- वैश्विक अनिश्चितताओं, तेल कीमतों के झटकों और सप्लाई चेन संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर प्रधानमंत्री ने जताया भरोसा
भारत 19
नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा आंकड़ों के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल कीमतों के झटकों, सप्लाई चेन में व्यवधान और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मोदी ने इस प्रदर्शन को देश की सामूहिक शक्ति और अर्थव्यवस्था के लचीलेपन का संकेत बताया है।
अनुमान से बेहतर रही पहली तिमाही की GDP
NSO के आंकड़ों के मुताबिक पहली तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि बाजार के ज्यादातर अनुमानों और भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान से बेहतर रही। हालांकि जनवरी-मार्च तिमाही की संशोधित वृद्धि के मुकाबले अप्रैल-जून में रफ्तार कुछ कम हुई है। इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों के बीच आर्थिक वृद्धि को मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। पहली तिमाही के आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
पीएम मोदी ने बताया ‘हर्क्यूलियन फीट’
GDP आंकड़े जारी होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया जारी की। पीएम मोदी ने पहली तिमाही की आर्थिक वृद्धि को “हर्क्यूलियन फीट” यानी बेहद बड़ी उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल कीमतों के झटकों, सप्लाई चेन में व्यवधान और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी देश ने मजबूत विकास प्रदर्शन किया है। उन्होंने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और देश की सामूहिक शक्ति का संकेत बताया।

विनिर्माण और निवेश ने दिया बड़ा सहारा
पहली तिमाही में विनिर्माण और निवेश गतिविधियां अर्थव्यवस्था के प्रमुख सहारों में रहीं। उत्पादन गतिविधियों में मजबूती और पूंजीगत निवेश में तेजी को आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि निवेश की गति आगे भी बनी रहती है तो इससे औद्योगिक गतिविधियों, उत्पादन क्षमता और निजी क्षेत्र के पूंजीगत खर्च को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। इसका असर रोजगार और कारोबारी गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
सेवाओं ने भी दिखाई मजबूती
आर्थिक गतिविधियों में सेवा क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं में गतिविधियां मजबूत बनी रहीं। सेवा क्षेत्र में मजबूती भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध शहरी आय, रोजगार और कारोबारी गतिविधियों से है। सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूती घरेलू अर्थव्यवस्था को वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव के बीच सहारा दे सकती है।
घरेलू मांग बनी अर्थव्यवस्था की ताकत
वैश्विक स्तर पर व्यापार और मांग से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच घरेलू खपत भारतीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण ताकत बनी हुई है। मजबूत घरेलू मांग बाहरी आर्थिक झटकों के असर को कम करने में मदद करती है। आने वाले महीनों में उपभोक्ता मांग, निजी निवेश और सरकारी पूंजीगत खर्च की गति अर्थव्यवस्था की विकास दर के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
वैश्विक झटकों के बीच बनी विकास की रफ्तार
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने ऐसे समय में आर्थिक मजबूती दिखाई है, जब दुनिया ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन में व्यवधान और लगातार बदलती वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित है। उनके मुताबिक इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन देश की आर्थिक क्षमता और घरेलू आधार की मजबूती को दर्शाता है।
आगे भी बनी रहनी चाहिए विकास की रफ्तार
पहली तिमाही के आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत दिया है, लेकिन पूरे वित्त वर्ष की तस्वीर आने वाली तिमाहियों में स्पष्ट होगी। आगे वैश्विक ऊर्जा कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव, निर्यात, निजी निवेश और घरेलू खपत विकास की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। वैश्विक परिस्थितियां प्रतिकूल रहने की स्थिति में इनका असर भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पड़ सकता है।
सरकार के लिए भी आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक संकेत
मजबूत आर्थिक गतिविधियां सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। विनिर्माण, निवेश और सेवा क्षेत्र में मजबूती से उत्पादन, कारोबार और रोजगार की संभावनाओं को बल मिल सकता है। पहली तिमाही के आर्थिक प्रदर्शन ने सरकार की विकास-केंद्रित नीतियों के लिए भी सकारात्मक संकेत दिया है। हालांकि आने वाली तिमाहियों में विकास की निरंतरता यह तय करेगी कि मौजूदा रफ्तार कितनी टिकाऊ साबित होती है।
पीएम मोदी ने आर्थिक मजबूती रेखांकित की
PMO के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक वृद्धि को तेल कीमतों के झटकों, सप्लाई चेन बाधाओं और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की सामूहिक ताकत और लचीलेपन का परिणाम बताया। फिलहाल NSO के आंकड़ों और प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया ने आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक तस्वीर पेश की है। अब निगाहें आने वाली तिमाहियों पर रहेंगी कि क्या घरेलू मांग, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों की मौजूदा मजबूती आगे भी कायम रहती है।

