- NCR के आठ जिलों में 1,041 पंपों पर लागू होगा ‘नो PUCC, नो फ्यूल’, ANPR कैमरों से होगी वाहन की जांच; 2026 में प्रदूषण 30-35% घटाने का लक्ष्य
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वाहन मालिकों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से बड़ा बदलाव लागू हो गया है। अब वैध Pollution Under Control Certificate (PUCC/PUC) के बिना वाहन को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं मिलेगी। यह व्यवस्था पूरे NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू की गई है और उत्तर प्रदेश के NCR वाले आठ जिलों में 1,041 पेट्रोल पंप इसके दायरे में हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 में NCR क्षेत्र के वायु प्रदूषण स्तर में 30 से 35 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए केवल वाहनों पर नहीं, बल्कि औद्योगिक उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण एवं विध्वंस कचरा, पराली और पुराने वाहनों समेत प्रदूषण के कई स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई की जा रही है।
NCR के आठ जिलों में लागू है नियम
उत्तर प्रदेश का NCR क्षेत्र आठ जिलों में फैला है—मेरठ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, शामली और मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड भी इन्हीं आठ जिलों को यूपी के NCR क्षेत्र में शामिल करता है। इसलिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़ समेत इन सभी जिलों में वाहन लेकर पेट्रोल पंप जाने से पहले PUC की वैधता जांचना जरूरी होगा।
पंप पर नंबर प्लेट स्कैन होते ही खुलेगा रिकॉर्ड
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए पेट्रोल पंपों पर Automatic Number Plate Recognition (ANPR) कैमरों की व्यवस्था की जा रही है। वाहन के पंप पर पहुंचने पर नंबर प्लेट स्कैन होगी और संबंधित वाहन के PUC रिकॉर्ड का डिजिटल डेटाबेस से मिलान किया जाएगा। जहां ANPR व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय नहीं है, वहां मोबाइल एप के जरिए वाहन नंबर डालकर PUC की वैधता जांचने की व्यवस्था भी की जा रही है। मेरठ में पंप संचालकों को ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
PUC एक्सपायर मिला तो ईंधन देने से इनकार
अगर वाहन का PUC वैध नहीं है या उसकी अवधि समाप्त हो चुकी है, तो पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से इनकार किया जाएगा। CAQM की Direction No. 101 के तहत 1 अक्टूबर 2026 से पूरे NCR में वैध PUCC प्रस्तुत किए बिना ईंधन देने पर रोक का प्रावधान किया गया है। यानी यह केवल उत्तर प्रदेश सरकार की स्थानीय व्यवस्था नहीं है, बल्कि Commission for Air Quality Management (CAQM) के NCR-व्यापी प्रदूषण नियंत्रण ढांचे का हिस्सा है।
क्यों उठाया गया इतना बड़ा कदम?
CAQM के अनुसार, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन NCR में PM2.5, NOx और CO जैसे प्रदूषकों में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसलिए वाहन के प्रदूषण प्रमाणपत्र को ईंधन उपलब्ध कराने से जोड़कर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सीधे दबाव बनाने की कोशिश की गई है। उत्तर प्रदेश की कार्ययोजना में पुराने और प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना भी शामिल है। सरकार के मुताबिक NCR के यूपी वाले जिलों में करीब 26.19 लाख End-of-Life (EOL) वाहनों की पहचान की गई है। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 37,156 वाहन स्क्रैप किए गए और 460 वाहन जब्त किए गए।
सिर्फ PUC नहीं, प्रदूषण के कई मोर्चों पर अभियान
यूपी सरकार की योजना में 975 इलेक्ट्रिक बसें गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में संचालित करने का लक्ष्य भी शामिल है। अभी इन शहरों में 100 ई-बसें चल रही हैं। वायु गुणवत्ता की निगरानी मजबूत करने के लिए यूपी NCR क्षेत्र में 43 सतत वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन स्थापित किए जाने हैं, जिनमें 25 चालू हैं और 18 अक्टूबर 2026 तक स्थापित किए जाने हैं। औद्योगिक प्रदूषण के मोर्चे पर 725 प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान की गई है। इनमें 613 इकाइयों को ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली से CPCB सर्वर से जोड़ा जा चुका है। सड़क की धूल कम करने के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 1,792 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास की योजना भी चल रही है।
दिल्ली-NCR में एक साथ सख्ती की तैयारी
PUC आधारित ईंधन व्यवस्था NCR के अलग-अलग राज्यों में एक समान तरीके से लागू करने की दिशा में है। CAQM ने पेट्रोल और CNG स्टेशनों पर ANPR कैमरों की स्थापना और संचालन की निगरानी के निर्देश उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को दिए हैं। इसका व्यापक उद्देश्य यह है कि प्रदूषण नियंत्रण को केवल चालान या सड़क पर जांच तक सीमित रखने के बजाय ईंधन भरवाने की प्रक्रिया से जोड़ा जाए। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि पंप पर जाने से पहले अपने वाहन का PUC वैध है या नहीं, इसकी जांच कर लें।


