- रेपो रेट 5.50% होने के बाद FIEO की मांग, शिपिंग में देरी, विदेशी खरीदारों से भुगतान अटकने और बढ़ती वित्तीय लागत के बीच 270 दिन की अवधि बढ़ाकर 450 दिन करने का सुझाव
भारत 19/ नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद निर्यातकों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) ने एक्सपोर्ट क्रेडिट की अवधि बढ़ाने की मांग की है। FIEO ने प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट की मौजूदा 270 दिन की अवधि बढ़ाकर 450 दिन करने का सुझाव दिया है। संगठन के मुताबिक वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, शिपिंग और परिवहन में लग रहे अतिरिक्त समय तथा विदेशी खरीदारों से भुगतान में देरी के कारण निर्यातकों का कार्यशील पूंजी चक्र लंबा हो गया है। ऐसे में मौजूदा क्रेडिट अवधि कई कारोबारों के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है।
रेपो रेट बढ़ने से कर्ज की लागत बढ़ने की आशंका
RBI ने बढ़ती महंगाई के दबाव को देखते हुए पॉलिसी रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही मौद्रिक नीति का रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी सोच-समझकर सख्ती की ओर किया गया है। FIEO ने महंगाई और कीमतों में स्थिरता के लिहाज से इस कदम को उचित बताया, लेकिन कहा कि ब्याज दर बढ़ने से कारोबार के लिए कर्ज की लागत बढ़ेगी। इसका असर खासकर कम मार्जिन पर काम करने वाले निर्यातकों और MSME पर पड़ सकता है।
शिपिंग से भुगतान तक लंबा हुआ निर्यात कारोबार
FIEO अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा कि निर्यातक ऐसे समय में कारोबार कर रहे हैं, जब भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन में व्यवधान, परिवहन में अधिक समय और विदेशी खरीदारों से भुगतान में देरी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि माल तैयार करने से लेकर उसकी शिपिंग और फिर भुगतान प्राप्त होने तक का समय बढ़ गया है। ऐसे में 270 दिन की क्रेडिट अवधि कई कारोबारों के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है।
450 दिन की अवधि से मिलेगी वित्तीय गुंजाइश
FIEO ने कहा कि प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट की अवधि 450 दिन करने से निर्यातकों को विदेशी ऑर्डर पूरे करने और भुगतान चक्र में हुई देरी को संभालने के लिए अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश मिलेगी। संगठन के अनुसार इससे निर्यातकों को बढ़ती कार्यशील पूंजी की जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी और वैश्विक बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनाए रखने में भी सहूलियत होगी।
MSME निर्यातकों के लिए सस्ती पूंजी की जरूरत
FIEO ने मौद्रिक नीति में सख्ती के बीच निर्यात क्षेत्र के लिए लक्षित तरलता सहायता और किफायती एक्सपोर्ट क्रेडिट उपलब्ध कराने की जरूरत बताई है। संगठन के मुताबिक बड़ी कंपनियों की तुलना में MSME निर्यातकों के वित्तीय संसाधन सीमित होते हैं। ऐसे में सस्ती कार्यशील पूंजी उन्हें बढ़ती इनपुट और वित्तीय लागत का सामना करने में मदद कर सकती है।
7.1% GDP वृद्धि को FIEO ने बताया सकारात्मक संकेत
FIEO ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए RBI के 7.1 प्रतिशत वास्तविक GDP वृद्धि अनुमान का भी उल्लेख किया। संगठन के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि और वस्तुओं व सेवाओं के निर्यात में तेजी वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सकारात्मक आधार तैयार कर रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रहने को भी संगठन ने अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया।
वैश्विक जोखिमों के बीच नीतिगत समर्थन की मांग
FIEO के मुताबिक भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने से निर्यात कारोबार पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में निर्यात क्षेत्र को अतिरिक्त नीतिगत समर्थन देने की जरूरत है। संगठन ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौतों, सेवा निर्यात में वृद्धि और मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में सुधार के जरिए भारत के पास वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर है। इसके लिए निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी लागत पर वित्त उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
270 से 450 दिन की अवधि को बताया अहम
FIEO के अनुसार एक्सपोर्ट क्रेडिट की अवधि 270 दिन से बढ़ाकर 450 दिन करना सिर्फ वित्तीय राहत का उपाय नहीं होगा। इससे निर्यातकों को विदेशी ऑर्डर पूरे करने, लंबे भुगतान चक्र को संभालने और नए बाजारों में विस्तार करने के लिए जरूरी वित्तीय लचीलापन मिलेगा।


