- जुलाई में 4.45 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 4.82 फीसदी हुई खुदरा महंगाई, खाद्य महंगाई भी 5.95 फीसदी पर पहुंची; ग्रामीण महंगाई 5.23 फीसदी रही, नई सीपीआई सीरीज में अगस्त का स्तर अब तक सबसे ऊंचा
भारत 19
नई दिल्ली। महंगाई का दबाव अगस्त में और बढ़ गया। खुदरा महंगाई जुलाई के 4.45 फीसदी से बढ़कर 4.82 फीसदी पहुंच गई। जून के 4.38 फीसदी के बाद यह लगातार तीसरी मासिक बढ़ोतरी है और जनवरी 2026 में शुरू हुई नई 2024-बेस वाली सीपीआई सीरीज में अगस्त का स्तर अब तक सबसे ऊंचा है। खाद्य महंगाई भी जुलाई के 5.52 फीसदी से बढ़कर 5.95 फीसदी हो गई, जिससे घरेलू खर्च पर दबाव बढ़ा है।
खाद्य महंगाई ने बढ़ाया कीमतों का दबाव
अगस्त में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी खुदरा महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह रही। खाद्य महंगाई 5.95 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह 5.52 फीसदी थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 6.13 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 5.64 फीसदी रही। खाद्य टोकरी में कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल दर्ज हुआ। अगस्त में अदरक की कीमतों में सालाना आधार पर 73.82 फीसदी, प्याज में 48.27 फीसदी और लहसुन में 43.60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। दूसरी ओर टमाटर और आलू की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

ग्रामीण परिवारों पर महंगाई का ज्यादा असर
अगस्त में ग्रामीण महंगाई 5.23 फीसदी रही, जबकि शहरी महंगाई 4.31 फीसदी दर्ज की गई। जुलाई में ग्रामीण महंगाई 4.84 फीसदी और शहरी महंगाई 3.96 फीसदी थी। इस तरह दोनों क्षेत्रों में महंगाई बढ़ी, लेकिन ग्रामीण इलाकों में कीमतों का दबाव ज्यादा रहा। खाद्य वस्तुओं में भी ग्रामीण महंगाई शहरी क्षेत्रों से ऊपर रही। ग्रामीण खाद्य महंगाई 6.13 फीसदी के स्तर पर पहुंचने से रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ते दबाव का संकेत मिला है।
महंगाई का दबाव खाद्य वस्तुओं से आगे बढ़ा
अगस्त में कीमतों में तेजी सिर्फ खाद्य वस्तुओं तक सीमित नहीं रही। परिवहन महंगाई जुलाई के 4.43 फीसदी से बढ़कर 4.60 फीसदी हो गई। रॉयटर्स के मुताबिक खाद्य और ईंधन को अलग रखने वाली कोर महंगाई भी जुलाई के 3.86 फीसदी से बढ़कर अगस्त में करीब 4.2 फीसदी रही। इससे महंगाई के दबाव के व्यापक होने के संकेत मिले हैं। कपड़े, घरेलू सामान और शिक्षा जैसी श्रेणियों में भी कीमतों का दबाव बढ़ा है।
RBI के चार फीसदी लक्ष्य से ऊपर महंगाई
अगस्त की 4.82 फीसदी खुदरा महंगाई RBI के 4 फीसदी के मध्यम अवधि लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही है। हालांकि यह सरकार की ओर से तय 2 से 6 फीसदी के सहनशीलता दायरे में बनी हुई है। RBI ने हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था। बढ़ती महंगाई और वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव के बीच अब आगे की मौद्रिक नीति पर बाजार की नजर रहेगी। रॉयटर्स के अनुसार महंगाई के विभिन्न हिस्सों में फैलते दबाव से अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हुई है, हालांकि RBI ने ऐसा कोई फैसला घोषित नहीं किया है।
कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ी चुनौती
महंगाई के अगले रुख में कच्चे तेल की कीमतें भी अहम रहेंगी। रॉयटर्स के मुताबिक ब्रेंट क्रूड करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें परिवहन और उत्पादन लागत के जरिए घरेलू महंगाई पर असर डाल सकती हैं।
थोक महंगाई भी 9.92 फीसदी पर पहुंची
खुदरा महंगाई के साथ थोक मूल्य आधारित महंगाई में भी अगस्त में बढ़ोतरी दर्ज हुई। WPI महंगाई जुलाई के 9.78 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 9.92 फीसदी हो गई। खाद्य, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में तेजी इसका प्रमुख कारण रही। थोक खाद्य महंगाई अगस्त में 7.05 फीसदी रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 फीसदी थी। ईंधन और बिजली की कीमतों में सालाना आधार पर 22.93 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
नई CPI सीरीज में अगस्त का सबसे ऊंचा स्तर
जनवरी 2026 से लागू 2024-बेस वाली नई CPI सीरीज में अगस्त की 4.82 फीसदी महंगाई अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। जून में खुदरा महंगाई 4.38 फीसदी, जुलाई में 4.45 फीसदी और अगस्त में 4.82 फीसदी रही। यानी तीन महीनों में महंगाई लगातार ऊपर गई है।


