- कानपुर के रूमा औद्योगिक क्षेत्र में कई सड़कें पानी में डूबीं; कर्मचारी और ट्रांसपोर्टर आने से कतरा रहे, लाखों का माल व बिजली उपकरण प्रभावित, 86 करोड़ की जल निकासी योजना के बावजूद समस्या बरकरार
भारत 19
कानपुर। कानपुर के रूमा औद्योगिक क्षेत्र में 15 दिन से ज्यादा समय से जमा पानी अब महज जलभराव की समस्या नहीं रह गया है। 200 से अधिक औद्योगिक इकाइयों का कारोबार इसकी चपेट में आने लगा है। प्रमुख सड़कों पर पानी भरा होने से कर्मचारियों और श्रमिकों का कारखानों तक पहुंचना मुश्किल है। ट्रांसपोर्टर वाहन भेजने से बच रहे हैं और ग्राहक भी औद्योगिक क्षेत्र में आने से कतरा रहे हैं। दूसरी ओर, कारखानों में रखा कच्चा और तैयार माल तथा बिजली के उपकरण पानी की वजह से नुकसान के खतरे में हैं।
सड़क पर पानी ने रोक दी कारोबार की आवाजाही
रूमा के उद्यमी अभिषेक अग्रवाल और फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल ने औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि लगातार जलभराव ने रोजमर्रा के औद्योगिक संचालन को प्रभावित कर दिया है। सबसे बड़ी परेशानी कर्मचारियों की आवाजाही को लेकर है। श्रमिक और कर्मचारी, खासकर महिला कर्मचारी, पानी से होकर कारखानों तक आने को तैयार नहीं हैं। उधर, ट्रांसपोर्टरों के वाहन प्रभावित सड़कों से गुजरने में परेशानी महसूस कर रहे हैं। इससे कच्चा माल कारखानों तक पहुंचाने और तैयार माल बाहर भेजने की प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है। ग्राहकों की आवाजाही कम होने से कारोबारी गतिविधियां और प्रभावित हो रही हैं। उद्यमियों का कहना है कि हालात ऐसे हैं कि अब कारखानों तक माल पहुंचाने के लिए क्या वाहनों की जगह नाव का इंतजाम करना पड़ेगा।

अभिषेक अग्रवाल, उद्यमी, रूमा औद्योगिक क्षेत्र
लाखों के माल और मशीनरी पर बढ़ा खतरा
जलभराव का असर कारखानों के भीतर रखे सामान पर भी पड़ रहा है। उद्यमियों के मुताबिक कई जगह पानी कारखानों और उनके आसपास तक पहुंच गया है। इससे कच्चे माल और तैयार माल के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण लाखों रुपये के माल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। बिजली के उपकरण और दूसरी मशीनरी भी पानी के संपर्क में आने से प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में समस्या सिर्फ उत्पादन रुकने तक सीमित नहीं है। मशीनरी और विद्युत उपकरण खराब होने पर उद्यमियों को मरम्मत या बदलाव का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ सकता है।

उमंग अग्रवाल, महासचिव, फीटा
86 करोड़ की योजना, फिर भी पानी से राहत नहीं
रूमा की सड़क और जल निकासी व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। वर्ष 2025 में रूमा समेत औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद यूपीसीडा ने रूमा को आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए 86 करोड़ रुपये की योजना तैयार की थी। इस योजना में सड़क, नाली, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके तहत करीब 18.83 किलोमीटर जल निकासी लाइन और 35 पुलिया बनाए जाने की योजना भी शामिल है। इसके बावजूद मौजूदा बारिश में औद्योगिक क्षेत्र को जलभराव से राहत नहीं मिल सकी है।
फरवरी में भी उठी थी अधूरे कामों की बात
रूमा के उद्यमी इससे पहले भी समस्या उठा चुके हैं। फरवरी 2026 में उद्यमियों ने मंत्री को ज्ञापन देकर सड़क, जल निकासी और प्रकाश व्यवस्था के अधूरे कार्यों की शिकायत की थी। अब बारिश के बाद लंबे समय से जमा पानी ने इन अधूरे बुनियादी ढांचे की समस्या को फिर सामने ला दिया है।
रिकॉर्ड बारिश ने बढ़ाई रूमा की मुश्किल
कानपुर में अगस्त 2026 में 689.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसे पिछले पांच वर्षों में अगस्त की सर्वाधिक बारिश बताया गया है। एक सितंबर को भी 78.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि दो सितंबर को शहर में बारिश का अलर्ट रहा। लगातार बारिश ने रूमा में पहले से मौजूद जल निकासी की समस्या को और गंभीर कर दिया।
नए निवेश से पहले पुराने उद्योगों की चिंता
रूमा औद्योगिक क्षेत्र में 200 से अधिक इकाइयां संचालित हैं। इनमें बड़ी संख्या टेक्सटाइल इकाइयों की है। इसके अलावा डाइंग, ब्लीचिंग और अन्य औद्योगिक इकाइयां भी हैं। उद्यमियों का कहना है कि सरकार कानपुर को औद्योगिक विकास का केंद्र बनाने और नए निवेश व रोजगार को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। ऐसे में मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त करना भी उतना ही जरूरी है। जब कर्मचारी कारखानों तक नहीं पहुंच पा रहे, ट्रांसपोर्टर वाहन भेजने से बच रहे और माल व मशीनरी जलभराव के खतरे में हैं, तो नए निवेश को जमीन पर उतारने की चुनौती और बढ़ जाती है।


