- वाधवानी इनोवेशन सेंटर फॉर लाइफ साइंसेज एंड मेडिकल टेक्नोलॉजीज की स्थापना, अगले पांच साल में 5 मिलियन डॉलर की मिलेगी वित्तीय सहायता
भारत 19
कानपुर। आईआईटी कानपुर में प्रयोगशाला में विकसित स्वास्थ्य तकनीकों को बाजार और मरीजों तक पहुंचाने की दिशा में संगठित प्रयास शुरू हो गया है। संस्थान में वाधवानी इनोवेशन सेंटर फॉर लाइफ साइंसेज एंड मेडिकल टेक्नोलॉजीज की स्थापना की गई है। सेंटर को अगले पांच वर्षों में 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता मिलेगी। इसका उद्देश्य बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल टेक्नोलॉजी और एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में विकसित संभावनाशील शोध को जांच, नियामकीय मंजूरी और व्यावसायीकरण के रास्ते उत्पादों और स्वास्थ्य समाधानों में बदलना है।
शोध से बाजार तक बनेगा पूरा तंत्र
वाधवानी इनोवेशन सेंटर फॉर लाइफ साइंसेज एंड मेडिकल टेक्नोलॉजीज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में काम करेगा। इसकी खासियत केवल अनुसंधान को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि शोध के परिणामों को वास्तविक उपयोग तक पहुंचाने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराना होगी। शोधकर्ताओं को तकनीक के परीक्षण, बौद्धिक संपदा अधिकार, नियामकीय प्रक्रियाओं और उद्योग से साझेदारी में सहयोग दिया जाएगा। इससे प्रयोगशाला में तैयार विचारों को बाजार के लिए तैयार उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया मजबूत हो सकती है।
दवाओं, वैक्सीन और एआई स्वास्थ्य पर रहेगा जोर
सेंटर के दायरे में थेरेप्यूटिक्स, रीजनरेटिव मेडिसिन, ड्रग डिलीवरी, वैक्सीन, मेडिकल उपकरण और जांच तकनीकें शामिल होंगी। न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों, मानसिक स्वास्थ्य, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी अनुसंधान को सहयोग मिलेगा। इन क्षेत्रों में नवाचारों को चिकित्सकीय जरूरतों से जोड़कर विकसित करने पर जोर रहेगा। आईआईटी निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि संस्थान में रीजनरेटिव मेडिसिन, मॉलिक्यूलर मेडिसिन, न्यूरोसाइंस और एआई सहित बायोमेडिकल रिसर्च का मजबूत आधार है। WIN-CoE इस क्षमता को तकनीक हस्तांतरण, उद्यमिता और व्यावसायीकरण से जोड़ने में मदद करेगा।
वैज्ञानिकों को चिकित्सकीय जरूरतों से जोड़ने की तैयारी
बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अशोक कुमार और प्रो. संतोष मिश्रा ने शोध को प्रयोगशाला की सीमाओं से आगे ले जाने तथा चिकित्सकीय जरूरतों, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों को एक साथ लाने पर जोर दिया। इससे भविष्य में ऐसे बायोमेडिकल उत्पाद और चिकित्सा समाधान विकसित करने की संभावना बढ़ेगी, जिनका उपयोग वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं में किया जा सके।
क्लिनिकल वैलिडेशन से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचेगा शोध
पांच वर्षों की वित्तीय सहायता और आईआईटी कानपुर की अनुसंधान क्षमताओं के साथ यह सेंटर स्वास्थ्य तकनीकों के विकास, उद्योग साझेदारी और शोध के व्यावसायीकरण के लिए संस्थागत मंच तैयार करेगा। इससे भारत में स्वदेशी मेडिकल तकनीकों और अनुसंधान आधारित स्वास्थ्य उत्पादों के विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के दौरान ‘ट्रांसलेशनल रिसर्च एंड रेगुलेटरी पाथवेज: ब्रिजिंग इनोवेशन टू हेल्थकेयर इम्पैक्ट’ विषय पर कार्यशाला हुई। इसमें नियामक एजेंसियों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य क्षेत्र और उद्योग विशेषज्ञों ने प्रयोगशाला से क्लिनिकल वैलिडेशन, नियामकीय मंजूरी और स्वास्थ्य सेवाओं तक नवाचार पहुंचाने की प्रक्रिया पर चर्चा की।


