- कानपुर की MSME कार्यशाला में बाजार की जानकारी, GeM पर कथित सांठगांठ, आसान ऋण-सब्सिडी और चमड़ा उद्योग बंदी का मुद्दा उठा
भारत 19
कानपुर। उत्तर प्रदेश का निर्यात पहली बार दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है, लेकिन इस रिकॉर्ड के बीच MSME उद्यमियों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कानपुर में हुई राष्ट्रीय कार्यशाला में उद्यमियों ने विदेशी बाजार की जानकारी से लेकर सरकारी खरीद, बैंक ऋण और सब्सिडी तक कई अड़चनें गिनाईं। GeM पर कथित सांठगांठ और चमड़ा उद्योग को तीन महीने बंद रखने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।
यूपी का निर्यात 2.01 लाख करोड़, कानपुर की हिस्सेदारी
संयुक्त महानिदेशक विदेश व्यापार आलोक द्विवेदी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का निर्यात ₹2,01,241 करोड़ पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इसमें 8.16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कार्यशाला में बताया गया कि निर्यात बढ़ाने में MSME इकाइयों की भूमिका अहम है। कानपुर मंडल में लेदर, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं। हाल में कानपुर को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में भी पहल हुई है।
निर्यात की इच्छा, लेकिन विदेशी बाजार की जानकारी नहीं
FETA के महासचिव उमंग अग्रवाल ने कहा कि कई उद्यमी निर्यात करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि किस देश में उनके उत्पाद की मांग है, खरीदार कितना भरोसेमंद है और भुगतान सुरक्षित कैसे रखा जाए। उन्होंने बताया कि विदेशी खरीदार पैकेजिंग और जरूरी प्रमाणपत्रों से जुड़ी शर्तें रखते हैं। छोटे उद्यमियों को इन प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं होने से वे संभावित बाजार तक पहुंचने से पहले ही पीछे रह जाते हैं। उन्होंने DGFT से व्यावहारिक और विस्तृत प्रशिक्षण की मांग की।
GeM पर कथित सांठगांठ, पारदर्शिता की मांग
सरकारी खरीद के लिए GeM को लेकर उद्यमियों ने गंभीर सवाल उठाए। उमंग अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में विभाग और आपूर्तिकर्ताओं के बीच खरीद पहले से तय होने जैसी स्थिति बनती है, जिससे सामान्य MSME को बराबरी का अवसर नहीं मिल पाता। GeM विशेषज्ञ प्रियंवदा अग्रवाल ने उद्यमियों को पंजीकरण और खरीद प्रक्रिया की जानकारी दी। उद्यमियों ने मांग की कि सरकारी खरीद में वास्तविक प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। हालांकि, प्रदेश में GeM के जरिए MSME की सरकारी खरीद में भागीदारी बढ़ी है। सितंबर की शुरुआत में सरकार ने बताया था कि चालू वित्त वर्ष में जुलाई तक प्रदेश की GeM खरीद में MSE की हिस्सेदारी 59 प्रतिशत रही।
ई-कॉमर्स से बाजार बढ़े, छोटे कारोबार भी बचें
उद्यमियों ने Flipkart, Amazon और Walmart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को बाजार विस्तार का अवसर माना, लेकिन स्थानीय और पारंपरिक कारोबार पर बढ़ते दबाव की चिंता भी जताई। उनका कहना था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म छोटे कारोबारियों को नए ग्राहक दे सकते हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा ऐसी होनी चाहिए जिसमें स्थानीय कारोबार अपनी जगह बनाए रख सकें।
नीति और सब्सिडी के बीच उद्यमी कहां अटक रहे
उद्यमियों ने MSME Policy 2022 और Leather Policy के तहत मिलने वाली सुविधाओं और सब्सिडी का लाभ पात्र इकाइयों तक पहुंचाने की मांग की। उनका कहना था कि नीति और प्रोत्साहन घोषित होने के बावजूद कई उद्यमियों को यह स्पष्ट नहीं होता कि वे किस योजना के पात्र हैं और लाभ के लिए किस प्रक्रिया से गुजरना है। चमड़ा उद्योग से जुड़े उद्यमियों ने माघ मेले के दौरान तीन महीने तक उद्योग बंद रखने की व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उमंग अग्रवाल ने कहा कि लंबे समय तक उत्पादन रुकने से कारोबार प्रभावित होता है और श्रमिकों के पलायन की स्थिति बनती है। उद्यमियों ने पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की, जिससे उत्पादन पूरी तरह बंद न करना पड़े।
TReDS से भुगतान और कार्यशील पूंजी का रास्ता
कार्यशाला में TReDS के जरिए बड़ी कंपनियों को माल आपूर्ति करने के बाद बिल डिस्काउंट कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इससे MSME इकाइयों को भुगतान मिलने में लगने वाला समय घटाने और कार्यशील पूंजी की समस्या संभालने में मदद मिल सकती है। नए उद्यमियों ने बैंक ऋण मिलने में आ रही दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया। मांग की गई कि लीड बैंक मैनेजर और MSME विभाग के बीच ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे पात्र उद्यमियों के ऋण आवेदन समयबद्ध तरीके से निपट सकें।
200 से अधिक MSME इकाइयां हुईं शामिल
एचबीटीयू परिसर स्थित क्षेत्रीय उद्योग कार्यालय के सभागार में हुई कार्यशाला में 200 से अधिक MSME इकाइयों और सरकारी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने आयात-निर्यात, GeM, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता मानक, पेटेंट-ट्रेडमार्क, MSME नीति, बैंकिंग और वित्तीय सुविधाओं पर जानकारी दी। MSME विकास कार्यालय, कानपुर की ओर से आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में निर्यात, ई-कॉमर्स, सरकारी खरीद और वित्तीय विकल्पों पर उद्यमियों को जानकारी देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
रिकॉर्ड निर्यात के बाद अगली चुनौती बाजार तक पहुंच
उत्तर प्रदेश के लिए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात बड़ा पड़ाव है, लेकिन कानपुर के उद्यमियों की शिकायतें बताती हैं कि उत्पादन क्षमता से आगे अब बाजार तक पहुंच, निष्पक्ष सरकारी खरीद, आसान वित्त और नीतिगत लाभ की वास्तविक पहुंच बड़ी चुनौती है।


