- 3736 प्रस्तावित मतदान केंद्रों के लिए एफएलसी जारी, BEL के अधिकृत इंजीनियर कर रहे तकनीकी परीक्षण; राजनीतिक दलों की मौजूदगी में रैंडम 5% मशीनों पर 500 से 1200 वोट का मॉक पोल
भारत 19
कानपुर। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कानपुर में 5417 ईवीएम और वीवीपैट की प्रथम स्तरीय जांच (FLC) शुरू हो गई है। 3736 प्रस्तावित मतदान केंद्रों के लिए मशीनों की चरणबद्ध जांच की जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग के प्रोटोकॉल के अनुसार भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के अधिकृत इंजीनियर मशीनों की तकनीकी और कार्यक्षमता संबंधी जांच कर रहे हैं। प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रखी गई है और जिला स्तर पर इसकी निगरानी की जा रही है।
एफएलसी में किसी मशीन को उपयोग के लिए योग्य घोषित करने से पहले उसके तकनीकी परीक्षण, मॉक पोल और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार एफएलसी हर चुनाव से पहले की जाने वाली अनिवार्य प्रक्रिया है और इसमें मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को पूरी प्रक्रिया देखने का अवसर दिया जाता है।
राजनीतिक दलों की मौजूदगी में हो रही जांच
कानपुर में शुक्रवार को एफएलसी के दूसरे दिन भारत निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक दल, जिला निर्वाचन अधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और उप जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. विवेक चतुर्वेदी के साथ समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, अपना दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधि मौजूद रहे। निर्वाचन आयोग की व्यवस्था में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को एफएलसी की निगरानी और निर्धारित प्रक्रियाओं में भागीदारी दी जाती है।
मशीनों में वोट डालकर भी परखी जा रही कार्यक्षमता
एफएलसी में मशीनों की सामान्य तकनीकी जांच के साथ मॉक वोट डालकर उनकी कार्यक्षमता भी जांची जाती है। इसके अलावा EVM और VVPAT के इलेक्ट्रॉनिक तथा पेपर रिकॉर्ड के बीच मिलान किया जाता है। आयोग के प्रोटोकॉल के अनुसार एफएलसी में पास मशीन पर ग्रीन ‘FLC OK’ स्टिकर लगाया जाता है, जबकि असफल मशीन को अलग चिह्नित किया जाता है। कंट्रोल यूनिट पर पिंक पेपर सील लगाई जाती है, जिस पर अधिकृत अधिकारियों के साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी हस्ताक्षर कर सकते हैं।
रैंडम 5% मशीनों पर होगा बड़ा मॉक पोल
एफएलसी का अहम चरण रैंडम तरीके से चुनी गई 5 प्रतिशत मशीनों का उच्च स्तरीय मॉक पोल है। आयोग के अनुसार इनमें 1 प्रतिशत मशीनों पर 1200 वोट, 2 प्रतिशत पर 1000 वोट और 2 प्रतिशत मशीनों पर 500 वोट डाले जाते हैं। इसके बाद EVM के इलेक्ट्रॉनिक परिणाम का VVPAT पर्चियों से मिलान किया जाता है। इन 5 प्रतिशत मशीनों का चयन राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि रैंडम तरीके से कर सकते हैं और वे मॉक पोल में भी शामिल हो सकते हैं।
जांच के बाद मशीनें सील होकर रहेंगी सुरक्षित
एफएलसी में सही पाई गई मशीनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीलबंद कर EVM वेयरहाउस में सुरक्षित रखा जाएगा। निर्वाचन आयोग की व्यवस्था में एफएलसी की स्थिति EVM Management System में दर्ज की जाती है और एफएलसी में असफल मशीनों को अलग रखा जाता है। इसके बाद ईवीएम का पहला रैंडमाइजेशन किया जाएगा। इस चरण में मशीनों का विधानसभा क्षेत्रवार आवंटन राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया जाता है। आगे दूसरे रैंडमाइजेशन में मशीनों का मतदान केंद्रवार आवंटन किया जाता है।
एफएलसी के बाद प्रशिक्षण में भी होंगी मशीनें
एफएलसी में सही पाई गई मशीनों में से निर्धारित संख्या को मतदान कार्मिकों के प्रशिक्षण और मतदाता जागरूकता के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के अनुसार एफएलसी के बाद अधिकतम 10 प्रतिशत EVM-VVPAT को प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों के लिए निकाला जा सकता है। इनकी अलग सूची राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा की जाती है। कानपुर में ऐसी मशीनों को अलग से ‘Training and Awareness’ के रूप में चिह्नित किया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद इन मशीनों की आवाजाही निर्धारित नियमों के तहत नियंत्रित रहेगी।
चुनाव से पहले क्यों अहम है यह जांच
एफएलसी का मकसद चुनाव में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की तकनीकी विश्वसनीयता को पहले ही जांच लेना है। इसमें तकनीकी परीक्षण, मॉक पोल, VVPAT पर्चियों का मिलान, सीलिंग और बाद में रैंडमाइजेशन जैसे कई चरण शामिल होते हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार EVM की जांच, भंडारण, आवाजाही और चुनावी तैयारी के विभिन्न चरणों में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की भागीदारी का उद्देश्य प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना है।
प्रस्तावित मतदान केंद्र : 3736
EVM-VVPAT : 5417
FLC शुरू : 17 सितंबर
तकनीकी जांच : BEL के अधिकृत इंजीनियर
निगरानी : राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और ऑनलाइन मॉनिटरिंग
उच्च स्तरीय मॉक पोल : रैंडम 5% मशीनों पर
वोट पैटर्न : 1% पर 1200, 2% पर 1000 और 2% पर 500
इसके बाद : सीलिंग, वेयरहाउस में सुरक्षित भंडारण और पहला रैंडमाइजेशन


