- 2 अक्टूबर का विरोध कार्यक्रम टला, ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट भुगतान पर 0.40% MDR को लेकर व्यापारियों की चिंता बरकरार; सरकार ने मुद्दे पर विचार का दिया भरोसा
भारत 19
नई दिल्ली। दो अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो यूपीआई डे’ का आह्वान वापस ले लिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) और ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रिब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) ने अपना विरोध कार्यक्रम वापस लेने का फैसला किया। प्रस्तावित MDR को लेकर व्यापारिक संगठनों की चिंताओं पर वित्त मंत्री ने विचार करने का भरोसा दिया।
₹2,000 से ऊपर UPI भुगतान पर 0.40% MDR
विरोध की मुख्य वजह ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI भुगतान पर प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत MDR है। वित्त मंत्रालय के अनुसार उपभोक्ताओं से UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान भी मुफ्त रहेगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR केवल निर्धारित मर्चेंट लेनदेन पर लागू होगा। प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और शून्य-MDR के दायरे में आने वाले लेनदेन पर शुल्क नहीं होगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।
करीब 20 व्यापारिक नेताओं ने वित्त मंत्री से की मुलाकात
CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल के नेतृत्व में करीब 20 वरिष्ठ व्यापारिक नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित MDR से खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय असर को लेकर चिंता जताई। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि उनकी आपत्ति UPI या डिजिटल भुगतान व्यवस्था से नहीं, बल्कि अतिरिक्त लागत के संभावित बोझ से है। उनका जोर ऐसी व्यवस्था पर है जिससे डिजिटल भुगतान की रफ्तार बनी रहे और कारोबारियों पर अचानक अतिरिक्त लागत न आए।
व्यापारियों ने रखीं MDR में बदलाव की मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से प्रस्तावित MDR को टालने, इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने और इसकी सीमा की समीक्षा करने की मांग रखी। व्यापारिक संगठनों ने मर्चेंट-टू-मर्चेंट लेनदेन को MDR के दायरे से बाहर रखने तथा इस मुद्दे पर विशेषज्ञ समिति गठित करने का सुझाव भी दिया।
वित्त मंत्री के आश्वासन के बाद बदला फैसला
बैठक के बाद व्यापारिक संगठनों ने कहा कि सरकार ने उनकी चिंताओं पर विचार करने का आश्वासन दिया है। इसके बाद AIMRA और AICPDF ने 2 अक्टूबर का ‘नो यूपीआई डे’ वापस ले लिया। हालांकि, ‘नो यूपीआई डे’ वापस होने का मतलब प्रस्तावित MDR खत्म होना नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ₹2,000 से अधिक के निर्धारित मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत MDR की व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने के लिए निर्धारित है।
UPI पर ग्राहक से शुल्क लगेगा या नहीं?
यहां सबसे अहम बात यह है कि MDR ग्राहक से वसूला जाने वाला UPI शुल्क नहीं है। वित्त मंत्रालय के अनुसार ग्राहक के UPI भुगतान पर कोई ट्रांजेक्शन चार्ज नहीं लगाया जाएगा। MDR मर्चेंट भुगतान व्यवस्था से जुड़ा शुल्क है, जिसका वितरण भुगतान इकोसिस्टम में शामिल संस्थाओं के बीच होता है।
‘नो यूपीआई डे’ पर सभी कारोबारी संगठन एकमत नहीं
इस पूरे मामले में व्यापारिक संगठनों के रुख में भी अंतर सामने आया है। AIMRA और AICPDF ने 2 अक्टूबर का अपना प्रस्तावित विरोध वापस ले लिया है, जबकि कुछ अन्य व्यापारी संगठनों ने विरोध जारी रखने की बात कही है। इसलिए ‘नो यूपीआई डे’ का आह्वान वापस होने को सभी व्यापारिक संगठनों की सहमति के रूप में देखना सही नहीं होगा। अब नजर 15 अक्टूबर पर है। सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच बातचीत के बाद प्रस्तावित MDR व्यवस्था में कोई बदलाव होता है या नहीं, यह आगे महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 2 अक्टूबर का ‘नो यूपीआई डे’ टल गया है, लेकिन UPI MDR का मुद्दा खत्म नहीं हुआ है।


