- फैकल्टी इनोवेशन से तकनीकी आइडिया को उद्योग, पेटेंट और रोजगार से जोड़ने की तैयारी; पानी, ऊर्जा, खेती, स्वास्थ्य और ट्रैफिक जैसी समस्याओं के समाधान पर जोर
भारत 19
विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। उत्तर प्रदेश में अब मेधा तैयार करने वाले शिक्षकों की मेधा को भी विकास की धुरी से जोड़ने की तैयारी है। सरकार पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों के शिक्षकों से ऐसे तकनीकी और नवाचार आधारित आइडिया लेना चाहती है, जो प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहें, बल्कि आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में उपयोगी साबित हों। इसके लिए राज्यस्तरीय Faculty Innovation Competition आयोजित की जाएगी। इस पहल में शिक्षकों के नए प्रयोग, प्रोटोटाइप, डेमो मॉडल और तकनीकी समाधान सामने लाए जाएंगे। उपयोगी और व्यावहारिक नवाचारों को आगे उद्योग, पेटेंट और व्यावसायिक इस्तेमाल से जोड़ने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
शिक्षकों के आइडिया से तलाशे जाएंगे जमीनी समाधान
सरकार का फोकस केवल प्रतियोगिता में पुरस्कार देने तक सीमित नहीं, बल्कि कॉलेजों में तैयार हो रही तकनीकी प्रतिभा को जमीन पर उतारने पर है। प्रतियोगिता में पानी संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, स्मार्ट कृषि, ग्रामीण विद्युतीकरण, ट्रैफिक प्रबंधन और ग्रामीण स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। नई तकनीक, इनोवेटिव टीचिंग टूल्स, डेमो मॉडल, प्रोटोटाइप और अलग-अलग विषयों को जोड़कर तैयार किए गए समाधान भी इसमें शामिल किए जा सकेंगे। इन परियोजनाओं का संबंध राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, आत्मनिर्भर भारत, स्किल इंडिया और उत्तर प्रदेश की विकास प्राथमिकताओं से भी जोड़ा जाएगा। इससे शिक्षकों के शोध और प्रयोग को स्थानीय जरूरतों से जोड़ने की कोशिश होगी।
लैब से उद्योग तक पहुंचेगा उपयोगी नवाचार
सरकार की योजना सफल मॉडलों को केवल पुरस्कार देकर छोड़ने की नहीं है। राज्य स्तर पर चुने गए करीब 15 से 20 श्रेष्ठ मॉडल और प्रयोगों को दस्तावेज के रूप में तैयार कर डीटीई और बीटीईयूपी पोर्टल पर Open Educational Resources के तौर पर साझा किया जाएगा। जिन नवाचारों में व्यावसायिक क्षमता होगी, उन्हें पेटेंट कराने में सहायता देने की भी व्यवस्था होगी। ऐसे नवाचारों से होने वाले व्यावसायिक लाभ में संबंधित शिक्षक या संस्थान की हिस्सेदारी का प्रावधान भी रखा गया है। इससे शिक्षकों को नए प्रयोग करने और उन्हें वास्तविक उत्पाद या समाधान में बदलने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
हर संस्थान से अधिकतम पांच मॉडल भेजे जाएंगे
प्रतियोगिता में बीटीईयूपी से संबद्ध पॉलीटेक्निक और एकेटीयू से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों के नियमित और संविदा शिक्षक भाग ले सकेंगे। शिक्षक व्यक्तिगत रूप से या अधिकतम तीन सदस्यों की टीम बनाकर अपना मॉडल प्रस्तुत कर सकेंगे। हर संस्थान अधिकतम पांच मॉडल भेज सकेगा। इसके लिए प्राचार्य की अध्यक्षता में बनी स्क्रीनिंग कमेटी पहले संस्थान स्तर पर मॉडलों का चयन करेगी। आवेदन URISE के माध्यम से होंगे। परियोजना के साथ चार से छह पेज का विवरण, चार से आठ स्पष्ट तस्वीरें और दो से पांच मिनट का वीडियो भी देना होगा।
100 अंकों पर होगा नवाचार का मूल्यांकन
मॉडलों के मूल्यांकन में सबसे अधिक महत्व मौलिकता और नवाचार को दिया जाएगा। इसके लिए 25 अंक निर्धारित हैं। तकनीकी शुद्धता और व्यावहारिकता के 20, वास्तविक जीवन में उपयोगिता के 20, लागत प्रभावशीलता और विस्तार की संभावना के 15 अंक होंगे। प्रस्तुतीकरण और प्रयोगशाला उपयोग व उत्पादन क्षमता के लिए 10-10 अंक निर्धारित किए गए हैं।
नवंबर में मिलेंगे पुरस्कार, पहला पुरस्कार एक लाख
योजना के अनुसार 15 सितंबर से प्रतियोगिता के लिए आमंत्रण जारी किए जाएंगे और 20 सितंबर तक पंजीकरण होगा। पांच अक्टूबर को कॉन्सेप्ट प्रेजेंटेशन, 20 अक्टूबर तक अंतिम मॉडल, वीडियो और फोटो जमा होंगे। 31 अक्टूबर को स्क्रीनिंग के बाद नवंबर के पहले सप्ताह में राज्यस्तरीय मूल्यांकन और प्रदर्शनी प्रस्तावित है। पहले स्थान पर एक लाख रुपये, दूसरे पर 75 हजार और तीसरे स्थान पर 50 हजार रुपये का पुरस्कार मिलेगा। पांच प्रतिभागियों को 25-25 हजार रुपये के सांत्वना पुरस्कार के साथ प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। इसके अलावा बेहतर संस्थागत भागीदारी के लिए अलग पुरस्कार भी रखा गया है।


