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कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट, आठ की मौत

  • मनौरी के महमदपुर में भीषण धमाके से फैक्ट्री जमींदोज, 25 से ज्यादा घायल; कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका, एयरफोर्स समेत बचाव दल मौके पर

भारत 19

प्रयागराज। कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में सोमवार दोपहर हुए भीषण ब्लास्ट ने मनौरी क्षेत्र को दहला दिया। महमदपुर गांव में हुए धमाके में कम से कम आठ लोगों की मौत और 25 से ज्यादा लोगों के घायल होने की सूचना है। विस्फोट इतना तेज था कि पटाखा निर्माण इकाई पूरी तरह ध्वस्त हो गई और आसपास के कई मकानों को भी नुकसान पहुंचा। मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका के बीच पुलिस, फायर ब्रिगेड, प्रशासन और वायुसेना की टीमें रेस्क्यू में जुटी हैं।

लगातार धमाकों से दहला मनौरी इलाका

हादसा सोमवार दोपहर करीब 12 बजे पिपरी थाना क्षेत्र के मनौरी पावर हाउस के पास महमदपुर गांव में हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक एक मकान में पटाखा निर्माण का काम चल रहा था। अचानक आग लगने के बाद वहां रखी पटाखा सामग्री में लगातार धमाके होने लगे। धमाकों की आवाज आसपास के कई इलाकों में सुनाई दी। घटनास्थल से धुएं का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया और आसपास के लोगों में अफरातफरी मच गई। विस्फोट की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि निर्माण इकाई का ढांचा मलबे में बदल गया।

कई मकान क्षतिग्रस्त, मलबे में तलाश जारी

पटाखा फैक्ट्री के आसपास के कई मकानों को भी धमाके से नुकसान पहुंचा है। कुछ मकानों के हिस्से ढह गए। घटनास्थल पर बड़े पैमाने पर मलबा जमा होने के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बचाव दल अर्थमूवर और अन्य भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन को आशंका है कि हादसे के समय फैक्ट्री या आसपास के मकानों में मौजूद कुछ लोग मलबे में दबे हो सकते हैं।

25 से ज्यादा घायल, कई अस्पताल में भर्ती

विस्फोट में 25 से ज्यादा लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों को कौशांबी के अलावा प्रयागराज के अस्पतालों में भेजा गया है। गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए एसआरएन अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है। हादसे के बाद अस्पतालों को भी अलर्ट किया गया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ घायलों और मृतकों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

एयरफोर्स की टीम भी रेस्क्यू में जुटी

घटनास्थल मनौरी एयरफोर्स स्टेशन से करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दूर बताया गया है। हादसे के बाद वायुसेना की टीम भी राहत और बचाव अभियान में शामिल हुई। कौशांबी और प्रयागराज की पुलिस, फायर ब्रिगेड, प्रशासनिक अधिकारी और बचाव दल मौके पर मौजूद हैं। प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को निकालने और घटनास्थल को सुरक्षित बनाने की है।

पटाखा निर्माण इकाई में कितने लोग थे

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसे के समय पटाखा निर्माण इकाई में कई मजदूर मौजूद थे। हालांकि फैक्ट्री में उस समय कुल कितने लोग काम कर रहे थे, इसकी अंतिम आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। मलबा हटने और कर्मचारियों की सूची का सत्यापन होने के बाद ही हादसे में प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।

मृतकों की संख्या को लेकर बदला आंकड़ा

हादसे के तुरंत बाद शुरुआती रिपोर्टों में तीन मौतों की सूचना आई। इसके बाद कौशांबी के सीओ शिवांक सिंह ने पांच शव बरामद होने की जानकारी दी। बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या आठ तक पहुंचने की बात सामने आई है। इसलिए फिलहाल कम से कम आठ मौतों का आंकड़ा सामने रखा जा रहा है। रेस्क्यू अभियान पूरा होने और प्रशासन की अंतिम पुष्टि के बाद मृतकों की वास्तविक संख्या स्पष्ट होगी।

फैक्ट्री के लाइसेंस पर भी जांच

घटना के बाद पटाखा निर्माण और भंडारण के लिए जरूरी लाइसेंस और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठे हैं। जिस भवन में पटाखा निर्माण की बात सामने आई है, वह खेतों और आबादी के बीच स्थित बताया जा रहा है। प्रशासन अब यह जांच करेगा कि इकाई के पास पटाखा निर्माण और विस्फोटक सामग्री रखने की वैध अनुमति थी या नहीं। इसके साथ ही अग्निशमन व्यवस्था, विस्फोटक सामग्री के सुरक्षित भंडारण, कामगारों की सुरक्षा और अन्य निर्धारित मानकों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच होगी।

विस्फोट की वजह अभी साफ नहीं

फिलहाल विस्फोट के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती जानकारी में आग लगने के बाद पटाखों में एक के बाद एक धमाके होने की बात सामने आई है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि आग कैसे लगी और क्या निर्माण इकाई में पटाखा सामग्री की मात्रा, भंडारण या निर्माण प्रक्रिया में कोई लापरवाही हुई थी। किसी विशेष व्यक्ति या नियम उल्लंघन को हादसे का कारण बताना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने लिया हादसे का संज्ञान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कौशांबी में हुए हादसे का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान तेज करने तथा घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन का पूरा ध्यान फिलहाल मलबे में दबे लोगों को निकालने और घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर है।

पटाखा सुरक्षा पर फिर खड़े हुए सवाल

महमदपुर हादसे ने एक बार फिर पटाखा निर्माण और भंडारण की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पटाखों में इस्तेमाल होने वाली ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री के कारण निर्माण इकाइयों में छोटी सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि महमदपुर की पटाखा फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों का कितना पालन हो रहा था और आखिर किस वजह से आग ने इतने बड़े विस्फोट का रूप ले लिया।

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