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CEC ज्ञानेश कुमार पर घमासान, राहुल ने उठाए बड़े सवाल

  • सुप्रीम कोर्ट में CEC नियुक्ति कानून पर सुनवाई के बीच ECI में मतभेद की रिपोर्ट से सियासी भूचाल; INDIA ब्लॉक हटाने का प्रस्ताव लाएगा, महुआ मोइत्रा की शिकायत और अभिषेक बनर्जी के आरोपों से बढ़ा विवाद

भाारत 19
नई दिल्ली।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच टकराव अब संसद से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। विवाद की शुरुआत द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट से और तेज हुई, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, मतदाता सूची, Form 6 और चुनावी डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

रिपोर्ट सामने आने के बाद राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी। INDIA ब्लॉक संसद के दोनों सदनों में उन्हें हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इसी बीच महुआ मोइत्रा ने पुलिस शिकायत दर्ज कराई, जबकि अभिषेक बनर्जी ने मतदाता सूची से लाखों नाम हटाने की कथित योजना का आरोप लगाया है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और रिपोर्ट की टाइमिंग चर्चा में

इस पूरे विवाद का सबसे चर्चित पहलू 23 सितंबर की टाइमिंग है। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। दो सदस्यीय पीठ के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की राय अलग होने के बाद मामला CJI के पास भेज दिया गया, ताकि संविधान पीठ के गठन पर फैसला हो सके। इसी 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से 10 महीने में 14 लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया। दोनों घटनाओं की टाइमिंग ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई रणनीतिक संदर्भ है। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही को प्रभावित करने के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया था। अखबार के मुताबिक उसने चुनाव आयोग को अपने सवाल 21 सितंबर को भेजे थे, यानी रिपोर्ट की तैयारी पहले से चल रही थी।

राहुल गांधी ने CEC के इस्तीफे की मांग की

कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर सामने आई कथित असहमति को गंभीर बताते हुए इसे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जोड़ा। राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि अगर वोट की शक्ति प्रभावित होती है तो इसका असर कानून और संवैधानिक संस्थाओं पर भी पड़ता है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने और कथित अनियमितताओं के मामले में ‘अप्रूवर’ बनने की अपील की। उन्होंने चुनावों में गड़बड़ी के अपने आरोप भी दोहराए। ये आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

INDIA ब्लॉक CEC को हटाने का प्रस्ताव लाएगा

विपक्ष ने अब इस मुद्दे को संसद में ले जाने की तैयारी कर ली है। रिपोर्टों के मुताबिक INDIA ब्लॉक लोकसभा और राज्यसभा दोनों में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और कानूनी विशेषज्ञों से इसकी समीक्षा कराई जा रही है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया से जुड़ी है। इसलिए संसद में प्रस्ताव पेश होना अपने आप CEC को पद से हटाने के बराबर नहीं है।

महुआ मोइत्रा की पुलिस शिकायत से नया मोर्चा

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने 24 सितंबर को नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने मतदाता सूची प्रबंधन और चुनाव आयोग की IT व्यवस्था को लेकर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। मोइत्रा ने केंद्रीकृत IT सिस्टम और Form 6 से जुड़े बदलावों पर भी सवाल उठाए। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुलिस या न्यायिक जांच से पुष्टि अभी नहीं हुई है।

अभिषेक बनर्जी का 30 लाख नाम हटाने का दावा

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने SIR को लेकर 30 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की कथित योजना का दावा किया है। उन्होंने कुछ कथित WhatsApp स्क्रीनशॉट सार्वजनिक करते हुए कहा कि इनमें मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाने के संकेत मिलते हैं। अभिषेक बनर्जी ने CEC से इन आरोपों पर जवाब देने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, स्क्रीनशॉट की स्वतंत्र पुष्टि और उनके संदर्भ की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को लेकर CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच और प्रभावित क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग भी उठाई है। विपक्षी दलों का मुख्य आरोप है कि SIR के जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूची के पुनरीक्षण की वैधानिक कवायद बता रहा है।

चुनाव आयोग ने कहा, फैसले सर्वसम्मति से हुए

विपक्ष के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने अपने फैसलों का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि चुनाव आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय या लिखित टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और SIR समेत चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसले निर्धारित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुए। BJP ने भी चुनाव आयोग का बचाव करते हुए विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अभियान बताया है। BJP नेताओं के मुताबिक आयोग में अलग-अलग राय होना अपने आप में असामान्य नहीं है।

विवाद के केंद्र में SIR और मतदाता सूची

पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में Special Intensive Revision यानी SIR है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम हटना हर मामले में मतदान का अधिकार स्थायी रूप से खत्म होने के बराबर नहीं है। SIR प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की व्यवस्था मौजूद है। यही वजह है कि विवाद का केंद्र केवल नाम हटाए जाने की संख्या नहीं, बल्कि किस आधार पर नाम हटे, आपत्तियों का निपटारा कैसे हुआ और मतदाता को अपना नाम बहाल कराने की क्या प्रक्रिया मिली, इन सवालों पर भी है।

CEC नियुक्ति कानून भी विवाद के केंद्र में

CEC पर मौजूदा राजनीतिक टकराव को समझने के लिए 2023 के नियुक्ति कानून को भी देखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के Anoop Baranwal फैसले के बाद संसद ने CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए नया कानून बनाया। इसमें चयन समिति से CJI को हटाकर प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया। मौजूदा व्यवस्था में समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। इसी व्यवस्था की संवैधानिक वैधता सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। 23 सितंबर की सुनवाई में पीठ के दोनों न्यायाधीशों की राय अलग होने के बाद मामला CJI के पास भेजा गया है। अब संविधान पीठ के गठन और आगे की सुनवाई पर नजर है।

संसद और अदालत में आगे बढ़ेगा मामला

CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद अब तीन समानांतर मोर्चों पर आगे बढ़ रहा है। संसद में INDIA ब्लॉक हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है, सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति कानून की संवैधानिकता का मामला लंबित है और SIR को लेकर विपक्ष तथा चुनाव आयोग आमने-सामने हैं। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और विपक्षी दलों की कार्रवाई ने इस विवाद को राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। दूसरी ओर चुनाव आयोग अपने फैसलों को वैधानिक और सर्वसम्मत बता रहा है। अब आगे की तस्वीर संसद की कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और SIR से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों से साफ होगी।

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