- 2024 में पद से हटे, 2025 और 2026 में पार्टी से हुए बाहर; हर संकट के बाद मायावती ने दी नई जिम्मेदारी, अब 2027 से पहले फिर संगठन की कमान
भारत 19/ लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद की राजनीतिक पारी एक बार फिर नए मोड़ पर है। मायावती ने 10 सितंबर को पार्टी से अलग किए गए अपने भतीजे को 5 अक्टूबर को फिर राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंप दी। दो बार पार्टी से बाहर किए जाने के बावजूद आकाश की यह तीसरी बड़ी वापसी है। यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब BSP उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए संगठन को सक्रिय करने में जुटी है।
2024 में पहली बार संगठन से हटाया गया
आकाश आनंद की सियासी राह में पहला बड़ा ब्रेक मई 2024 में आया। लोकसभा चुनाव के दौरान उनके बयानों को लेकर विवाद के बाद मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया और राजनीतिक उत्तराधिकारी का दर्जा भी वापस ले लिया। लेकिन करीब डेढ़ महीने बाद ही समीकरण बदल गए। जून 2024 में मायावती ने आकाश को फिर राष्ट्रीय संयोजक बनाया और उत्तराधिकारी की भूमिका भी बहाल कर दी। इस घटनाक्रम ने पहली बार यह संकेत दिया कि BSP में आकाश की भूमिका को लेकर मायावती का रुख स्थायी नहीं है।
2025 में पद से आगे बढ़ा विवाद
मार्च 2025 में मतभेद फिर सामने आए। इस बार आकाश को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटाने के साथ BSP से निष्कासित कर दिया गया। उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की भूमिका भी इस घटनाक्रम के केंद्र में रही।
आकाश ने इसके बाद मायावती से माफी मांगी। अप्रैल में उन्हें पार्टी में वापस ले लिया गया और बाद में संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी दी गई। इस वापसी ने यह स्पष्ट किया कि निष्कासन के बावजूद मायावती ने आकाश के लिए राजनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया था।
सितंबर 2026 में फिर टूटा भरोसा
इस साल सितंबर में मतभेद एक बार फिर चरम पर पहुंचे। 3 सितंबर को मायावती ने आकाश को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया। इसके पीछे उनकी राजनीतिक परिपक्वता और कामकाज को लेकर असंतोष बताया गया। 10 सितंबर को कार्रवाई और आगे बढ़ी और आकाश को पार्टी से पूरी तरह अलग कर दिया गया। इसके बाद 23 सितंबर को उनके छोटे भाई ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया। उस समय संकेत यही था कि संगठन में आकाश की भूमिका फिलहाल खत्म हो गई है।
दो अक्टूबर की अपील ने बदला घटनाक्रम
आकाश ने वापसी का रास्ता खुद खोला। 2 अक्टूबर को उन्होंने मायावती से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए दोबारा उनके नेतृत्व में काम करने की इच्छा जताई। उन्होंने BSP को अपना राजनीतिक परिवार बताया और दूसरे दल में जाने की अटकलों को खारिज किया। इसके बाद मायावती ने पार्टी के भीतर बनी राय और आकाश के बदले रवैये को देखते हुए उन्हें एक और मौका देने का फैसला किया।
पांच अक्टूबर को फिर मिली संगठन की कमान
मायावती ने 5 अक्टूबर को आकाश को फिर राष्ट्रीय संयोजक बनाने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से हटने के बाद आकाश के काम करने के तरीके में बदलाव आया है।
हालांकि वापसी के साथ एक शर्त भी साफ दिखाई दी। मायावती ने आकाश के भविष्य को उनके व्यवहार और कामकाज से जोड़ते हुए संकेत दिया कि आगे संगठन में उनकी स्थिति इसी पर निर्भर करेगी।
तीन वापसी, लेकिन हर बार बदली परिस्थितियां
आकाश आनंद की अब तक की राजनीतिक यात्रा को तीन पड़ावों में समझा जा सकता है—
- 2024 : राष्ट्रीय संयोजक और राजनीतिक उत्तराधिकारी की भूमिका गई, फिर बहाल हुई।
- 2025 : BSP से निष्कासन के बाद वापसी हुई।
- 2026 : दोबारा पार्टी से बाहर हुए और फिर राष्ट्रीय संयोजक बन गए।
यानी वापसी हर बार हुई, लेकिन हर वापसी की वजह और परिस्थितियां अलग रहीं। मौजूदा घटनाक्रम में खास बात यह है कि सितंबर में ईशान आनंद को दी गई जिम्मेदारी भी अब आकाश की वापसी के साथ बदल गई है।
2027 से पहले आकाश के सामने असली चुनौती
आकाश की ताजा वापसी का महत्व केवल संगठनात्मक पद तक सीमित नहीं है। BSP को अगले विधानसभा चुनाव से पहले अपना आधार मजबूत करना है और आकाश को युवा नेतृत्व के चेहरे के तौर पर फिर सक्रिय होना होगा। लेकिन इस बार उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती मायावती का भरोसा बनाए रखने की होगी। पिछली घटनाएं बता चुकी हैं कि BSP में महत्वपूर्ण पद मिलना अपने आप में स्थायी राजनीतिक सुरक्षा की गारंटी नहीं है। इसलिए 5 अक्टूबर का फैसला आकाश के लिए जितना एक और मौका है, उतना ही उनके राजनीतिक भविष्य का बड़ा इम्तिहान भी।


