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PM मोदी के चिंतन शिविर में मंत्रालयों ने रखा रिपोर्ट कार्ड

  • मंत्रियों ने योजनाओं की प्रगति, क्रियान्वयन, प्रभावी संवाद और मंत्रालयों के बीच तालमेल पर किया मंथन; पियूष गोयल समेत कई मंत्रियों की थीम आधारित प्रस्तुतियां, विकसित भारत@2047 के अगले चरण पर फोकस

भारत 19
नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद का दो दिवसीय चिंतन शिविर बुधवार को नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में शुरू हुआ। बैठक का मकसद सरकार के अब तक के कामकाज का मध्यावधि आकलन करने के साथ विकसित भारत@2047 के लिए अगले दौर के सुधारों, नीतिगत प्राथमिकताओं और प्रशासनिक रणनीति पर मंथन करना है। पहले दिन मंत्रियों के समूहों ने अपने-अपने निर्धारित विषयों पर प्रस्तुतियां दीं और उसके बाद व्यापक चर्चा हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मंथन में सरकारी योजनाओं की प्रगति, नीति क्रियान्वयन, मंत्रालयों के बीच समन्वय, प्रभावी संवाद, सार्वजनिक सेवा वितरण और प्रशासनिक सुधार प्रमुख विषय रहे।

चिंतन शिविर के लिए मंत्रियों को समूहों में बांटकर अलग-अलग विषयों पर तैयारी कराई गई थी। चर्चाओं में स्व-विकास, प्रभावी संचार, मंत्रालयों के सफल कामकाज और योजनाओं के केंद्रित क्रियान्वयन जैसे विषय शामिल रहे। प्रत्येक समूह ने पहले से बैठकें कर अपनी प्रस्तुति तैयार की थी। रिपोर्टों के अनुसार, पीयूष गोयल एक समूह का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसकी प्रस्तुति का विषय “विभाग की सफलता” यानी सफल मंत्रालयी कामकाज रखा गया।

मंत्रालयों से मांगा गया काम का आत्म-मूल्यांकन

चिंतन शिविर का एक महत्वपूर्ण पहलू मंत्रालयों का self-assessment है। मंत्रियों को अपने विभाग के काम, निर्धारित लक्ष्यों और हासिल परिणामों की समीक्षा के साथ आगे की कार्ययोजना पर विचार करना है। सरकार की ओर से मंत्रालयों के कामकाज की रियल-टाइम निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड के इस्तेमाल और योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा पर भी जोर दिया गया है। मंथन का अहम हिस्सा इस सवाल पर है कि सरकारी योजनाओं का लाभ कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से जमीन तक पहुंच रहा है। योजनाओं के परिणाम, समयबद्ध क्रियान्वयन और सामने आ रही प्रशासनिक अड़चनों की पहचान पर जोर है। समीक्षा का फोकस सिर्फ ये बताने पर नहीं है कि कौन-सी योजना चल रही है, बल्कि उसके परिणाम और आगे सुधार की गुंजाइश पर भी है।

मंत्रालयों के बीच तालमेल बढ़ाने पर भी जोर

प्रधानमंत्री के हालिया प्रशासनिक मंथन में मंत्रालयों के बीच काम करने वाले horizontal और vertical silos को कम करने पर जोर रहा है। चिंतन शिविर में भी अंतर-मंत्रालयी समन्वय को महत्वपूर्ण विषय बनाया गया है। इसके तहत अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के काम में दोहराव कम करने, साझा परियोजनाओं में बेहतर तालमेल और तकनीक के अधिक प्रभावी इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है।

प्रभावी संवाद को भी बनाया गया प्रमुख विषय

सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने और उनके परिणामों को प्रभावी तरीके से संप्रेषित करने पर भी मंथन हुआ। पियूष गोयल और हरदीप सिंह पुरी समेत मंत्रियों की थीम आधारित प्रस्तुतियों में प्रभावी संचार और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े विषय शामिल होने की जानकारी सामने आई है। मंत्रियों को उनके डिजिटल और सोशल मीडिया संवाद से संबंधित आकलन साझा किए जाने की भी रिपोर्ट है। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज और योजनाओं की जानकारी जनता तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने से जोड़ा गया है।

Ease of Living और नियमों का बोझ घटाने पर चर्चा

चिंतन शिविर के व्यापक एजेंडे में Ease of Living और Ease of Doing Business को बेहतर बनाने के साथ अनावश्यक अनुपालन यानी compliance burden कम करना भी शामिल है। सरकार का जोर ऐसी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर है जिनसे नागरिकों और कारोबारियों को अनावश्यक प्रशासनिक औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है। मंथन का दीर्घकालिक केंद्र विकसित भारत@2047 है। सरकार इस लक्ष्य को केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने पर विचार कर रही है। इसके तहत युवाओं को विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के माध्यम से विकसित भारत अभियान से जोड़ने तथा इसे व्यापक सामाजिक भागीदारी का रूप देने की योजना पर भी चर्चा है।

वरिष्ठ नागरिकों की विशेषज्ञता को जोड़ने की पहल

प्रधानमंत्री ने बदलती जनसांख्यिकी को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव का इस्तेमाल मेंटॉरशिप कार्यक्रमों और सरकारी पहलों में करने की दिशा में भी काम करने को कहा है। इस पहल की जिम्मेदारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को दिए जाने की जानकारी सामने आई है। उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव और विशेषज्ञता को सामाजिक कार्यक्रमों से जोड़ना है।

आठ प्रस्तुतियों से आगे बढ़ा Vision@2047 का काम

चिंतन शिविर अचानक शुरू हुई कवायद नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सचिवों के समूहों, मंत्रालयों, विभागों, कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग की ओर से पहले ही कई स्तरों पर प्रस्तुतियां और विचार-विमर्श हो चुके हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक आठ प्रस्तुतियां और उन पर चर्चाएं हो चुकी हैं। चिंतन शिविर में इन्हीं तैयारियों को मंत्रिपरिषद के व्यापक स्तर के मंथन से जोड़ा जा रहा है।

पहले दिन पांच बड़े बिंदुओं पर रहा  फोकस

कामकाज का आकलन — मंत्रालयों के प्रदर्शन और परिणामों की समीक्षा।
क्रियान्वयन — योजनाओं को समय पर जमीन तक पहुंचाना।
समन्वय — मंत्रालयों के बीच साइलो और काम के दोहराव को कम करना।
संवाद — सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना।
अगले चरण के सुधार — विकसित भारत@2047 के लिए नई नीतिगत प्राथमिकताएं तय करना।

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