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कानपुर की विरासत-संस्कृति को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी

  • विश्व पर्यटन दिवस पर एलेन फॉरेस्ट जू में पर्यटन मंथन; स्कूलों में टूरिज्म क्लब, कानपुर दर्शन बस, डिजिटल ब्रोशर और तीन साल का पर्यटन रोडमैप बनाने पर जोर

भारत 19
कानपुर।
कानपुर की पहचान को उद्योग और व्यापार से आगे बढ़ाकर उसकी विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने की पहल शुरू हुई है। विश्व पर्यटन दिवस पर एलेन फॉरेस्ट जू में हुए पर्यटन मंथन में शहर के पर्यटन विकास को लेकर कई प्रस्ताव सामने आए। स्कूलों में टूरिज्म क्लब और एंबेसडर बनाने, साप्ताहिक कानपुर दर्शन बस चलाने, क्यूआर कोड आधारित डिजिटल ब्रोशर तैयार करने और तीन साल का पर्यटन रोडमैप बनाने पर जोर दिया गया।

सोसाइटी फॉर टूरिज्म डेवलपमेंट और मुस्कुराए कानपुर की ओर से आयोजित मंथन में पर्यटन विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, वन अधिकारियों, इतिहासकारों, चिकित्सकों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शहर की विरासत को पर्यटन से जोड़ने के उपायों पर विचार रखे। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉल्फिन डेवलपर्स के प्रबंध निदेशक आनंद गुप्ता, पर्यटन विशेषज्ञ डॉ. सिधांशु राय, फॉरेस्ट ऑफिसर फिरोज खान, अजय सिंह और रोचक रोहतगी ने किया।

स्कूलों में बनेंगे टूरिज्म क्लब और एंबेसडर

शिक्षाविद एवं पर्यटन विशेषज्ञ डॉ. सिधांशु राय ने स्कूलों में टूरिज्म क्लब बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हर स्कूल में टूरिज्म एंबेसडर और संस्थाओं में पर्यटन मित्र तैयार किए जाएं, जो कानपुर की विरासत और उससे जुड़ी कहानियों को दुनिया तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि कानपुर पर्यटन शहर के विकास का मजबूत मॉडल बन सकता है। विद्यार्थियों और युवाओं को शहर के इतिहास, संस्कृति और विरासत से जोड़कर पर्यटन के प्रति रुचि विकसित की जा सकती है।

एलेन फॉरेस्ट जू बने इको-टूरिज्म का केंद्र

फॉरेस्ट ऑफिसर फिरोज खान ने एलेन फॉरेस्ट जू को इको-टूरिज्म के केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कही। वहीं फॉरेस्ट ऑफिसर अजय सिंह ने बच्चों को प्रकृति के महत्व से जोड़ने पर जोर दिया। इससे जू को वन्यजीवों के साथ पर्यावरण और प्रकृति की जानकारी देने वाले पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

क्यूआर कोड से मिलेगी कानपुर पर्यटन की पूरी जानकारी

सोसाइटी फॉर टूरिज्म डेवलपमेंट के उपाध्यक्ष आनंद गुप्ता ने कानपुर के लिए क्यूआर कोड आधारित डिजिटल ब्रोशर तैयार करने का सुझाव दिया। इसमें शहर के पर्यटन स्थल, घाट, मंदिर, फूड स्ट्रीट और होटल की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने की बात कही गई। इससे पर्यटकों को शहर के प्रमुख स्थानों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी डिजिटल माध्यम से आसानी से मिल सकेगी।

साप्ताहिक कानपुर दर्शन बस शुरू करने का प्रस्ताव

‘मुस्कुराए कानपुर’ के राजेश ग्रोवर और अखिल त्यागी ने साप्ताहिक कानपुर दर्शन बस यात्रा शुरू करने का सुझाव दिया। इसके जरिए शहर के प्रमुख पर्यटन और विरासत स्थलों को एक तय यात्रा मार्ग से जोड़ने की योजना बनाई जा सकती है। इस पहल से स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी शहर के प्रमुख स्थलों की जानकारी और एक साथ यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने की संभावना बनेगी।

जू में कानपुर की कलाकृतियों का संग्रहालय बने

इतिहासकार गोपाल खन्ना और विनोद टंडन ने एलेन फॉरेस्ट जू में कानपुर की कलाकृतियों पर आधारित संग्रहालय स्थापित करने का सुझाव दिया। इससे शहर के इतिहास और कला से जुड़ी सामग्री को एक स्थान पर प्रदर्शित किया जा सकेगा। वहीं शिक्षाविद पीसी अग्निहोत्री और अमित अग्रवाल ने अपने स्कूलों में टूरिज्म क्लब स्थापित करने की घोषणा की।

इतिहासकारों से यूट्यूबर तक होगा पर्यटन संवाद

संस्थापक सदस्य रोचक रोहतगी और स्वयं नंदा ने टूरिज्म टॉक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। इसमें इतिहासकार, कलाकार, शिक्षाविद, फोटोग्राफर और यूट्यूबर नियमित रूप से पर्यटन से जुड़े विषयों पर संवाद कर सकेंगे। इस तरह कानपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अलग-अलग माध्यमों से नई पीढ़ी और पर्यटकों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

तीन साल का पर्यटन रोडमैप बनाने पर जोर

सीमा निगम और अनूप द्विवेदी ने कानपुर के पर्यटन विकास के लिए तीन साल का रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया। इसमें पर्यटन स्थलों के विकास, विरासत संरक्षण, प्रचार-प्रसार और पर्यटक सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से जोड़ने की योजना बनाने पर जोर दिया गया। समाजसेवी दिनेश वाष्र्णेय और बिरजू ने कानपुर महोत्सव और बिठूर महोत्सव को नए स्वरूप में आयोजित करने का सुझाव दिया।

कानपुर की संस्कृति बने पर्यटन की पहचान

वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. पंकजा पांडे और सचिव डॉ. कामायनी शर्मा ने कानपुर की संस्कृति को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने की जरूरत बताई। डॉ. हेमंत मोहन और डॉ. पंकजा पांडे ने टूरिज्म वॉक का शुभारंभ किया। वहीं इस्कॉन मंदिर के प्रतिनिधि ने कानपुर को ‘सिटी ऑफ हैप्पीनेस’ के रूप में स्थापित करने का सुझाव दिया।

कार्यक्रम का संयोजन स्वयं नंदा और संचालन बृजेश शर्मा बिरजू ने किया। इस दौरान डॉ. हेमंत मोहन, दिनेश वाष्णेय, आरिफ मार्टिन, शाहिद कामरान, गोपाल तुलस्यान, डॉ. आरती मोहन, निखिल सचान, विपुल जैन, अवलि शुक्ला, नीलोफर जमीर, पंकज शर्मा, वैष्णवी, अंगिरा सहित राइडर्स क्लब और घुमक्कड़ क्लब के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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