- डोकलाम और गलवान के दौरान PLA की वेस्टर्न थिएटर कमांड संभालने वाले झाओ जोंगकी को CPPCC से हटाया गया, कार्रवाई की वजह पर बीजिंग खामोश
भारत 19 डेस्क
भारत और चीन के बीच डोकलाम से गलवान तक चले सैन्य तनाव के दौरान अहम कमान संभालने वाले चीनी जनरल झाओ जोंगकी पर बीजिंग ने बड़ी कार्रवाई की है। चीन की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (CPPCC) की स्थायी समिति ने उन्हें सदस्यता से हटा दिया है। उन्हें जातीय एवं धार्मिक मामलों से जुड़ी समिति के उपाध्यक्ष पद से भी मुक्त कर दिया गया। हालांकि, चीन ने कार्रवाई की वजह नहीं बताई है और उनके खिलाफ किसी जांच की घोषणा भी नहीं की है।
डोकलाम से गलवान तक अहम भूमिका
झाओ जोंगकी चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड के पहले कमांडर रहे थे। इस कमांड के जिम्मे तिब्बत, शिनजियांग और भारत से लगी सीमा के बड़े हिस्से की सैन्य गतिविधियां हैं। 2017 में भारत-चीन के बीच डोकलाम गतिरोध के दौरान झाओ इसी कमांड के प्रमुख थे। 2020 में पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ने और गलवान घाटी में हिंसक झड़प के समय भी वह इसी पद पर थे। गलवान में 20 भारतीय सैनिक बलिदान हुए थे, जबकि चीन ने अपने चार सैनिकों की मौत की पुष्टि की थी। झाओ दिसंबर 2020 तक वेस्टर्न थिएटर कमांड के प्रमुख रहे। इसके बाद उनकी जगह नया कमांडर नियुक्त हुआ। उस समय उनका हटना सेवानिवृत्ति आयु पूरी होने से भी जोड़ा गया था।
छह साल बाद फिर कार्रवाई की जद में
गलवान संघर्ष के करीब छह साल बाद झाओ को अब चीन की राजनीतिक सलाहकार संस्था से भी बाहर कर दिया गया है। मौजूदा कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह लंबे समय से सक्रिय सैन्य कमान में नहीं थे, बल्कि राजनीतिक संस्था से जुड़े पद पर थे। झाओ को हटाए जाने का फैसला ऐसे समय आया है जब चीन की सेना के शीर्ष नेतृत्व में भी बड़े बदलाव हो रहे हैं।
जिनपिंग के सैन्य फेरबदल के बीच फैसला
झाओ की कार्रवाई से पहले चीन ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों झांग यूशिया और लियू झेनली को केंद्रीय सैन्य आयोग से हटा दिया था। दोनों के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक और कानूनी उल्लंघनों की जांच की बात सामने आई है। इसी पृष्ठभूमि में झाओ को CPPCC से हटाए जाने को चीन की सेना में चल रहे व्यापक फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, झाओ की कार्रवाई को इन मामलों से सीधे जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कार्रवाई की वजह पर बीजिंग खामोश
बीजिंग ने झाओ जोंगकी को हटाने का कोई कारण सार्वजनिक नहीं किया है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता या किसी विशेष मामले की जांच का भी उल्लेख नहीं है। इसलिए उन्हें किसी खास आरोप या जांच का नतीजा बताना फिलहाल सही नहीं होगा। चीन की ओर से आगे कोई स्पष्टीकरण आने पर ही कार्रवाई की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
गलवान ऑपरेशन में भूमिका को लेकर दावा
गलवान संघर्ष के बाद झाओ का नाम कुछ अमेरिकी आकलनों और मीडिया रिपोर्टों में भी सामने आया था। इनमें दावा किया गया था कि उन्होंने 2020 के गलवान ऑपरेशन को मंजूरी दी थी। हालांकि, चीन ने उनकी ऐसी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए झाओ को गलवान ऑपरेशन का आदेश देने वाला बताने के बजाय तथ्यात्मक रूप से यही कहा जा सकता है कि गलवान झड़प के समय PLA की वेस्टर्न थिएटर कमांड उनके नेतृत्व में थी।
भारत-चीन रिश्तों के बीच कार्रवाई अहम
झाओ के खिलाफ कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन सीमा पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अगस्त में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच सीमा विवाद और रिश्तों को लेकर बातचीत भी हुई है। ऐसे दौर में डोकलाम और गलवान के समय भारत से लगी सीमा की कमान संभाल चुके जनरल को चीन की शीर्ष राजनीतिक संस्था से हटाया जाना महत्वपूर्ण है। झाओ जोंगकी की कार्रवाई का वास्तविक कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन उनका मामला ऐसे समय सामने आया है जब चीन की सेना के शीर्ष स्तर पर लगातार बदलाव हो रहे हैं।


