- कानपुर नगर निगम सदन में विवाद के बाद पूर्व जिलाध्यक्षों की नाराजगी सामने आई, कार्रवाई को लेकर उठे सवाल, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के सामने चुनौती
भारत 19
कानपुर। नगर निगम में भाजपा के कौशलपुरी मंडल मंत्री मनीष और पार्षद पवन गुप्ता व आलोक पांडेय के साथ हुई धक्का-मुक्की के मामले में संगठन स्तर पर अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आने को लेकर पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस बार असंतोष केवल मौजूदा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं है। पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारी भी सार्वजनिक रूप से अपनी निराशा जाहिर कर रहे हैं। एक पूर्व जिलाध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि जिस संगठन को पसीने से सींचकर यहां तक लाए, लग रहा है कि अब उसे बर्बाद ही कर देंगे। उनकी इस टिप्पणी के बाद पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के बीच संगठन की मौजूदा स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पूर्व जिलाध्यक्षों की नाराजगी से बढ़ी हलचल
एक अन्य पूर्व जिलाध्यक्ष ने विवाद के मौजूदा स्वरूप पर चिंता जताते हुए कहा कि मामला जिस तरह व्यक्तिगत रंजिश की ओर बढ़ रहा है, वह ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह जिम्मेदार लोग चुप्पी साधे बैठे हैं, वह भी ठीक नहीं है। दोनों पूर्व जिलाध्यक्षों की टिप्पणियों के बाद पार्टी के कई पुराने पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी निजी बातचीत में अपनी निराशा जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय में कानपुर में भाजपा से जुड़े कई विवाद सार्वजनिक हो चुके हैं।
कानपुर में लगातार सामने आए संगठन से जुड़े विवाद
कार्यकर्ताओं के मुताबिक, इनमें क्षेत्रीय कार्यालय में पदाधिकारियों के बीच मारपीट, नगर निगम में पार्षदों के बीच बजट को लेकर नाराजगी और अब नगर निगम परिसर में भाजपा पदाधिकारियों व पार्षदों के साथ हुई धक्का-मुक्की का मामला शामिल है। इन मामलों में विवाद के कारण अलग-अलग रहे हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं को लेकर संगठन की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर चर्चा तेज हुई है।
कार्रवाई के साथ संगठन के संदेश पर भी सवाल
पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी संगठन में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन विवाद जब सार्वजनिक हो जाए और व्यक्तिगत रंजिश का रूप लेने लगे तो नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। मौजूदा मामले में कार्यकर्ताओं की नाराजगी केवल इस बात को लेकर नहीं है कि किसके खिलाफ कार्रवाई होगी। सवाल यह भी है कि संगठन सार्वजनिक विवादों को किस तरह संभालता है और ऐसे मामलों में कार्यकर्ताओं तक क्या संदेश जाता है। कार्यकर्ताओं के एक वर्ग का कहना है कि यदि किसी पदाधिकारी या पार्षद के साथ गलत हुआ है तो संगठन को उसके पक्ष को सुनना चाहिए। वहीं, यदि पार्टी कार्यकर्ता की भी गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद निष्पक्ष फैसला होने से संगठन के भीतर भरोसा कायम रखने में मदद मिल सकती है।
2027 चुनाव से पहले संगठन के सामने चुनौती
मामला ऐसे समय सामने आया है जब भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की तैयारियों में जुटी है। कानपुर में विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाई जा रही हैं और कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों में सक्रिय किया जा रहा है। ऐसे समय में पुराने कार्यकर्ताओं और पूर्व पदाधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर किए जाने से संगठन के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा बढ़ी है। कार्यकर्ताओं के बीच यह भी चर्चा है कि विधानसभा चुनाव में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर गुटबाजी, व्यक्तिगत विवाद या नेतृत्व को लेकर असंतोष की स्थिति होने पर संगठनात्मक समन्वय प्रभावित हो सकता है।
पुराने विवादों की समीक्षा की भी उठी मांग
पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा है कि मौजूदा विवाद को किसी व्यक्ति या गुट के पक्ष-विपक्ष के बजाय संगठनात्मक अनुशासन के स्तर पर देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि मामले की जांच, संबंधित पक्षों को सुनना और उसके बाद निर्णय लेने से विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। साथ ही पिछले एक-दो महीनों में सामने आए विवादों की समीक्षा किए जाने की जरूरत भी बताई जा रही है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग स्तरों पर विवाद सार्वजनिक होने की स्थिति क्यों बन रही है।
पूर्व पदाधिकारियों से संवाद पर भी जोर
पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि पूर्व पदाधिकारियों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि लंबे समय तक संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके लोगों की नाराजगी को भी नेतृत्व के स्तर पर सुना जाना चाहिए। मौजूदा नगर निगम विवाद के बीच संगठन की ओर से किसी स्पष्ट निर्णय या कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। इसके साथ ही पिछले कुछ समय में सामने आए दूसरे विवादों को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा जारी है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के सामने मौजूदा विवाद को संभालने के साथ कार्यकर्ताओं के बीच संवाद और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करने की चुनौती है।


