त जगह और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों। इनमें शौचालय, पीने का पानी, चिकित्सा सहायता और अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं शामिल हैं। आपात स्थिति में एंबुलेंस और दूसरी आवश्यक सेवाओं की पहुंच भी बाधित नहीं होनी चाहिए। पीठ ने संकेत दिया कि जंतर-मंतर की भौगोलिक स्थिति और आसपास के संवेदनशील इलाकों के कारण प्रदर्शन के दौरान व्यवस्थागत कठिनाइयां सामने आती हैं। किसी बेहतर स्थल पर प्रदर्शनकारियों की जरूरतों और आम नागरिकों की सुविधा, दोनों का ध्यान रखा जा सकता है।
परिवहन सेवाओं पर पाबंदियों को लेकर भी सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक पाबंदियों के प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। पीठ ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा उपाय जरूरी हो सकते हैं, लेकिन उनका अनुपात ऐसा होना चाहिए कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और आवश्यक सेवाएं पूरी तरह बाधित न हों। दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने के अनुरोध तथा नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन आने वाली ट्रेनों को रद्द किए जाने का मुद्दा भी सुनवाई में उठा। अदालत ने सार्वजनिक परिवहन पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय संतुलित व्यवस्था पर विचार करने को कहा।
अभी तय नहीं हुआ नया प्रदर्शन स्थल
सुप्रीम कोर्ट ने वैकल्पिक स्थल की पहचान और निर्धारण का अंतिम फैसला सरकार तथा सक्षम अधिकारियों पर छोड़ा है। अदालत ने किसी खास जगह को नया प्रदर्शन स्थल घोषित नहीं किया है। केंद्र और संबंधित प्राधिकारियों को उपलब्ध विकल्पों पर विचार करके उचित निर्णय लेना होगा। अदालत की टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार बनाए रखने के साथ-साथ सार्वजनिक व्यवस्था, आपात सेवाओं और नागरिकों की आवाजाही का ध्यान रखना भी जरूरी है। अब देखना होगा कि सरकार जंतर-मंतर के विकल्प के तौर पर किस जगह पर विचार करती है और वहां प्रदर्शनकारियों के लिए किस तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।


