- 27 सितंबर से शुरू होगा सालभर का अभियान; भारत मंडपम में केंद्रीय उद्घाटन, 47 प्रमुख स्थानों पर कार्यक्रम, अयोध्या में दिव्यांगों के लिए सेवा शिविर और देश-विदेश में जनजागरण गतिविधियां
भारत 19
नई दिल्ली: विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत 27 सितंबर 2026 से होगी। विहिप के अनुसार इस मौके पर देश-विदेश में सालभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 27 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच 47 प्रमुख स्थानों पर प्रांतीय स्तर के उद्घाटन कार्यक्रम होंगे। इसके बाद विचार गोष्ठियों, सभाओं, प्रदर्शनियों, सेवा गतिविधियों और जनजागरण कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा।
भारत मंडपम में होगा केंद्रीय उद्घाटन
जन्मशताब्दी वर्ष का मुख्य उद्घाटन समारोह 27 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। विहिप के अनुसार कार्यक्रम में अशोक सिंघल के जीवन, आध्यात्मिक संस्कार, संगठनात्मक भूमिका, श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनके योगदान और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके कार्यों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस अवसर पर ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के दिव्य पदचिह्न’ विषय पर कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी प्रस्तावित है। इसके साथ ‘श्रीराम स्तंभ’ के प्रतिरूप का अनावरण और श्रीराम स्तंभों का डिजिटल लोकार्पण किया जाएगा। इन स्तंभों के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन, वनगमन मार्ग और उससे जुड़े सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक स्थलों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की योजना है।
47 प्रमुख स्थानों पर होंगे कार्यक्रम
विहिप के अनुसार 27 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच देश के 47 प्रमुख स्थानों पर उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद जन्मशताब्दी वर्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में भी कार्यक्रम होंगे। इनमें विचार गोष्ठियां, सभाएं, प्रदर्शनियां, सेवा कार्य और जनजागरण से जुड़े आयोजन शामिल रहेंगे। संगठन ने जन्मशताब्दी वर्ष को अशोक सिंघल के जीवन और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के अवसर के रूप में प्रस्तुत किया है।
सेवा और सामाजिक समरसता पर जोर
विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार के अनुसार जन्मशताब्दी वर्ष में सेवा, सामाजिक समरसता और हिंदू समाज के संगठन से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। संगठन ने अशोक सिंघल से जुड़े रहे मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने, अवैध धर्मांतरण पर रोक, घरवापसी और वैदिक ज्ञान-विज्ञान के प्रचार जैसे विषयों को भी अपने अभियान में शामिल किया है। विहिप ने अयोध्या के बाद काशी और मथुरा से जुड़े अपने संकल्प को आगे बढ़ाने की बात भी कही है। यह संगठन की घोषित प्राथमिकता है और इसे व्यापक सरकारी नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अयोध्या में दिव्यांगों के लिए सेवा शिविर
जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत के साथ अयोध्या में सेवा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। अशोक सिंघल फाउंडेशन और विहिप के सहयोग से कारसेवकपुरम में दिव्यांगजनों के लिए शिविर 27 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगा। शिविर में जरूरतमंद दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और आवश्यक सहायता उपकरण उपलब्ध कराने की योजना है। फाउंडेशन की ओर से पहले भी अयोध्या में इस तरह के सहायता शिविर आयोजित किए जाते रहे हैं।
नई पीढ़ी तक पहुंचाने की तैयारी
जन्मशताब्दी वर्ष के लिए विहिप ने विशेष लोगो भी जारी किया है। संगठन के अनुसार इसका इस्तेमाल वर्षभर होने वाले कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों में किया जाएगा। आयोजनों में अशोक सिंघल के जीवन, संगठनात्मक योगदान और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े पहलुओं को प्रमुखता दी जाएगी। अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को हुआ था। वह लंबे समय तक विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी प्रमुख संगठनात्मक भूमिका रही। उनका निधन 17 नवंबर 2015 को हुआ था।
सालभर चलेगा कार्यक्रमों का सिलसिला
विहिप के अनुसार जन्मशताब्दी वर्ष केवल उद्घाटन कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा। 47 प्रमुख स्थानों पर शुरुआती कार्यक्रमों के बाद देश और विदेश के हजारों स्थानों पर सालभर गतिविधियां आयोजित करने की योजना है। सेवा, सामाजिक समरसता, विचार गोष्ठियां, प्रदर्शनियां और जनजागरण इसके प्रमुख हिस्से होंगे। इस तरह 27 सितंबर से शुरू होने वाला अभियान अशोक सिंघल के सार्वजनिक जीवन और संगठनात्मक योगदान को केंद्र में रखते हुए वर्षभर चलाया जाएगा।


