भारत 19
विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। 12वीं के बाद शिक्षक बनने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) ने नई राह खोली है। विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में इस साल से चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) शुरू किया गया है। इसके पहले बैच में बीए-बीएड और बीएससी-बीएड की 50-50 सीटों पर दाखिला लिया गया है। इस एकीकृत पाठ्यक्रम के जरिए छात्रों को स्नातक और बीएड के लिए अलग-अलग पांच साल पढ़ाई करने के बजाय चार साल में दोनों पाठ्यक्रम पूरे करने का अवसर मिलेगा। अगले सत्र में प्रवेश के लिए आवेदन फॉर्म फरवरी 2027 में जारी किए जाएंगे।
स्नातक और बीएड की पढ़ाई अब एक साथ
अब तक शिक्षक बनने के इच्छुक छात्रों को पहले तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करना होता था। इसके बाद दो वर्षीय बीएड में प्रवेश लेना पड़ता था। इस तरह शिक्षक बनने के लिए स्नातक और बीएड की पढ़ाई पूरी करने में कुल पांच वर्ष लगते थे। ITEP के चार वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम से छात्रों का एक साल बचेगा। इसके साथ ही 12वीं के बाद छात्रों को पहले स्नातक पाठ्यक्रम चुनने और फिर बीएड में प्रवेश लेने की अलग प्रक्रिया से भी नहीं गुजरना पड़ेगा। एक ही पाठ्यक्रम में स्नातक शिक्षा के साथ शिक्षक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
ITEP में सीटों से अधिक रहा छात्रों का रुझान
सीएसजेएमयू के शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. तनूजा भट्ट ने बताया कि इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या उपलब्ध सीटों की तुलना में काफी अधिक रही। विश्वविद्यालय में बीएड के इस चार वर्षीय पाठ्यक्रम में सत्र 2026-27 के लिए सभी सीटों पर दाखिला हो चुका है।
उन्होंने बताया कि छात्रों की बढ़ती जरूरत और समय की मांग को देखते हुए पिछले वर्ष चार वर्षीय शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद पाठ्यक्रम का खाका तैयार किया गया। इसी आधार पर नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने विश्वविद्यालय को इस नए पाठ्यक्रम के संचालन की मान्यता दी।
शिक्षक प्रशिक्षण के साथ मिलेगी स्नातक डिग्री
ITEP के तहत विद्यार्थियों को स्नातक शिक्षा के साथ ही शिक्षक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को कम समय में एकीकृत और लक्ष्य आधारित शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। पाठ्यक्रम का उद्देश्य शिक्षक बनने की तैयारी को शुरुआती स्तर से ही व्यवस्थित करना है।
सीएसजेएमयू में पहली बार शुरू हुआ चार वर्षीय कोर्स
अभी तक विश्वविद्यालय से संबद्ध किसी भी कॉलेज में बीएड का चार वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स संचालित नहीं हो रहा है। ऐसे में सीएसजेएमयू की यह पहल शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासकर उन विद्यार्थियों के लिए यह पाठ्यक्रम उपयोगी होगा, जो 12वीं के बाद ही शिक्षण को करियर के रूप में चुनना चाहते हैं।
इन वजहों से सीएसजेएमयू को मिली मान्यता
सीएसजेएमयू उन मानकों को पूरा करता है, जो चार वर्षीय ITEP के संचालन के लिए जरूरी हैं। विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से A++ ग्रेड प्राप्त है। इसके अलावा छात्र-शिक्षक अनुपात और शोध का ग्राफ भी बढ़ा है। विश्वविद्यालय परिसर में संचालित पाठ्यक्रमों के तहत 500 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। ITEP कोर्स की मान्यता मिलने में इन उपलब्धियों की भी अहम भूमिका रही।
12वीं के बाद लक्ष्य तय करने का अवसर
उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने बताया कि शिक्षक बनने के लिहाज से यह पाठ्यक्रम अच्छी तरह डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि शिक्षक बनने का लक्ष्य रखने वाले विद्यार्थी 12वीं के बाद ही इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। चूंकि इस पाठ्यक्रम में वही विद्यार्थी प्रवेश लेंगे, जो शिक्षण क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, इसलिए भविष्य में बेहतर और प्रशिक्षित शिक्षक तैयार होने की उम्मीद है।


