- भारी बारिश और खदानों में जलभराव से तापीय उत्पादन प्रभावित, पीक आवर्स में गांवों, बुंदेलखंड और कस्बों में सीमित रोस्टरिंग, दिन में आपूर्ति सामान्य रखने की कोशिश
भारत 19
लखनऊ। भारी बारिश के बाद कोयला खदानों में जलभराव ने उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। खदानों से कोयले का उत्पादन और प्रेषण प्रभावित होने से कई तापीय बिजलीघरों में उत्पादन घटा है। नतीजा यह है कि रात के पीक आवर्स में उपलब्ध बिजली कम पड़ने पर गांवों, बुंदेलखंड, तहसीलों और नगर पंचायतों में सीमित रोस्टरिंग करनी पड़ रही है।
उत्पादन में कमी ने बढ़ाया रात का दबाव
राज्य में बिजली की मांग करीब 25 हजार मेगावाट के आसपास बनी हुई है। 10 सितंबर को मांग 25,701 मेगावाट तक पहुंची थी। इसके मुकाबले उत्पादन और उपलब्धता प्रभावित होने से करीब 2,000 से 2,500 मेगावाट तक का अंतर सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक करीब आधा दर्जन तापीय इकाइयों में उत्पादन ठप या प्रभावित रहा। 12 सितंबर की रिपोर्ट में भी आधा दर्जन इकाइयों से 3,000 मेगावाट से अधिक उत्पादन प्रभावित होने और ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय घंटों कटौती की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा कर्नाटक से बैंकिंग व्यवस्था के जरिए मिलने वाली करीब 2,500 मेगावाट बिजली की उपलब्धता पर भी दबाव बताया गया।
अनपरा में कम स्टॉक से घटा उत्पादन
सोनभद्र के अनपरा क्षेत्र के बिजलीघरों में कोयले की कमी का असर सीधे उत्पादन पर पड़ा है। स्थानीय रिपोर्टों में कई इकाइयों को कम लोड पर चलाने की जानकारी सामने आई है। अनपरा और अनपरा-सी में कोयला आपूर्ति घटने से उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कुछ बिजलीघरों में कोयले का भंडार घटकर 34 प्रतिशत तक रह गया था। बारिश के कारण खदानों से कोयला उत्पादन और प्रेषण प्रभावित होना इसकी प्रमुख वजह बताई गई।
दिन में राहत, रात में बढ़ता संकट
बिजली आपूर्ति पर दबाव दिन और रात में अलग-अलग दिखाई दे रहा है। दिन के समय सौर ऊर्जा से अतिरिक्त बिजली मिलने के कारण स्थिति संभालने में मदद मिल रही है, लेकिन शाम के बाद यह सहारा घट जाता है। इसी दौरान मांग बढ़ने पर उपलब्धता का अंतर बढ़ रहा है और रात की रोस्टरिंग का असर ग्रामीण उपभोक्ताओं पर ज्यादा पड़ रहा है। अमर उजाला की स्थानीय रिपोर्ट में सिद्धार्थनगर के कई गांवों में रात की रोस्टरिंग के कारण छह से आठ घंटे तक आपूर्ति बाधित रहने की बात सामने आई है। इससे पता चलता है कि समस्या का असर कुछ इलाकों में वास्तविक उपभोक्ता स्तर तक पहुंच चुका है।
तकनीकी खराबी ने भी बढ़ाया दबाव
बिजली संकट की वजह केवल कोयले की कमी नहीं है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक ओबरा और हरदुआगंज समेत कई इकाइयां तकनीकी कारणों से बंद रहीं। कुल 11 इकाइयों के 4,960 मेगावाट क्षमता प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है। कोयले की कमी से अनपरा की कुछ इकाइयों के कम लोड पर चलने से स्थिति और खराब हुई। इसलिए मौजूदा संकट को कोयला आपूर्ति में व्यवधान और उत्पादन इकाइयों की तकनीकी बंदी को दोनों के संयुक्त दबाव के रूप में देखना ज्यादा सटीक होगा।
कोयला आपूर्ति में सुधार के संकेत
हालांकि स्थिति पूरी तरह एकतरफा नहीं है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार 3 सितंबर से 6 सितंबर के बीच बिजली क्षेत्र के लिए कोयला रेक लोडिंग 370 से बढ़कर 444 रेक प्रतिदिन हो गई। यानी आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के प्रयास तेज किए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी कोयला स्टॉक पर दबाव रहा है। रॉयटर्स के अनुसार 9 सितंबर तक देश के 59 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में स्टॉक जरूरी स्तर के 25 प्रतिशत से कम था। हालांकि कोयला परिवहन बढ़ाने के साथ स्थिति सुधारने की कोशिश जारी है।
फिलहाल रात की रोस्टरिंग पर निगाह
यूपी में फिलहाल प्राथमिकता दिन की आपूर्ति सामान्य रखने और रात के पीक आवर्स में कटौती को सीमित रखने की है। जिला मुख्यालयों की आपूर्ति को अपेक्षाकृत सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है, जबकि कम उपलब्धता वाले क्षेत्रों में सीमित रोस्टरिंग की जा रही है। अब राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि बारिश का असर कम होने के बाद खदानों से बिजलीघरों तक कोयले की आपूर्ति कितनी तेजी से सामान्य होती है।


