- 7.56 करोड़ रुपये की परियोजना सात साल चलेगी, ग्रामीण और मलिन बस्तियों में मुफ्त स्वास्थ्य जांच, स्क्रीनिंग और प्राथमिक उपचार की मिलेगी सुविधा
कानपुर। अस्पताल तक पहुंचने में असमर्थ लोगों के लिए अब स्वास्थ्य सेवाएं उनके गांव और बस्तियों तक पहुंचेंगी। सीएसजेएमयू स्मार्ट मेडिकल बस के जरिए ग्रामीण और वंचित आबादी को मुफ्त प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने जा रहा है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने 7.56 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट बस बेस्ड प्राइमरी हेल्थ केयर यूनिट को सात साल तक संचालित करने की मंजूरी दी है। सीएसआर मद से चलने वाली इस मोबाइल हेल्थ यूनिट में स्वास्थ्य जांच, नेत्र परीक्षण, बीमारी की शुरुआती पहचान, प्राथमिक उपचार, मानसिक स्वास्थ्य और पोषण परामर्श के साथ फिजियोथेरेपी और बुनियादी डायग्नोस्टिक सेवाएं उपलब्ध होंगी।
अस्पताल पहुंचेगा गांव, मुफ्त जांच और उपचार मिलेगा
गुरुवार को सेंटर फॉर एकेडमिक में हुई कार्य परिषद की बैठक में स्मार्ट मेडिकल बस परियोजना को मंजूरी दी गई। विश्वविद्यालय परिसर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी मलिन बस्तियों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। मोबाइल यूनिट का उद्देश्य उन लोगों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जिनके लिए अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक जाना मुश्किल होता है। बस अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर मौके पर स्वास्थ्य जांच करेगी और जरूरत के अनुसार प्राथमिक उपचार व परामर्श उपलब्ध कराएगी।
एक बस में कई स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा
स्मार्ट मेडिकल बस में सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ नेत्र परीक्षण और विभिन्न बीमारियों की शुरुआती स्क्रीनिंग की जाएगी। मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और पोषण संबंधी परामर्श भी दिया जाएगा। इसके अलावा प्राथमिक उपचार, फिजियोथेरेपी और बुनियादी डायग्नोस्टिक सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। जरूरत के अनुसार मरीजों को आगे के उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में भी मदद की जा सकेगी।
गांवों में सेवा के साथ विद्यार्थियों को प्रशिक्षण
यह मोबाइल हेल्थ यूनिट सिर्फ मरीजों के लिए ही उपयोगी नहीं होगी, बल्कि सीएसजेएमयू के विद्यार्थियों को भी समुदाय के बीच व्यावहारिक प्रशिक्षण का अवसर देगी। स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के एमएसडब्ल्यू, एमपीएच और एमएससी साइकोलॉजी तथा स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज के बीएमएलएस, बीएमआरआईटी, बीपीटी और न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स के विद्यार्थी फील्ड में जाकर प्रशिक्षण हासिल कर सकेंगे। इस तरह स्मार्ट मेडिकल बस जरूरतमंदों के लिए मोबाइल हेल्थ क्लीनिक और विद्यार्थियों के लिए चलता-फिरता प्रशिक्षण केंद्र दोनों की भूमिका निभाएगी।
7.56 करोड़ की लागत, सात साल का संचालन
स्मार्ट मेडिकल बस परियोजना पर 7.56 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसे सात साल की अवधि के लिए संचालित किया जाएगा और इसके लिए सीएसआर मद से वित्तीय व्यवस्था की जाएगी। विश्वविद्यालय के सामाजिक उत्तरदायित्व को विस्तार देने के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। खासतौर पर विश्वविद्यालय के आसपास के ग्रामीण इलाकों और शहरी मलिन बस्तियों में रहने वाली जरूरतमंद आबादी को इससे प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उनके नजदीक मिल सकेंगी।
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी फैसला
कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में भी निर्णय लिया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित आउटसोर्स सेवा निगम की शर्तों को विश्वविद्यालय में लागू करने की स्वीकृति दी गई है। इससे आउटसोर्स कर्मियों को निगम की निर्धारित शर्तों के अनुरूप लाभ मिल सकेगा।
तीन शिक्षकों को सीनियर प्रोफेसर की मंजूरी
बैठक में तीन शिक्षकों की सीनियर प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति को भी मंजूरी दी गई। इनमें लाइफ साइंसेज के डीन प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट के निदेशक प्रो. सुधांशु पांडिया और अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अंशू यादव शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों में आचार्य, सह-आचार्य और सहायक आचार्य के रिक्त नियमित पदों को भरने के लिए चयन समितियों की संस्तुतियों को मंजूरी मिली। नियमित शिक्षकों के करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत पदोन्नति से संबंधित चयन समितियों और स्क्रीनिंग कम इवैल्युएशन समितियों की संस्तुतियों को भी कार्य परिषद ने स्वीकृति दी।


