- हरिद्वार में ‘सदाराम’ नाम से रह रहा था सुरेंद्र कोली; कुछ दिन पहले ही चाय की दुकान शुरू की थी, परिवार से फोन पर हुई बहस के बाद मौत, पुलिस आत्महत्या मानकर जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
भारत 19 डेस्क
निठारी कांड में लंबे समय तक जेल में रहने और बाद में सभी संबंधित मामलों में अदालतों से बरी हुए सुरेंद्र कोली की जिंदगी का आखिरी अध्याय हरिद्वार में खत्म हुआ। शुक्रवार को वह भूपतवाला क्षेत्र में अपनी चाय की दुकान के भीतर फंदे से लटका मिला। पुलिस ने मौके की जांच के बाद प्रथम दृष्टया आत्महत्या की आशंका जताई है। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद खड़खड़ी श्मशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से स्पष्ट होगी।
‘सदाराम’ नाम से छिपाकर रह रहा था पहचान
हरिद्वार में आसपास के लोग उसे ‘सदाराम’ के नाम से जानते थे। रिपोर्टों के मुताबिक वह अपनी पुरानी पहचान छिपाकर रह रहा था। इससे पहले उसने रोशनाबाद इलाके में सुरक्षा गार्ड की नौकरी की थी। बाद में भूपतवाला में चाय की दुकान शुरू की। उसकी मौत के बाद ही आसपास के लोगों को पता चला कि ‘सदाराम’ के नाम से रहने वाला व्यक्ति सुरेंद्र कोली है। पुलिस को उसके सामान से पहचान से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में उसके पास अलग नामों से पहचान संबंधी दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उसने पहचान क्यों छिपाई और हरिद्वार में रहने के दौरान किन लोगों के संपर्क में था।
चार दिन पहले ही शुरू की थी चाय की दुकान
कोली ने हरिद्वार में नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश के तहत चाय की दुकान खोली थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक छह सितंबर को दुकान शुरू की गई थी, जबकि कुछ रिपोर्टों में मौत से तीन-चार दिन पहले दुकान शुरू करने की बात कही गई है। दुकान शुरू करते समय पूजा कराने और प्रसाद बांटने की जानकारी भी सामने आई है। दुकान शुरू करने से पहले वह रोजगार की तलाश में इधर-उधर काम कर रहा था। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक हरिद्वार पहुंचने के बाद उसने सुरक्षा से जुड़ा काम भी किया और रहने के लिए जगह तलाशने में स्थानीय लोगों ने उसकी मदद की थी।
मौत से एक दिन पहले परिवार से हुई थी बहस
कोली की मौत से पहले की घटनाओं को लेकर पुलिस और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी अब जांच का हिस्सा है। रिपोर्टों के मुताबिक गुरुवार को परिवार के किसी सदस्य से फोन पर उसकी बहस हुई थी। बातचीत में बच्चे के जन्मदिन और पैसों से जुड़े मुद्दे का जिक्र सामने आया है। हालांकि, पुलिस ने अभी इस बातचीत को उसकी मौत का कारण नहीं माना है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कोली ने आर्थिक परेशानी का भी जिक्र किया था। एक व्यक्ति ने उसे बच्चे के जन्मदिन के लिए पैसे की जरूरत होने पर दो हजार रुपये दिए थे। इन घटनाओं और उसकी मौत के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
चाय की दुकान में मिला फंदे पर शव
शुक्रवार को कोली का शव उसकी चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला। पुलिस को सूचना मिलने के बाद फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। कोई सुसाइड नोट मिलने की बात सामने नहीं आई है। पुलिस ने फिलहाल मौत को आत्महत्या की आशंका के तौर पर लिया है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगा। परिवार की ओर से भी मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
निठारी मामले में पहले दोषी, फिर अदालत से बरी
सुरेंद्र कोली 2006 के निठारी कांड में मुख्य आरोपियों में शामिल था। उसे कई मामलों में दोषी ठहराया गया और मौत की सजा भी सुनाई गई। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कई मामलों में उसे बरी किया। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी से जुड़े अंतिम लंबित मामले में भी उसे दोषमुक्त कर दिया, जिसके बाद वह जेल से बाहर आया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कोली की करीब दो दशक लंबी जेल यात्रा समाप्त हुई थी। इसके बाद उसने हरिद्वार में नई पहचान के साथ रहने और रोजी-रोटी शुरू करने की कोशिश की।
हरिद्वार में बिताए आखिरी दिनों की होगी जांच
अब पुलिस की जांच कोली के हरिद्वार पहुंचने से लेकर मौत तक के पूरे घटनाक्रम पर केंद्रित है। वह किन लोगों के संपर्क में था, कहां-कहां काम किया, चाय की दुकान किस तरह मिली, पहचान छिपाने की वजह क्या थी और मौत से पहले किन लोगों से उसकी बातचीत हुई, इन सभी बिंदुओं की जानकारी जुटाई जा रही है। इस बीच, निठारी कांड में उसकी कानूनी कहानी और हरिद्वार में हुई मौत दो अलग अध्याय हैं। अदालतों से दोषमुक्त होने के बाद उसकी मौत की परिस्थितियों को उसी कानूनी स्थिति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। फिलहाल उसकी मौत को लेकर पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट निर्णायक कड़ी होगी।


