- ड्रोन लक्ष्य खोज रहे, AI डेटा पढ़ रहा; DELTA और Mission Control से कमांड तक पहुंच रही सूचना, इंटरसेप्टर ड्रोन और स्वचालित प्रणालियों ने घटाया लक्ष्य से कार्रवाई तक का समय
भारत 19 डेस्क
रूस-यूक्रेन युद्ध में अब किसी लक्ष्य पर हमला केवल हथियार की मारक क्षमता से तय नहीं हो रहा। लक्ष्य को देखने वाले ड्रोन, उससे मिलने वाला वीडियो और सेंसर डेटा, उसे समझने वाला AI और उस जानकारी को कमांड तक पहुंचाने वाला डिजिटल सिस्टम युद्ध की तस्वीर ही बदल रहा है। यूक्रेन द्वारा विकसित की गई DELTA जैसी डिजिटल युद्धक्षेत्र प्रणाली में DELTA ड्रोन, सैटेलाइट, रडार और दूसरे सेंसरों से मिलने वाली सूचनाओं को एक साझा डिजिटल नक्शे में जोड़ती है। इससे कमांडरों और सैन्य इकाइयों को युद्धक्षेत्र की स्थिति की एक साझा तस्वीर मिलती है और लक्ष्य से जुड़ी सूचना तेजी से संबंधित इकाइयों तक पहुंचाई जा सकती है। DELTA के भीतर Mission Control ड्रोन अभियानों के डेटा को व्यवस्थित करता है। वहीं AI आधारित सिस्टम ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरों और वीडियो में सैन्य लक्ष्यों की पहचान में मदद करते हैं। इस तरह लक्ष्य की पहचान से लेकर सूचना के विश्लेषण और कार्रवाई के लिए कमांड तक पहुंचने वाली प्रक्रिया अधिक डिजिटल हो रही है।
पांच लाख तस्वीरों से AI को सिखाया जा रहा युद्ध
तकनीकी बदलाव का एक अहम हिस्सा Avengers AI Labs है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इसके पास युद्धक्षेत्र से जुटाए गए करीब 50 लाख annotated frames का डेटासेट है। इस डेटा में टैंक, तोप, एयर डिफेंस सिस्टम, पैदल सैनिक और हवाई लक्ष्यों सहित अलग-अलग सैन्य वस्तुओं की तस्वीरें शामिल हैं। डेटा का बड़ा हिस्सा DELTA सिस्टम से आता है। Reuters के अनुसार ब्रिटेन और यूक्रेन के बीच AI रक्षा सहयोग में भी इस डेटा का इस्तेमाल हो रहा है। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक इस डेटा पर प्रशिक्षित AI मॉडल एक ऐसे सिस्टम में इस्तेमाल हो रहा है जो हर महीने एक लाख से अधिक ड्रोन वीडियो फीड का विश्लेषण करता है। यूक्रेन का दावा है कि सिस्टम वास्तविक समय में करीब 70 प्रतिशत दुश्मन सैन्य उपकरणों की पहचान कर सकता है। यह आंकड़ा यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय का है।
ड्रोन देखता है, AI लक्ष्य पहचानने में मदद करता है
इस व्यवस्था में ड्रोन सिर्फ हमला करने वाला हथियार नहीं रह जाता। वह युद्धक्षेत्र का सेंसर भी बन जाता है। ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरों और वीडियो को AI आधारित सिस्टम तेजी से पढ़ सकता है। इसमें वाहन, तोप, ड्रोन या दूसरे सैन्य उपकरणों की पहचान करने की कोशिश की जाती है। इसके बाद संबंधित सूचना कमांड सिस्टम तक पहुंचती है। यूक्रेन के Mission Control में ड्रोन मिशन, उड़ान मार्ग, लॉन्च प्वाइंट और मिशन के परिणाम जैसे डेटा दर्ज किए जाते हैं। इससे अलग-अलग इकाइयों की गतिविधियों को एक ही डिजिटल सिस्टम में देखा जा सकता है।
Mission Control ने जोड़ा ड्रोन और कमांड
जनवरी 2026 में यूक्रेन ने DELTA के भीतर Mission Control शुरू किया। मार्च तक यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह प्रणाली सभी कोर और सैन्य समूहों में इस्तेमाल की जा रही थी। इस सिस्टम में ड्रोन संचालन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में तैयार होता है। मंत्रालय के अनुसार इसका इस्तेमाल परिचालन स्थिति समझने, योजनाएं बनाने और प्रदर्शन का आकलन करने के लिए किया जा रहा है। इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि अलग-अलग ड्रोन इकाइयों से मिलने वाला डेटा अलग-अलग रिपोर्टों में बिखरा नहीं रहता। उसे एक साझा डिजिटल तस्वीर में जोड़ा जा रहा है।
जेट ड्रोन ने इस दौड़ को और तेज किया
इसी बीच रूस ने जेट-प्रोपेल्ड ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाया है। Reuters के मुताबिक कुछ नए रूसी ड्रोन करीब 500 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति हासिल कर सकते हैं। 28 सितंबर के हमले में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने 120 रूसी ड्रोन इस्तेमाल होने की जानकारी दी थी। उनके अनुसार इनमें 90 जेट-प्रोपेल्ड ड्रोन थे और 57 प्रतिशत को रोका गया। ये आंकड़े यूक्रेनी पक्ष के हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं। तेज ड्रोन के आने से लक्ष्य की पहचान और प्रतिक्रिया के बीच समय और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। यूक्रेन इसी वजह से तेज इंटरसेप्टर और AI आधारित पहचान प्रणालियों पर काम कर रहा है।
इंटरसेप्टर ड्रोन बना किल चेन की अगली कड़ी
यूक्रेन ने हमलावर ड्रोन को रोकने के लिए इंटरसेप्टर ड्रोन विकसित किए हैं। राष्ट्रपति कार्यालय और रक्षा मंत्रालय के अनुसार नए हाई-स्पीड इंटरसेप्टर के विकास और उत्पादन पर काम जारी है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार 2026 में अब तक 650 नए मानव रहित हवाई सिस्टम को सैन्य इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। इनमें 42 इंटरसेप्टर ड्रोन और 231 फाइबर-ऑप्टिक UAV शामिल हैं। इस व्यवस्था में AI आधारित पहचान से लेकर इंटरसेप्टर तक कई तकनीकें एक ही प्रक्रिया में जुड़ सकती हैं।
फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन ने जैमिंग बदला
रूस-यूक्रेन युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर भी इस तकनीकी दौड़ का हिस्सा है। रेडियो नियंत्रित ड्रोन को जैम करने की कोशिशों के जवाब में फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है। इन ड्रोन में नियंत्रण संकेत फाइबर-ऑप्टिक केबल से जाते हैं। इसलिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आधारित जैमिंग का असर कम होता है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने 2026 में 231 फाइबर-ऑप्टिक UAV को सैन्य इस्तेमाल की मंजूरी मिलने की जानकारी दी है।
अब डेटा खुद युद्ध की संपत्ति बन गया
यूक्रेन ने युद्धक्षेत्र से मिलने वाले डेटा को AI प्रशिक्षण के लिए भी इस्तेमाल करना शुरू किया है। मार्च में Reuters ने रिपोर्ट किया था कि यूक्रेन सहयोगी देशों को अपने युद्धक्षेत्र डेटा तक सुरक्षित पहुंच देने की दिशा में काम कर रहा है। इस डेटा में लाखों annotated images और हजारों combat flights से जुड़ी जानकारी शामिल है। इसका इस्तेमाल AI आधारित ड्रोन प्रणालियों को प्रशिक्षित करने में किया जा रहा है। अगस्त में ब्रिटेन और यूक्रेन ने AI रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाया। ब्रिटिश कंपनियों को यूक्रेन के वास्तविक युद्धक्षेत्र डेटा का इस्तेमाल AI आधारित ड्रोन तकनीक के विकास में करने की अनुमति दी गई।
युद्ध की गति अब डेटा पर भी निर्भर
रूस और यूक्रेन दोनों ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और स्वचालित प्रणालियों पर लगातार काम कर रहे हैं। रूस के तेज जेट ड्रोन के जवाब में यूक्रेन इंटरसेप्टर विकसित कर रहा है, जबकि AI आधारित सिस्टम लक्ष्य पहचान और युद्धक्षेत्र की तस्वीर तैयार करने में इस्तेमाल हो रहे हैं। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार DELTA में दर्ज ड्रोन अभियानों और हमलों का डेटा अब सैन्य विश्लेषण और AI प्रशिक्षण के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्रालय ने अगस्त में बताया था कि साल की शुरुआत से 2.6 लाख से अधिक रूसी UAV को निष्क्रिय किए जाने के दावे वाले आंकड़े DELTA में दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा भी यूक्रेनी पक्ष का है।
इस तरह रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन से मिले डेटा से AI विश्लेषण, फिर डिजिटल कमांड और उसके बाद इंटरसेप्टर या दूसरे हथियार तक पहुंचने वाली पूरी प्रक्रिया तेजी से एकीकृत की जा रही है। इसी बदलाव ने युद्ध की पारंपरिक ‘किल चेन’ को तकनीकी और डेटा आधारित बना दिया है।


