- 2022 से डी-फार्मा, बी-फार्मा और नर्सिंग में दाखिले के नाम पर ठगी का आरोप; पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया, फर्जी मार्कशीट-आईडी कार्ड समेत कई दस्तावेज बरामद, अपहरण की झूठी कहानी से खुला पूरा फर्जीवाड़ा
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के एटा में फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नाम पर छात्रों से कथित करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। मारहरा थाना पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2022 से ‘बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी’ के नाम पर विभिन्न मेडिकल और पैरा मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने तथा डिग्री-मार्कशीट उपलब्ध कराने के नाम पर रकम वसूली जा रही थी। अब तक दो करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी सामने आने की बात पुलिस ने कही है। सबसे चौंकाने वाला पहलू ये है कि जिस भगवान दास के नाम पर कथित संस्थान को रजिस्टर्ड दिखाया गया, वह चाय बेचने का काम करता है। पुलिस अब ये जांच कर रही है कि उसके नाम और पहचान का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
अपहरण की झूठी कहानी से खुला फर्जीवाड़ा
पूरे मामले का खुलासा किसी छात्र की शिकायत से नहीं, बल्कि कथित अपहरण और फिरौती की सूचना से हुआ। पुलिस के मुताबिक 16 सितंबर को रामसेवक ने सूचना दी कि उसके भाई सतेंद्र कुमार का अपहरण हो गया है और दो लाख रुपये की फिरौती मांगी जा रही है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सतेंद्र को आगरा से बरामद किया। पूछताछ में पुलिस को अपहरण की कहानी संदिग्ध लगी। पुलिस का दावा है कि छात्रों से ली गई रकम वापस करने के दबाव से बचने के लिए सतेंद्र ने खुद अपने अपहरण की साजिश रची थी। इसी जांच के दौरान कथित फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी का नेटवर्क सामने आया।
डी-फार्मा से नर्सिंग तक, कई कोर्स का खेल
पुलिस के अनुसार कथित संस्थान में डी-फार्मा, बी-फार्मा, बीएससी नर्सिंग, डीएमएलटी, बीएमएलटी, जीएनएम और एएनएम समेत कई पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिए जा रहे थे। छात्रों को डिग्री और मार्कशीट देने का भरोसा देकर फीस वसूली जाती थी। कुछ छात्रों को बाद में दस्तावेजों के फर्जी होने का पता चला और उन्होंने रकम वापस मांगनी शुरू की। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी मार्कशीट, छात्र आईडी कार्ड, प्रवेश फार्म, फीस रसीद, अटेंडेंस शीट, परीक्षा पुस्तिकाएं, जाली प्रश्नपत्र, मुहर, लेटरपैड, लैपटॉप और फर्जी चेक समेत कई सामग्री बरामद करने की बात कही है।
चाय बेचने वाले के नाम पर यूनिवर्सिटी
जांच में सामने आए इस तथ्य ने पूरे मामले को और चौंकाने वाला बना दिया है। पुलिस के मुताबिक भगवान दास निवासी धरपसी के नाम पर संस्थान को रजिस्टर्ड दिखाया गया था और उसका पेशा चाय बेचना है। भगवान दास की कथित भूमिका और उसके नाम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, यह जांच का विषय है। पुलिस ने भगवान दास समेत सतेंद्र कुमार, गौरव अग्रवाल, नरेंद्र उर्फ पप्पू और मोहम्मद शरीफ कुरैशी को गिरफ्तार किया है।
योगी के ‘ठेके पर नकल’ वाले बयान को मिला बल
एटा के इस मामले के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 5 सितंबर का गोरखपुर संबोधन भी प्रासंगिक है। शिक्षक सम्मान समारोह में योगी ने 2017 से पहले की शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि प्रदेश में “ठेके पर नकल” होती थी और दूसरे राज्यों के छात्रों को परीक्षा पास कराने तक का ठेका लिया जाता था। एटा के मौजूदा फर्जी यूनिवर्सिटी मामले पर योगी आदित्यनाथ की कोई प्रत्यक्ष टिप्पणी सामने नहीं आई है। इसलिए इस घटना को मुख्यमंत्री के उस बयान से सीधे जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। हां, फर्जी दाखिले और कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों का मामला शिक्षा व्यवस्था पर उनके पुराने राजनीतिक हमले का संदर्भ जरूर सामने लाता है।
अब कितने छात्रों तक पहुंचा था नेटवर्क?
पुलिस की कार्रवाई के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा कथित फर्जी संस्थान से जुड़े छात्रों और दस्तावेजों का सत्यापन है। पुलिस बरामद रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि कितने छात्रों से फीस ली गई, कितनों को प्रवेश दिया गया और कितनों को कथित फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। साथ ही नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


