- हॉर्मुज संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध से बढ़ा ईंधन दबाव; मार्च के 40 करोड़ बैरल आपातकालीन कार्यक्रम की शेष मात्रा चार महीने में बाजार में आएगी
भारत 19 डेस्क। वैश्विक तेल और डीजल बाजार में बढ़ते दबाव के बीच G7 देशों ने रणनीतिक भंडार से करीब 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बाजार में उतारने की तैयारी की है। यह मार्च में घोषित 40 करोड़ बैरल के आपातकालीन रिलीज कार्यक्रम की शेष मात्रा है। International Energy Agency (IEA) के समन्वय में इसकी आपूर्ति अगले चार महीनों में की जाएगी। शुरुआती 20 दिनों में डीजल की उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।
ईंधन संकट के बीच G7 ने तेज की आपूर्ति
G7 का यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब मध्य पूर्व के संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। कच्चे तेल के साथ डीजल और दूसरे रिफाइंड उत्पादों की उपलब्धता को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है। G7 ने IEA को आपातकालीन भंडार रिलीज की निगरानी और सदस्य देशों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी दी है। मकसद बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचाकर तत्काल दबाव को कम करना है।
डीजल की कमी पर पहले 20 दिन फोकस
नई योजना में डीजल को प्राथमिकता दी गई है। सदस्य देशों से शुरुआती 20 दिनों में रणनीतिक भंडार से पर्याप्त मात्रा में डीजल बाजार में उतारने को कहा गया है। डीजल की उपलब्धता पर दबाव का असर परिवहन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ता है। इसलिए G7 ने कच्चे तेल की तुलना में रिफाइंड ईंधन की तत्काल आपूर्ति को अधिक महत्व दिया है।
40 करोड़ बैरल कार्यक्रम का बचा हिस्सा
IEA के अनुसार, मार्च में घोषित 40 करोड़ बैरल की आपातकालीन रिलीज में से करीब 32.5 करोड़ बैरल पहले ही बाजार में पहुंच चुके हैं। अब लगभग 10 करोड़ बैरल की शेष मात्रा को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाना है। इसलिए ताजा फैसला एक अलग नई 10 करोड़ बैरल रिलीज के बजाय मार्च में तय आपातकालीन कार्यक्रम को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ी चिंता
वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम जोखिमों में शामिल है। यहां समुद्री यातायात में लंबे समय तक बाधा आने पर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। G7 ने हॉर्मुज के रास्ते वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और नौवहन अधिकार बहाल करने पर जोर दिया है। इसी मार्ग से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आवाजाही होती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने बढ़ाया डीजल दबाव
ऊर्जा बाजार पर दूसरा बड़ा दबाव रूस-यूक्रेन युद्ध से आया है। यूक्रेन के रूसी तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों से वहां की रिफाइनिंग क्षमता और ईंधन उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका असर खास तौर पर डीजल और दूसरे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के बाजार पर पड़ा है। मध्य पूर्व से आपूर्ति में जोखिम जुड़ने के बाद G7 के लिए रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल और महत्वपूर्ण हो गया है।
G7 देशों ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया
रणनीतिक भंडार जारी करने के साथ G7 देशों ने ऊर्जा उत्पादों पर आपसी निर्यात प्रतिबंध नहीं लगाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इसका उद्देश्य संकट की स्थिति में सहयोगी देशों के बीच तेल और ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है। G7 ने रिफाइनरी रखरखाव कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय और जहां संभव हो, रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक तेल कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का असर देश के आयात बिल और घरेलू ईंधन बाजार पर पड़ सकता है। G7 की रणनीतिक रिलीज से बाजार में आपूर्ति बढ़ने पर कीमतों का दबाव कुछ कम हो सकता है। हालांकि इसका वास्तविक असर हॉर्मुज में समुद्री यातायात, मध्य पूर्व के संघर्ष और रूस की तेल आपूर्ति में आगे होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।


