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सरकारी बेड़े में EV की रफ्तार, 12 राज्य दे रहे तरजीह

 कोलकाता पुलिस ने Dial-112 के लिए 183 इलेक्ट्रिक बाइक उतारीं, यूपी ने 2030 तक आधिकारिक इस्तेमाल वाले वाहनों को EV में बदलने का लक्ष्य रखा, कर्नाटक ने सरकारी विभागों में 50% EV का लक्ष्य तय किया
भारत 19

नई दिल्ली। इलेक्ट्रिक वाहन अब सिर्फ निजी कारों, टैक्सियों या सार्वजनिक परिवहन का विकल्प नहीं रह गए हैं। सरकारी कामकाज में भी इनका इस्तेमाल बढ़ रहा है। हाल में कोलकाता पुलिस ने 183 इलेक्ट्रिक बाइक अपने बेड़े में शामिल की हैं। इन्हें Dial-112 की आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और पेट्रोलिंग में लगाया जाएगा। 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश सरकारी उपयोग के लिए EV procurement policies की जानकारी केंद्र को दे चुके हैं। सूची में आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, महाराष्ट्र, मेघालय, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

183 ई-बाइक, अब इमरजेंसी कॉल पर दौड़ेंगी

कोलकाता पुलिस को मिली 183 Ultraviolette X-47 Skyforce इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों को पुलिस की नियमित ड्यूटी के लिए तैयार किया गया है। पुलिस आयुक्त के मुताबिक इन्हें Dial-112 नेटवर्क में इस्तेमाल किया जाएगा। बाइक में पुलिसिंग के लिए जरूरी सायरन, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और संचार उपकरणों की व्यवस्था की गई है। यह कोलकाता पुलिस के लिए EV की शुरुआत नहीं है। पुलिस पहले से इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल कर रही है और अब दोपहिया वाहनों को बड़े पैमाने पर पेट्रोलिंग तथा क्विक रिस्पॉन्स में शामिल किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में पहले से चल रही थी ई-बाइक पहल

कोलकाता में 183 बाइकें शामिल होने से पहले पश्चिम बंगाल में पुलिस के लिए 1,450 ई-बाइक उपलब्ध कराने की पहल की गई थी। नई तैनाती इसी व्यापक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पहल का एक और चरण है। यानी मामला सिर्फ नई मोटरसाइकिल खरीदने का नहीं है। पुलिस की ऐसी ड्यूटी, जिसमें वाहन लगातार शहर में चलते हैं और कम दूरी में बार-बार रुकते-चलते हैं, वहां इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को परिचालन में उतारने की कोशिश की जा रही है।

12 राज्यों ने सरकारी EV खरीद की नीति बताई

केंद्र सरकार की रिपोर्ट का सबसे अहम तथ्य यही है कि सरकारी परिवहन का विद्युतीकरण कई राज्यों की नीतियों में जगह बना चुका है। रिपोर्ट में शामिल 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को EV इस्तेमाल करने वाले राज्यों की सूची नहीं, बल्कि सरकारी उपयोग के लिए EV procurement policies की जानकारी देने वाले राज्यों के रूप में समझना चाहिए। इन राज्यों की नीतियों का स्वरूप एक जैसा नहीं है। कहीं सरकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से EV में बदलने की योजना है, तो कहीं कर्मचारियों, सार्वजनिक परिवहन और सरकारी खरीद को नीति का हिस्सा बनाया गया है।

हरियाणा ने सरकारी वाहनों के लिए तय किया लक्ष्य

केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा ने सरकारी वाहनों को दो चरणों में इलेक्ट्रिक करने की योजना बताई थी। लक्ष्य था कि 2026 तक 50 प्रतिशत सरकारी वाहन EV में बदल दिए जाएं और बाकी वाहनों को 2030 तक इलेक्ट्रिक किया जाए। इसमें सरकारी निगमों, बोर्डों और एंबुलेंस जैसे वाहन भी शामिल थे। यह दिखाता है कि कुछ राज्यों में EV को केवल पर्यावरणीय पहल के बजाय सरकारी वाहन बेड़े की दीर्घकालिक खरीद नीति से जोड़ा गया है।

यूपी में 2030 तक सरकारी वाहन EV करने का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश ने भी सरकारी वाहनों के विद्युतीकरण के लिए 2030 का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार की आधिकारिक जानकारी में सरकारी वाहनों को 2030 तक EV में बदलने का लक्ष्य दर्ज है। राज्य की EV नीति में चार्जिंग और स्वैपिंग ढांचे को बढ़ावा देने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में सरकार ने EV चार्जिंग स्टेशनों के लिए पूंजीगत सब्सिडी और सरकारी जमीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी नीति में रखी है। यानी सरकारी वाहनों का विद्युतीकरण केवल वाहन खरीद तक सीमित नहीं है; इसके साथ चार्जिंग नेटवर्क तैयार करने की जरूरत को भी नीति में जोड़ा गया है।

असली परीक्षा खरीद के बाद शुरू होगी

सरकारी बेड़े को EV में बदलना निजी वाहन खरीदने से अलग चुनौती है। पुलिस, स्वास्थ्य, प्रशासन और दूसरे विभागों के वाहन रोजाना लंबे समय तक चलते हैं। कई सेवाओं में वाहन को 24 घंटे उपलब्ध रखना पड़ता है। ऐसे में बैटरी रेंज, चार्जिंग में लगने वाला समय, चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता और बैकअप वाहन महत्वपूर्ण हो जाते हैं। खासकर पुलिस की Dial-112 जैसी व्यवस्था में वाहन के चार्ज खत्म होने के कारण उपलब्ध न रहने की स्थिति परिचालन समस्या बन सकती है।

EV अब सरकारी कामकाज का हिस्सा

कोलकाता की 183 ई-बाइक इस बदलाव की ताजा तस्वीर हैं, लेकिन इनके पीछे तस्वीर कहीं बड़ी है। एक तरफ पुलिस जैसी आपातकालीन सेवा में EV को सीधे ड्यूटी पर उतारा जा रहा है, दूसरी तरफ केंद्र की रिपोर्ट में दर्ज 12 राज्यों/UTs की सरकारी EV खरीद नीतियां बताती हैं कि सरकारी परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नीतिगत आधार तैयार किया जा चुका है। अब अगला सवाल यह नहीं है कि सरकारी विभाग EV खरीदेंगे या नहीं, बल्कि यह है कि कितने विभाग अपने पुराने बेड़े को कब तक बदलते हैं और उसके लिए चार्जिंग ढांचा कितना तैयार होता है।

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