UPUMS के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग में ऑक्यूपेशनल थैरेपी रूम शुरू; बीमारी, चोट, दिव्यांगता और न्यूरोलॉजिकल समस्या से प्रभावित मरीजों को रोजमर्रा के कामों में आत्मनिर्भर बनाने की मिलेगी ट्रेनिंग
भारत 19/ इटावा। बीमारी या चोट के बाद मरीज को सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए अब उपचार के साथ उसकी खोई कार्यक्षमता बहाल करने पर भी जोर दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (UPUMS), सैफई के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग में ऑक्यूपेशनल थैरेपी रूम शुरू किया गया है। इसका उद्घाटन कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने किया।
रोजमर्रा के काम फिर खुद करने की मिलेगी ट्रेनिंग
नई सुविधा में मरीजों को उनकी जरूरत के अनुसार दैनिक जीवन की गतिविधियों का अभ्यास कराया जाएगा। खाना खाने, कपड़े पहनने, व्यक्तिगत देखभाल और अन्य जरूरी कामों को दोबारा करने की क्षमता विकसित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है। बीमारी, चोट, दिव्यांगता या न्यूरोलॉजिकल समस्या से प्रभावित मरीजों को इससे विशेष लाभ मिलेगा।
शारीरिक क्षमता के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ेगा
ऑक्यूपेशनल थैरेपी में मरीज की शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक, सामाजिक और व्यावसायिक कार्यक्षमता पर भी काम किया जाएगा। कौशल आधारित गतिविधियों के जरिए मरीजों को अपनी उपलब्ध क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जाएगा। इससे दैनिक जीवन में उनकी भागीदारी और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कुलपति बोले- पुनर्वास भी इलाज का हिस्सा
कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में मरीज को केवल बीमारी से मुक्त करना पर्याप्त नहीं है। उपचार का लक्ष्य उसकी कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता लौटाकर उसे सम्मानजनक जीवन की ओर वापस ले जाना भी होना चाहिए। उन्होंने मरीज-केंद्रित पुनर्वास सेवाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया।
सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों को भी लाभ
थैरेपी रूम के उद्घाटन के साथ विभाग में विश्व सेरेब्रल पाल्सी दिवस भी मनाया गया। इस वर्ष की थीम ‘Unique and United’ रही। कार्यक्रम में सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों और उनके अभिभावकों को बीमारी की शुरुआती पहचान, समय पर उपचार और नियमित थेरेपी के महत्व की जानकारी दी गई।
शुरुआती पहचान और थेरेपी से बेहतर परिणाम
विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कनौजिया ने बताया कि सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शुरुआती पहचान और समय पर पुनर्वास बेहद जरूरी है। फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी और अन्य चिकित्सकीय सेवाओं को एक साथ उपलब्ध कराने से बच्चों की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
फिजियोथेरेपी के साथ ऑक्यूपेशनल थैरेपी का समन्वय
प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर (डॉ.) आदेश कुमार ने कहा कि सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के समग्र विकास के लिए फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी और चिकित्सकीय सेवाओं के बीच समन्वय जरूरी है। इससे मरीज की जरूरत के अनुसार व्यापक पुनर्वास योजना तैयार की जा सकेगी। कार्यक्रम में चिकित्सकों, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट, स्वास्थ्यकर्मियों, बच्चों और उनके अभिभावकों ने सहभागिता की। अभिभावकों को सेरेब्रल पाल्सी और नियमित थेरेपी से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी गई।


