- विदेशी निवेशकों ने सितंबर में 44,013 करोड़ रुपये निकाले, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 76,030 करोड़ लगाए; IPO के जरिए कंपनियों ने जुटाए करीब 39,340 करोड़ रुपये
भारत 19
दिल्ली। सितंबर में शेयर बाजार की तेज गिरावट ने निवेश की तस्वीर को एक दिलचस्प मोड़ दिया। निफ्टी और सेंसेक्स नीचे गए, विदेशी निवेशकों ने बड़ी रकम निकाली, लेकिन बाजार में पैसा थमा नहीं। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रही और कंपनियों ने IPO के जरिए बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाई। यानी निवेश का रुझान खत्म होने के बजाय उसका रास्ता बदलता दिखाई दिया—पुराने शेयरों से निकलने वाली पूंजी का एक हिस्सा घरेलू निवेश और नए इश्यू की ओर गया।
सितंबर के दौरान निफ्टी करीब 6.1 प्रतिशत और सेंसेक्स 5.8 प्रतिशत नीचे रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली, कमजोर रुपया, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों से जुड़े दबावों ने सेंटीमेंट पर असर डाला। सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 44,013 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की।
21 कारोबारी सत्रों में घरेलू संस्थानों की खरीदारी
बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की गतिविधि ने अलग तस्वीर पेश की। सितंबर के सभी 21 कारोबारी सत्रों में DII शुद्ध खरीदार रहे और पूरे महीने करीब 76,030 करोड़ रुपये का निवेश किया। महीने के आखिरी कारोबारी दिन 30 सितंबर को भी विदेशी निवेशकों ने 10,148 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 11,272 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इससे बाजार में विदेशी और घरेलू पूंजी के बीच बढ़ता अंतर साफ दिखाई देता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने बाजार में तरलता और मांग को पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ने दिया।
पुराने शेयर दबाव में, IPO बाजार सक्रिय
इसी दौरान प्राथमिक बाजार में गतिविधि तेज रही। सितंबर में 34 मेनबोर्ड IPO के जरिए कंपनियों ने करीब 39,340 करोड़ रुपये जुटाए। यह 2026 में किसी एक महीने में IPO के जरिए जुटाई गई सबसे बड़ी रकम रही। यानी एक तरफ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव था, तो दूसरी तरफ नई कंपनियां और कारोबारी समूह निवेशकों से पूंजी जुटाने में सफल रहे। IPO बाजार की यह सक्रियता बताती है कि बाजार में जोखिम को लेकर सतर्कता के बावजूद नए अवसरों के लिए पूंजी उपलब्ध है। IPO का पाइपलाइन भी बड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 237 कंपनियां लगभग 4.48 लाख करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं। इनमें से 120 कंपनियों को सेबी की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 117 कंपनियों के आवेदन अभी मंजूरी की प्रक्रिया में हैं।
बाजार गिरा, लेकिन पैसा बाजार से बाहर नहीं गया
इस पूरे घटनाक्रम को केवल शेयर बाजार की गिरावट के रूप में देखना तस्वीर का एक हिस्सा ही होगा। सितंबर में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट जरूर आई, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेश और IPO में पूंजी जुटाने की गतिविधि बनी रही। इसका मतलब यह नहीं कि हर निवेशक ने अपना पैसा एक ही जगह से निकालकर दूसरी जगह लगा दिया, लेकिन आंकड़े यह जरूर दिखाते हैं कि बाजार में पूंजी का प्रवाह अलग-अलग रास्तों से जारी रहा। बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त तरलता और रिजर्व बैंक की ओर से तरलता प्रबंधन के कदम भी इसी व्यापक तस्वीर का हिस्सा हैं। इसलिए शेयर सूचकांकों में गिरावट को सीधे अर्थव्यवस्था या वित्तीय व्यवस्था में पैसे की कमी के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
विशेषज्ञ को बाजार में जल्द रिकवरी की उम्मीद
केश्री ब्रोकिंग के को-फाउंडर राजीव सिंह के मुताबिक मौजूदा गिरावट के बीच निवेशकों का एक वर्ग अब बाजार को निवेश के अवसर के तौर पर देख रहा है। उनका कहना है कि बाजार में एक सामान्य धारणा है कि अच्छी खबर आने पर कीमतें पहले बढ़ जाती हैं, जबकि गिरावट के दौर में निवेशकों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ज्यादा यूनिट मिल सकती हैं। सिंह के मुताबिक बाजार की वापसी में एक-दो महीने लगें या उससे अधिक समय, लेकिन उन्हें निकट भविष्य में रिकवरी की उम्मीद है। उनका मानना है कि बाजार लौटने की स्थिति में रिकवरी की रफ्तार तेज हो सकती है। यह उनका बाजार पर नजरिया है, निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं।
आम निवेशक के लिए तस्वीर क्या कहती है
सितंबर की हलचल में आम निवेशक के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात बाजार की दिशा से ज्यादा निवेश के अलग-अलग रास्तों को समझना है। SIP के जरिए नियमित निवेश करने वालों के लिए बाजार की गिरावट का प्रभाव उनके निवेश की अवधि और संपत्ति आवंटन पर निर्भर करेगा। वहीं IPO में निवेश करने वालों के लिए कंपनी का कारोबार, मूल्यांकन, जोखिम और इश्यू की शर्तों को देखना जरूरी है। इसी तरह बाजार में गिरावट का मतलब यह भी नहीं कि बैंक कर्ज या EMI की लागत अपने आप कम हो जाएगी। शेयर बाजार, बैंकिंग तरलता और ब्याज दरों की अपनी अलग-अलग गतिशीलता होती है। सितंबर का बाजार इसी अंतर को सामने लाता है। शेयर बाजार में गिरावट जरूर आई, लेकिन निवेश की गतिविधि रुकी नहीं। विदेशी पूंजी की निकासी के बीच घरेलू संस्थानों ने खरीदारी बढ़ाई और कंपनियों ने IPO के जरिए रिकॉर्ड स्तर पर पूंजी जुटाई। ऐसे में मौजूदा तस्वीर को सिर्फ ‘बाजार गिरा’ कहने के बजाय यह देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि गिरावट के बीच पैसा किस दिशा में जा रहा है।


