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कानपुर RTO कार्यालय पर बड़ा एक्शन, दो ARTO निलंबित

  • परिवहन कार्यालय में छापेमारी के बाद शासन की कार्रवाई, 11 संदिग्धों से 43,485 रुपये बरामद, दो वरिष्ठ सहायकों के बाद ARTO पर भी गिरी गाज

भारत 19
कानपुर
। संभागीय परिवहन कार्यालय में अनियमितताओं और अवैध वसूली की शिकायतों के बाद शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के निर्देश पर कानपुर नगर के दो सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (ARTO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं RTO प्रशासन राकेन्द्र सिंह से 15 दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है।निलंबित अधिकारियों में ARTO प्रवर्तन तृतीय दल सोमलता यादव और ARTO प्रशासन आलोक कुमार शामिल हैं। शासन ने दोनों को कार्यालय की गतिविधियों की प्रभावी निगरानी नहीं करने, अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियंत्रण में लापरवाही और शासनादेशों व उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी माना है। निलंबन अवधि में दोनों अधिकारी मुख्यालय से संबद्ध रहेंगे और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

औचक निरीक्षण में सामने आया था पूरा मामला

परिवहन कार्यालय में अवैध गतिविधियों की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी कानपुर के निर्देश पर अपर पुलिस उपायुक्त और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी ने औचक निरीक्षण किया था। टीम ने कार्यालय में मौजूद करीब 50 लोगों से पूछताछ की। इनमें 11 संदिग्ध लोग चिन्हित किए गए, जिन पर वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर आवेदकों से धोखाधड़ी और अवैध वसूली करने का आरोप सामने आया। संदिग्धों के पास से 43,485 रुपये नकद भी बरामद किए गए। जांच में परिवहन कार्यालय के दो वरिष्ठ सहायकों मधुर मिश्रा और विपिन कुमार की भूमिका भी सामने आई। दोनों को 27 अगस्त को ही निलंबित किया जा चुका है और उनके खिलाफ खुली सतर्कता जांच चल रही है। कार्यालय में हुई कार्रवाई के बाद दो लिपिक समेत कुल 15 लोगों के खिलाफ काकादेव थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

रसीद से ज्यादा रकम लेने का मामला भी मिला

निरीक्षण के दौरान एक ट्रक चालक ने आरोप लगाया कि कार्यालय के कर्मचारी ने उससे 26,750 रुपये लिए, जबकि उसे केवल 21,750 रुपये की जमा पर्ची दी गई। कैश मिलान में भी इस अंतर की पुष्टि हुई। विभागीय जांच में दोनों निलंबित वरिष्ठ सहायकों की रसीदों में दर्ज रकम और उपलब्ध धनराशि के बीच क्रमशः 7,000 और 15,000 रुपये का अंतर पाया गया है।

वाराणसी के उप परिवहन आयुक्त करेंगे जांच

शासन ने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र), वाराणसी को सौंपी है। वहीं RTO प्रशासन राकेन्द्र सिंह को 15 दिन में अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि कार्यालयों में अनधिकृत व्यक्तियों की भूमिका और आवेदकों से धोखाधड़ी जैसे मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी।

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