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15 सितंबर तक एडवांस टैक्स का 45% भुगतान जरूरी

  • 10 हजार रुपये या अधिक सालाना कर देनदारी वालों पर लागू; 15 जून की 15% किस्त के बाद दूसरी किस्त में बाकी 30% जमा करना होगा, देरी या कमी पर ब्याज का प्रावधान

भारत  19

नई दिल्ली। आयकरदाताओं के लिए 15 सितंबर 2026 अहम तारीख है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिन लोगों पर एडवांस टैक्स की देनदारी बनती है, उन्हें इस तारीख तक दूसरी किस्त का भुगतान करना होगा। 15 सितंबर तक कुल एडवांस टैक्स का 45 प्रतिशत भुगतान पूरा होना जरूरी है। यानी 15 जून तक 15 प्रतिशत जमा कर चुके करदाता को अब सामान्य स्थिति में 30 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स जमा करना होगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 की आय पर एडवांस टैक्स से जुड़े प्रावधान आयकर अधिनियम, 2025 के तहत लागू हैं।

एडवांस टैक्स का भुगतान पूरे साल की अनुमानित कर देनदारी को एक साथ जमा करने के बजाय चार किस्तों में किया जाता है। सामान्य करदाताओं के लिए 15 जून तक 15 प्रतिशत, 15 सितंबर तक कुल 45 प्रतिशत, 15 दिसंबर तक कुल 75 प्रतिशत और 15 मार्च तक 100 प्रतिशत एडवांस टैक्स जमा करना होता है। हर अगली किस्त में पहले जमा की गई रकम घटा दी जाती है।

10 हजार से अधिक कर देनदारी पर एडवांस टैक्स

जिस करदाता की सालाना अनुमानित कर देनदारी 10,000 रुपये या उससे अधिक है, उसे एडवांस टैक्स देना होता है। हालांकि, व्यवसाय या पेशे से आय नहीं रखने वाला निवासी वरिष्ठ नागरिक इस दायरे से बाहर है। यह नियम केवल कारोबारियों और पेशेवरों तक सीमित नहीं है। वेतनभोगी व्यक्ति की वेतन से काटी गई TDS राशि यदि उसकी पूरी कर देनदारी को कवर नहीं करती, तो उसे भी एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है। मसलन, वेतन के अलावा बैंक एफडी का ब्याज, किराये की आय, शेयर या म्यूचुअल फंड से पूंजीगत लाभ, लाभांश या स्वतंत्र पेशे से आय हुई है तो कुल कर देनदारी बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में TDS और उपलब्ध अन्य टैक्स क्रेडिट को घटाने के बाद बची देनदारी के आधार पर एडवांस टैक्स की गणना करनी होगी। आयकर विभाग भी वेतनभोगी करदाताओं को ऐसी अतिरिक्त आय के कारण एडवांस टैक्स देनदारी की समीक्षा करने की सलाह देता है।

15 सितंबर को कितना टैक्स जमा करना होगा

दूसरी किस्त को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम 45 प्रतिशत को लेकर होता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि 15 सितंबर को करदाता को फिर से 45 प्रतिशत टैक्स जमा करना है। इस तारीख तक कुल भुगतान 45 प्रतिशत तक पहुंचना चाहिए। उदाहरण के लिए किसी करदाता की सालाना अनुमानित एडवांस टैक्स देनदारी एक लाख रुपये है। 15 जून तक उसे 15,000 रुपये जमा करने थे। अब 15 सितंबर तक कुल भुगतान 45,000 रुपये होना चाहिए। इसलिए दूसरी किस्त में 30,000 रुपये जमा करने होंगे। इसी तरह 15 दिसंबर तक कुल भुगतान 75,000 रुपये और 15 मार्च तक पूरी एक लाख रुपये की देनदारी का भुगतान करना होगा। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 408 में किस्तों की यही व्यवस्था निर्धारित है।

किस्त में कमी पर ब्याज का प्रावधान

निर्धारित किस्त से कम एडवांस टैक्स जमा करने पर ब्याज लग सकता है। नए आयकर अधिनियम की धारा 425 एडवांस टैक्स की किस्तों में कमी या देरी पर ब्याज से संबंधित है। जून, सितंबर और दिसंबर की किस्तों के लिए धारा 425 में 3 प्रतिशत की दर से ब्याज का प्रावधान है, जबकि मार्च की किस्त के लिए 1 प्रतिशत की दर लागू होती है। हालांकि, ब्याज की गणना के लिए न्यूनतम भुगतान की अलग सीमा है। यदि 15 जून तक कम से कम 12 प्रतिशत और 15 सितंबर तक कम से कम 36 प्रतिशत एडवांस टैक्स जमा किया गया है तो धारा 425 के तहत संबंधित किस्त की कमी पर ब्याज नहीं लगेगा। ध्यान रहे, 12 और 36 प्रतिशत निर्धारित किस्तें नहीं हैं। निर्धारित भुगतान स्तर 15 और 45 प्रतिशत ही हैं। 12 और 36 प्रतिशत ब्याज से राहत की सीमा हैं। इसके अलावा धारा 424 एडवांस टैक्स के भुगतान में डिफॉल्ट की स्थिति से संबंधित है। इसमें निर्धारित परिस्थितियों में 1 प्रतिशत प्रतिमाह या महीने के किसी हिस्से के लिए ब्याज लगाया जा सकता है। आयकर विभाग के मुताबिक नए कानून में एडवांस टैक्स डिफॉल्ट से जुड़े ब्याज की दरों में बदलाव नहीं किया गया है।

साल में आय बढ़े तो अगली किस्त बढ़ाएं

एडवांस टैक्स की गणना साल की अनुमानित आय और कर देनदारी के आधार पर होती है। इसलिए वित्तीय वर्ष के दौरान आय में बदलाव होने पर अगली किस्त के समय अनुमान को संशोधित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति को दिसंबर में शेयर बेचने से बड़ा पूंजीगत लाभ हुआ है। ऐसी स्थिति में उस अतिरिक्त आय को अनुमानित कर देनदारी में शामिल कर 15 दिसंबर या 15 मार्च की अगली किस्त में एडवांस टैक्स बढ़ाया जा सकता है। नए कानून में पूंजीगत लाभ, पहली बार कारोबार या पेशे से हुई आय और लाभांश जैसी कुछ आय के कम अनुमान या अनुमान न लगा पाने की स्थिति में भी विशेष प्रावधान हैं। यदि ऐसी आय पर देय टैक्स बाद की उपलब्ध किस्तों या 31 मार्च तक चुका दिया जाता है तो संबंधित स्थिति में ब्याज से राहत का प्रावधान है।

ज्यादा एडवांस टैक्स जमा हुआ तो क्या होगा

यदि किसी करदाता ने अनुमान से अधिक एडवांस टैक्स जमा कर दिया है तो रिटर्न दाखिल करते समय उस राशि का क्रेडिट लिया जा सकता है। अंतिम कर गणना में अतिरिक्त भुगतान निकलने पर लागू नियमों के अनुसार रिफंड भी मिल सकता है। इसलिए साल के दौरान आय में बदलाव होने पर पहले से जमा टैक्स को ध्यान में रखते हुए अगली किस्त की राशि दोबारा तय करना बेहतर है।

ई-पे टैक्स से ऑनलाइन कर सकते हैं भुगतान

एडवांस टैक्स का भुगतान आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल के ई-पे टैक्स विकल्प के जरिए ऑनलाइन किया जा सकता है। आयकर विभाग के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 की आय पर एडवांस टैक्स का भुगतान नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत किया जाएगा। भुगतान के बाद चालान और रसीद सुरक्षित रखना चाहिए। खासकर उन करदाताओं को 15 सितंबर से पहले अपनी कुल अनुमानित आय, TDS और अन्य उपलब्ध टैक्स क्रेडिट की समीक्षा कर दूसरी किस्त की सही राशि तय करनी चाहिए।

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