- मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला भी पलटा; पुलिस हिरासत में दिए कबूलनामे को आधार बनाए जाने पर सवाल, यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना
भारत 19
नई दिल्ली। संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत निवारक हिरासत रद्द कर दी। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी पलट दिया, जिसमें अफरोज की हिरासत को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को NSA के तहत निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने मामले में निवारक हिरासत की शक्ति के इस्तेमाल को कानून के अनुरूप नहीं माना।
क्या है मुल्ला अफरोज से जुड़ा मामला
मुल्ला अफरोज को नवंबर 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामलों में आरोपी बनाया गया था। 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। बाद में अफरोज के खिलाफ कई मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की। मामले में अफरोज की गिरफ्तारी 17 जनवरी 2025 को हुई थी। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में रखा गया और उनके खिलाफ दर्ज मामलों में कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी उनकी गिरफ्तारी और NSA कार्रवाई का विस्तृत विवरण दर्ज है।
जमानत के बाद लगाया गया था NSA
इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार अफरोज को एक मामले में जमानत मिलने के बाद 13 अक्टूबर 2025 को संभल के डीएम ने NSA की धारा 3(2) के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी किया था। राज्य सरकार ने 28 नवंबर 2025 को इस आदेश की पुष्टि की थी। सरकार की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया था कि अफरोज की रिहाई से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। प्रशासन ने पुलिस और अन्य अधिकारियों की रिपोर्टों तथा उपलब्ध सामग्री के आधार पर हिरासत का फैसला लेने की बात कही थी।
हाईकोर्ट ने 22 दस्तावेजों का दिया था हवाला
अफरोज ने NSA हिरासत को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 8 जून 2026 को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक हिरासत के समर्थन में 22 दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे। अदालत ने कहा था कि डीएम ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर अपनी subjective satisfaction दर्ज की थी और हाईकोर्ट हिरासत के लिए सामग्री की पर्याप्तता की अपीलीय समीक्षा नहीं कर सकता। इसके बाद अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मामला Mulla Afroz बनाम Union of India के रूप में SLP (Criminal) No. 12534/2026 के तहत सामने आया। 8 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था।
सुप्रीम कोर्ट में कबूलनामे पर उठा सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य सवालों में यह भी शामिल था कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को NSA के तहत निवारक हिरासत का आधार बनाया जा सकता है या नहीं। 29 सितंबर के फैसले में शीर्ष अदालत ने अफरोज की हिरासत रद्द कर दी और हाईकोर्ट के फैसले को भी निरस्त कर दिया। अदालत ने निवारक हिरासत के लिए पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे पर निर्भरता को स्वीकार नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब क्या है
सुप्रीम कोर्ट का फैसला NSA के तहत निवारक हिरासत से संबंधित है। इसका मतलब यह नहीं है कि अफरोज के खिलाफ दर्ज मूल आपराधिक मामले स्वतः खत्म हो गए। अफरोज के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों की कानूनी स्थिति अलग है और उनमें अदालतों के समक्ष कार्यवाही जारी रह सकती है। अगस्त 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक आपराधिक मामले की कार्यवाही रद्द कराने के लिए दायर उनकी याचिका भी वापस ले ली गई थी।
संभल हिंसा से अब तक क्या हुआ
संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों को आरोपी बनाया और अलग-अलग मामलों में जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। अफरोज की गिरफ्तारी, जमानत, उसके बाद NSA के तहत निवारक हिरासत और हाईकोर्ट में चुनौती के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत के 29 सितंबर 2026 के फैसले से अब NSA के तहत उनकी हिरासत समाप्त हो गई है।
मामले की टाइमलाइन
24 नवंबर 2024 : संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा में चार लोगों की मौत।
17 जनवरी 2025 : पुलिस ने मुल्ला अफरोज को गिरफ्तार किया।
13 अक्टूबर 2025 : संभल जिलाधिकारी ने NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी किया।
28 नवंबर 2025 : राज्य सरकार ने हिरासत आदेश की पुष्टि की।
8 जून 2026 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।
8 सितंबर 2026 : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हुई और फैसला सुरक्षित रखा गया।
29 सितंबर 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने NSA हिरासत रद्द की, हाईकोर्ट का फैसला पलटा।


