– ‘बियॉन्ड द क्लासरूम-स्किल्स फॉर सक्सेस’ में छात्रों ने सीखे कम्युनिकेशन, एक्टिव लिसनिंग, प्रेजेंटेशन और प्रोफेशनल व्यवहार के गुर
भारत 19
कानपुर। डिग्री मिल गई, लेकिन क्या नौकरी के इंटरव्यू के लिए आप पूरी तरह तैयार हैं? पढ़ाई का ज्ञान जरूरी है, लेकिन इंटरव्यू में अपनी बात कैसे रखनी है, आत्मविश्वास के साथ खुद को कैसे पेश करना है, सामने वाले की बात कितनी ध्यान से सुननी है और प्रोफेशनल माहौल में व्यवहार कैसा होना चाहिए—ये स्किल्स भी अब करियर का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। इसी डिग्री और नौकरी के बीच के गैप को कम करने की कोशिश छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में की गई।
स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज की ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट कमेटी की ओर से बुधवार को ‘बियॉन्ड द क्लासरूम-स्किल्स फॉर सक्सेस’ विषय पर इंटरेक्टिव सॉफ्ट स्किल्स एवं एम्प्लॉयबिलिटी डेवलपमेंट सत्र आयोजित किया गया। छात्रों को सिर्फ बातें नहीं बताई गईं, बल्कि अलग-अलग गतिविधियों के जरिए संवाद, प्रस्तुति, एक्टिव लिसनिंग और बॉडी लैंग्वेज जैसी स्किल्स का अभ्यास कराया गया।
डिग्री अवसर तक पहुंचाएगी, सफलता स्किल्स से मिलेगी
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। स्कूल के निदेशक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. अमित कुमार ने कहा कि डिग्री अवसर तक पहुंचा सकती है, लेकिन उस अवसर को सफलता में बदलने के लिए स्किल्स और आत्मविश्वास जरूरी हैं। CSJMU की शैक्षणिक व्यवस्था में भी स्किल्स और कम्युनिकेशन पर जोर दिया जाता है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक अकादमिक रूपरेखा में Skills Enhancement Courses के जरिए व्यावहारिक प्रशिक्षण और soft skills को छात्रों की employability बढ़ाने से जोड़ा गया है।
अंग्रेजी कमजोर है तो भी करियर नहीं रुकेगा
कार्यक्रम की विशेष अतिथि और लाइफ स्किल्स कोच एवं मैनेजमेंट एक्सपर्ट नंदिता मौर्या ने छात्रों को समझाया कि अंग्रेजी सिर्फ संवाद का माध्यम है, बुद्धिमत्ता का पैमाना नहीं। उन्होंने कहा कि ज्ञान क्षमता पैदा करता है, लेकिन प्रभावी संचार उस क्षमता को लोगों तक पहुंचाने का काम करता है।
आलू से फ्रेंच फ्राइज तक, समझाया टैलेंट का फॉर्मूला
सत्र को पूरी तरह एक्टिविटी आधारित रखा गया। छात्रों को ‘कच्ची प्रतिभा को निखारने’ की बात समझाने के लिए आलू से फ्रेंच फ्राइज बनाने का दिलचस्प उदाहरण दिया गया। इसके जरिए सफलता के तीन अहम स्तंभ बताए गए जैसे कि प्रभावी संवाद, आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुति और पेशेवर व्यवहार।
3C फॉर्मूले से कम्युनिकेशन की बारीकियां समझीं
छात्रों को कम्युनिकेशन के 3C—Clear, Concise और Consistent यानी स्पष्ट, संक्षिप्त और निरंतर संवाद का महत्व समझाया गया। ‘पार्टनर चैलेंज’ के जरिए छात्रों को LAST फ्रेमवर्क से एक्टिव लिसनिंग का अभ्यास कराया गया। वहीं ‘साइमन सेज’ गतिविधि के माध्यम से बॉडी लैंग्वेज, आवाज के उतार-चढ़ाव और शब्दों के सही इस्तेमाल को समझाया गया। CSJMU के पाठ्यक्रमों में भी professional communication, listening, speaking, presentation और non-verbal communication जैसी क्षमताओं को रोजगार और पेशेवर चुनौतियों से जोड़ा गया है।
इंटरव्यू में अपना परिचय भी बनेगा आपकी पहचान
छात्रों को इंटरव्यू या किसी पेशेवर मंच पर खुद को प्रभावी ढंग से पेश करने का तरीका भी बताया गया। इसके लिए ‘मैं कौन हूं, मैं क्या योगदान दे सकता हूं और भविष्य में क्या करना चाहता हूं’ पर आधारित इंट्रोडक्शन स्ट्रक्चर तैयार कराया गया। यानी छात्रों को सिर्फ बोलना नहीं, बल्कि अपनी क्षमता और व्यक्तित्व को सही तरीके से प्रस्तुत करना भी सिखाया गया।
ज्ञान को सफलता में बदलता है कौशल
फैकल्टी प्लेसमेंट कोऑर्डिनेटर डॉ. अनमोल शेखर श्रीवास्तव ने कहा कि कक्षा विद्यार्थियों को ज्ञान देती है, लेकिन कक्षा से बाहर विकसित कौशल उस ज्ञान को सफलता में बदलते हैं। कार्यक्रम का संचालन ऋत्विक मिश्र और हिमांशी द्विवेदी ने किया। कार्यक्रम में डॉ. प्रशांत, डॉ. मानस उपाध्याय, डॉ. अभिषेक मिश्रा, डॉ. एसपी वर्मा, डॉ. शरद दीक्षित, डॉ. उद्धव, डॉ. अनुराधा शर्मा, अहमद अब्दुल्ला, शैलजा यादव, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. उर्वशी, डॉ. अजय यादव समेत शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।


