भारत 19
कानपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में विश्वविद्यालयों की पढ़ाई, शोध, प्रशासन और रोजगारपरक शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इसी बदलाव को संस्थागत दिशा देने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में 12 और 13 सितंबर को ‘एआई मंथन 2.0’ आयोजित किया जाएगा। दो दिवसीय आयोजन में विशेषज्ञ सिर्फ एआई के इस्तेमाल पर चर्चा नहीं करेंगे, बल्कि फ्यूचर रेडी करिकुलम, स्मार्ट गवर्नेंस, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, शोध, स्वास्थ्य, कृषि और जिम्मेदार एआई को लेकर भविष्य की विश्वविद्यालय व्यवस्था का रोडमैप तैयार करने पर मंथन करेंगे।
रोजगार की जरूरतों के अनुरूप बदलेगा विश्वविद्यालयी करिकुलम
आयोजन का प्रमुख विषय ‘फ्यूचर रेडी एकेडमिक करिकुलम’ होगा। तकनीक और रोजगार की बदलती जरूरतों को देखते हुए विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रमों में एआई, डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित कौशल को शामिल करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। फोकस सिर्फ विद्यार्थियों को एआई टूल्स चलाना सिखाने तक सीमित नहीं रहेगा। उनकी कार्यप्रणाली, क्षमताओं, सीमाओं और जिम्मेदार इस्तेमाल की समझ विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि विद्यार्थी तकनीक के उपभोक्ता के साथ उसके समझदार और जिम्मेदार उपयोगकर्ता बन सकें।
एआई से बदलेगी विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था
‘स्मार्ट गवर्नेंस एंड ऑटोमेशन’ के तहत मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन के जरिए विश्वविद्यालय की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। डेटा आधारित निर्णय लेने, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और संस्थागत कार्यक्षमता बढ़ाने के उपायों पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे। इसी क्रम में ‘इंटेलिजेंट यूनिवर्सिटी गवर्नेंस एंड एडमिनिस्ट्रेशन’ सत्र में एआई को विश्वविद्यालय की शासन और प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़ने की संभावनाओं पर फोकस रहेगा।
पढ़ाई से मूल्यांकन तक एआई बदलेगा पूरा सिस्टम
‘एआई इनेबल्ड टीचिंग, लर्निंग एंड असेसमेंट’ सत्र में एआई आधारित शिक्षण, व्यक्तिगत सीखने, लर्निंग एनालिटिक्स और मूल्यांकन की नई तकनीकों पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की सीखने की जरूरत के अनुरूप शिक्षा को अधिक प्रभावी और व्यक्तिगत बनाना होगा। वहीं ‘रिसर्च, इनोवेशन एंड नॉलेज डिस्कवरी’ के तहत बड़े डेटा के विश्लेषण, शोध की गति और गुणवत्ता बढ़ाने तथा एआई के जरिए नई खोजों की संभावनाओं पर विचार होगा।
‘कैरिकुलम ट्रांसफॉर्मेशन एंड फ्यूचर रेडी स्किल्स’ में बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप विद्यार्थियों में जरूरी कौशल विकसित करने की रणनीति पर चर्चा होगी। वहीं ‘एकेडमिक एनालिटिक्स एंड इंडस्ट्रियल डिसीजन मेकिंग’ में डेटा के आधार पर अकादमिक और औद्योगिक निर्णय लेने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
हेल्थकेयर और खेती में भी दिखेगा एआई का असर
एआई मंथन 2.0 का दायरा विश्वविद्यालय की शिक्षा और प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगा। ‘एआई इन हेल्थकेयर’ सत्र में मेडिकल इमेजिंग, बीमारियों की शुरुआती पहचान और डेटा आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के इस्तेमाल पर चर्चा होगी। इसी तरह ‘एआई इन एग्रीकल्चर’ में प्रिसीजन फार्मिंग, फसल निगरानी और बेहतर फसल प्रबंधन के जरिए कृषि को अधिक स्मार्ट और डेटा आधारित बनाने की संभावनाओं पर मंथन किया जाएगा।
डेटा सुरक्षा से एल्गोरिद्मिक पक्षपात तक उठेंगे सवाल
एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उससे जुड़े जोखिम और नैतिक सवाल भी आयोजन के केंद्र में रहेंगे। ‘रिस्पॉन्सिबल, एथिकल एंड सिक्योर एआई’ सत्र में डेटा प्राइवेसी, साइबर सुरक्षा, एल्गोरिद्मिक पक्षपात, पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। यानी एआई को तेजी से अपनाने के साथ यह भी तय करने पर जोर रहेगा कि विश्वविद्यालयों में इसका इस्तेमाल सुरक्षित, पारदर्शी, जवाबदेह और नैतिक तरीके से हो।
उद्योग और विश्वविद्यालय के बीच मजबूत होगी साझेदारी
‘इंडस्ट्री-एकेडेमिया कोलैबोरेशन’ के जरिए विश्वविद्यालय और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी विचार होगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों और व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना होगा, ताकि अकादमिक शिक्षा और रोजगार बाजार के बीच की दूरी कम की जा सके।
एआई के दौर में विश्वविद्यालय की नई दिशा
एआई मंथन 2.0 में पाठ्यक्रम, शिक्षण, मूल्यांकन, शोध, प्रशासन, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगारपरक कौशल और एआई की नैतिकता जैसे अलग-अलग पहलुओं को एक साथ जोड़ा जाएगा। इस तरह आयोजन का फोकस सिर्फ एआई अपनाने पर नहीं, बल्कि एआई के दौर में सीएसजेएमयू को फ्यूचर रेडी विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की दिशा तय करने पर रहेगा।


