– हिंदी दिवस पर ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हिंदी’ पर मंथन, कुलसचिव राकेश कुमार मिश्र बोले- ‘हिंदी का कोई विकल्प नहीं’; AI को सहायक बनाकर मानवीय सोच और सृजन को मजबूत करने पर जोर
भारत 19
कानपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच हिंदी की ताकत और संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने मंथन किया। हिंदी दिवस पर आयोजित विचार गोष्ठी में तकनीक और भाषा के संतुलित इस्तेमाल पर जोर दिया गया। कुलसचिव राकेश कुमार मिश्र ने कहा, “हिंदी का कोई विकल्प नहीं है। AI को सहायक बनाइए, साध्य नहीं।” उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल मानव क्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि मानवीय सोच और सृजन का स्थान लेने के लिए।
AI के साथ हिंदी का डिजिटल दायरा बढ़ा
भाषा संकाय और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ हुआ। दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के बाद ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हिंदी’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें बदलते तकनीकी परिवेश में हिंदी की उपयोगिता और उसके विस्तार पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि AI सूचनाओं को तेजी से संसाधित कर सकता है, लेकिन समाज, संस्कृति और स्थानीय संदर्भों के अनुरूप प्रभावी संवाद में भाषा की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। तकनीक के विस्तार के साथ हिंदी के लिए नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

तकनीक सहायक, मानवीय विवेक सबसे जरूरी
कुलसचिव राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि AI शिक्षा, संचार और कार्यक्षेत्रों में तेजी से जगह बना रहा है। इसका इस्तेमाल सुविधा और दक्षता बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने तकनीक को उपयोगी माध्यम बताते हुए मानवीय विवेक और सृजनशीलता को बनाए रखने पर जोर दिया। गोष्ठी में हिंदी के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और ऑनलाइन सामग्री ने हिंदी के प्रयोग का दायरा तेजी से बढ़ाया है। हिंदी अब पारंपरिक लेखन और प्रकाशन तक सीमित नहीं रही, बल्कि तकनीक आधारित संचार का भी प्रमुख माध्यम बन रही है। AI और डिजिटल तकनीक हिंदी के लिए नई संभावनाएं खोल रही हैं। तकनीक के माध्यम से हिंदी सामग्री की पहुंच नए पाठकों और उपयोगकर्ताओं तक बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
मातृभाषा संस्कृति और सामूहिक चेतना की पहचान
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने हिंदी और मातृभाषा के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति, परंपरा और सामूहिक चेतना की पहचान है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के शुद्ध और प्रभावी प्रयोग पर ध्यान देने का आह्वान किया। विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि भाषा की मजबूत समझ विद्यार्थियों के व्यावसायिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रो. कौशल त्रिपाठी और सहायक आचार्य डॉ. जितेन्द्र डबराल ने हिंदी की उपयोगिता और बदलते मीडिया परिवेश में इसके विस्तार पर विचार रखे। कार्यक्रम में डॉ. योगेंद्र पांडेय, डॉ. ओम शंकर गुप्ता, डॉ. रश्मि गौतम, डॉ. विनय कुमार, सागर कनौजिया और प्रेम किशोर शुक्ला सहित शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।


