AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को कानपुर के बाबूपुरवा ईदगाह मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर बड़ा बयान दिया। रिपोर्टों के मुताबिक ओवैसी ने कानपुर की सभी 10 विधानसभा सीटों पर AIMIM प्रत्याशी उतारने की बात कही। उन्होंने भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की पेशकश भी की और कहा कि गठबंधन को लेकर 2 अक्टूबर तक स्थिति स्पष्ट की जाएगी। जनसभा में ओवैसी ने भाजपा के साथ-साथ सपा और कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उनके बयानों पर सपा नेताओं और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।
Bharat 19| kanpur| रविवार को कानपुर पहुंचे AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने करीब 55 मिनट जनसभा को संबोधित किया। उनकी सभा 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हुई है। इससे पहले सितंबर 2026 में ओवैसी ने कहा था कि पार्टी उत्तर प्रदेश में गठबंधन की संभावनाओं पर काम कर रही है।
कानपुर की सभा में ओवैसी ने कहा कि AIMIM राज्य में अपना संगठन मजबूत कर रही है। उन्होंने कानपुर की सभी 10 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही।
विपक्षी दलों को गठबंधन का खुला ऑफर
ओवैसी ने विपक्षी दलों से AIMIM के साथ गठबंधन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी दल भाजपा को सत्ता में लौटने से रोकना चाहते हैं तो उनके साथ हाथ मिलाने पर विचार करें।
ओवैसी ने यह भी कहा कि गठबंधन को लेकर 2 अक्टूबर तक इंतजार किया जाएगा और इसके बाद जिस दल या दलों के साथ समझौता होगा, उसका ऐलान किया जाएगा। उपलब्ध रिपोर्टों में भी उनके 2 अक्टूबर तक गठबंधन पर फैसला लेने के बयान की पुष्टि होती है।
अखिलेश यादव और सपा पर निशाना
जनसभा में ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए तत्कालीन राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए और विस्थापन का आंकड़ा करीब 50 हजार बताया। यह आंकड़ा ओवैसी के बयान के रूप में रिपोर्ट किया गया है।
ओवैसी ने मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया और कहा कि जिन दलों को मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन मिला, उनसे राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर सवाल पूछे जाने चाहिए।
नितिन गडकरी की मुलाकात का जिक्र
ओवैसी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई अपनी मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सड़क और पुल से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने गडकरी से मुलाकात की थी और गडकरी ने संबंधित काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।
यह बयान ओवैसी द्वारा मंच से साझा किए गए उनके व्यक्तिगत अनुभव के तौर पर सामने आया।
जयंत चौधरी को लेकर भी बोले ओवैसी
ओवैसी ने RLD प्रमुख जयंत चौधरी को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वह जयंत चौधरी और उनकी पत्नी को जानते हैं और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद किसी नेता के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद और सम्मान की बात रखी।
इमरान मसूद बोले- यूपी और हैदराबाद का माहौल अलग
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और हैदराबाद की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का मुकाबला केवल मुस्लिम वोटों के जरिए संभव नहीं है।
मसूद के मुताबिक भाजपा के खिलाफ व्यापक सामाजिक और राजनीतिक समर्थन की जरूरत है। उन्होंने ओवैसी की संभावित सीटों और उनके राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी अपनी बात रखी।
हसन रूमी ने ओवैसी के दावों पर सवाल उठाए
कानपुर कैंट विधायक मोहम्मद हसन रूमी ने ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी राजनीति और AIMIM की भूमिका पर सवाल उठाए। रूमी ने दावा किया कि AIMIM की मौजूदगी से मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और उन्होंने पार्टी पर भाजपा से मदद लेने का आरोप भी लगाया।
यह आरोप रूमी की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इसका स्वतंत्र प्रमाण इस रिपोर्ट में स्थापित नहीं किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में रूमी के ओवैसी पर सवाल और उनके जवाब दर्ज हैं।
रूमी ने यह भी कहा कि केवल किसी सभा में भीड़ जुटना चुनावी समर्थन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने अपने क्षेत्र में अस्पताल और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर भी ओवैसी के पुराने बयानों का जवाब दिया।
इरफान सोलंकी की प्रतिक्रिया
पूर्व विधायक इरफान सोलंकी ने भी ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक ओवैसी को उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और स्थानीय समीकरणों को समझने की जरूरत है।
इस तरह कानपुर की सभा के बाद AIMIM, सपा और कांग्रेस नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है।
कानपुर में पहले भी सभाएं कर चुके हैं ओवैसी
ओवैसी इससे पहले भी कानपुर में जनसभाएं कर चुके हैं। 2021 में उन्होंने जाजमऊ और जीआईसी मैदान में सभाओं को संबोधित किया था। दिसंबर 2021 की जीआईसी मैदान की सभा में उन्होंने मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए सपा पर निशाना साधा था।
2026 की सभा को AIMIM की 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार और संभावित गठबंधन को लेकर गतिविधियां बढ़ाई हैं।
कानपुर की जनसभा में असदुद्दीन ओवैसी ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर AIMIM की रणनीति के संकेत दिए। उन्होंने कानपुर की सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही और विपक्षी दलों के साथ गठबंधन का प्रस्ताव रखा। साथ ही सपा और कांग्रेस पर राजनीतिक सवाल उठाए। दूसरी ओर सपा नेताओं और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ओवैसी के बयानों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। अब 2 अक्टूबर को प्रस्तावित गठबंधन संबंधी घोषणा पर राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजर रहेगी।


