- कर्मचारी एसोसिएशन के चुनाव पर कानपुर मंडल के डिप्टी रजिस्ट्रार ने मांगे मूल अभिलेख, एक महीने में सामान्य सभा की सूची देने के निर्देश, पंजीकृत नियमावली में महामंत्री पद तक का उल्लेख नहीं
भारत 19
कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) कर्मचारी एसोसिएशन का चुनाव कराने के बाद अब पूरी प्रक्रिया नियमावली के सवाल पर घिर गई है। चुनाव में पदाधिकारी चुने जाने के बावजूद फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स कार्यालय की जांच में एसोसिएशन की ओर से प्रस्तुत नियमावली और कार्यालय में पंजीकृत नियमावली के बीच अंतर सामने आया है। कानपुर मंडल के डिप्टी रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि कार्यालय में पंजीकृत नियमावली से अलग किसी अन्य नियमावली के आधार पर की गई कार्रवाई को स्वतः विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। पंजीकृत नियमावली में महामंत्री पद का उल्लेख नहीं है, जबकि एसोसिएशन द्वारा प्रस्तुत चुनाव संबंधी कार्रवाई में पद का उल्लेख किया है। अब चुनाव प्रक्रिया, पदाधिकारियों की स्थिति और कथित संशोधित नियमावली की वैधता मूल अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
1971 में पंजीकरण, फिर दूसरी नियमावली कहां से आई?
डिप्टी रजिस्ट्रार की ओर से 8 सितंबर 2026 को जारी पत्र संख्या 1341(1)/आई-24157 में कहा गया है कि संस्था की पत्रावली और पंजीकृत बायलॉज के परीक्षण में सामने आया कि एसोसिएशन जिस नियमावली का हवाला दे रही है, वह कार्यालय में पंजीकृत नहीं है। अभिलेखों के अनुसार एसोसिएशन का पंजीकरण 16 अप्रैल 1971 को हुआ था। उस समय संस्था का स्मृतिपत्र और नियमावली पंजीकृत की गई थी। इसके बाद किसी अन्य अथवा संशोधित नियमावली के पंजीकरण का अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। यही अंतर अब पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। सवाल यह है कि एसोसिएशन की ओर से चुनाव प्रक्रिया में जिस नियमावली को आधार बनाया गया, उसका पंजीकृत अभिलेखों में आधार क्या है।
पंजीकृत नियमावली से अलग चुनाव प्रक्रिया
डिप्टी रजिस्ट्रार ने चुनाव संबंधी कार्रवाई पर भी आपत्ति दर्ज की है। पत्र में कहा गया है कि पंजीकृत नियमावली की धारा 3, 4 और 5 के अनुरूप चुनाव संबंधी कार्रवाई कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है। इसके अलावा पंजीकृत नियमावली में महामंत्री पद का उल्लेख भी नहीं है। ऐसे में एसोसिएशन की ओर से प्रस्तुत चुनाव संबंधी कार्रवाई को पंजीकृत नियमावली के प्रावधानों के विपरीत मानते हुए स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही गई है। इस आपत्ति के बाद अब सवाल केवल चुनाव कराने की प्रक्रिया का नहीं, बल्कि चुनाव के बाद अस्तित्व में आए पदों और पदाधिकारियों की स्थिति का भी हो गया है।
अब एक महीने में देने होंगे मूल अभिलेख
फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स कार्यालय ने एसोसिएशन को एक माह के भीतर सामान्य सभा की सूची निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 की धारा 4बी के तहत परीक्षण के लिए संस्था के मूल अभिलेख भी उपलब्ध कराने होंगे। इनमें कार्रवाई रजिस्टर, एजेंडा रजिस्टर, सदस्यता रजिस्टर, बैंक पासबुक, कैशबुक और सदस्यता रसीद बुक शामिल हैं। इन अभिलेखों की जांच के बाद संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पदाधिकारियों के पद इस्तेमाल पर भी चेतावनी
डिप्टी रजिस्ट्रार ने एसोसिएशन के पद के इस्तेमाल को लेकर भी स्पष्ट चेतावनी दी है। आदेश में कहा गया है कि जब तक सक्षम स्तर से एसोसिएशन को वैधता प्रदान नहीं की जाती, तब तक कोई भी कर्मचारी यूनियन के पद का प्रयोग नहीं करेगा और न ही यूनियन की गतिविधियों में भाग लेगा। इस निर्देश के बाद मौजूदा चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
मूल दस्तावेज बताएंगे चुनाव की असली तस्वीर
अब CSJMU कर्मचारी एसोसिएशन के चुनाव विवाद की अगली कड़ी मूल अभिलेखों की जांच से जुड़ गई है। पंजीकृत नियमावली, चुनाव संबंधी कार्रवाई, सामान्य सभा की सूची और संस्था के मूल रजिस्टरों के परीक्षण के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि चुनाव प्रक्रिया पंजीकृत नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप थी या किसी अन्य नियमावली को आधार बनाकर आगे बढ़ाई गई। फिलहाल डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश ने चुनाव के बाद पदाधिकारियों की वैधता से जुड़े सवालों को भी जांच के दायरे में ला दिया है। अब एक महीने के भीतर प्रस्तुत किए जाने वाले मूल अभिलेख यह तय करने में अहम होंगे कि CSJMU कर्मचारी एसोसिएशन का चुनाव पंजीकृत नियमावली के मुताबिक हुआ था या नहीं।


