- विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए RBI ने बैंकों को दी थी विशेष सुविधा, FCNR(B) खातों के जरिए विदेश में बसे भारतीयों से डॉलर जुटाने पर बैंकों का जोर; योजना का असर फॉरेक्स मार्केट पर भी
भारत 19
नई दिल्ली। विदेश में रहने वाले भारतीयों की विदेशी मुद्रा जमा इस साल भारत के विदेशी मुद्रा बाजार के लिए महत्वपूर्ण स्रोत बनकर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष सुविधा के बाद बैंकों ने FCNR(B) खातों के जरिए NRI से विदेशी मुद्रा जुटाने पर जोर दिया। इससे बैंकिंग प्रणाली में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ी और RBI की डॉलर जुटाने की रणनीति को मजबूती मिली।
RBI ने जून में बैंकों के लिए विशेष USD-INR Forex Swap Facility शुरू की थी। इसके तहत बैंकों को विदेश से जुटाई गई विदेशी मुद्रा को केंद्रीय बैंक के साथ स्वैप करने की सुविधा दी गई। इसका उद्देश्य बैंकों की विदेशी मुद्रा उपलब्धता बढ़ाने के साथ बाजार में डॉलर की तरलता मजबूत करना था।
NRI के लिए क्या है FCNR(B) खाता
FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) ऐसा खाता है, जिसमें विदेश में रहने वाले भारतीय विदेशी मुद्रा में रकम जमा कर सकते हैं। इस खाते में डॉलर, पाउंड और यूरो जैसी मुद्राओं में जमा की सुविधा होती है। RBI की विशेष सुविधा के बाद बैंकों ने इस माध्यम से विदेशी मुद्रा जुटाने पर ध्यान बढ़ाया। इससे विदेश में रहने वाले भारतीयों की जमा राशि बैंकिंग प्रणाली के लिए विदेशी मुद्रा का महत्वपूर्ण स्रोत बनी।
RBI ने बैंकों को क्यों दी थी यह सुविधा
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग और रुपये पर दबाव के बीच RBI ने बैंकों के लिए यह विशेष व्यवस्था की थी। बैंक विदेश से विदेशी मुद्रा जुटाकर उसे RBI के साथ स्वैप कर सकते थे। इससे बैंकों को विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराने के साथ बाजार में डॉलर की तरलता बनाए रखने में मदद मिलती है। इस व्यवस्था में NRI जमा के साथ विदेश से जुटाए जाने वाले अन्य विदेशी मुद्रा स्रोतों को भी शामिल किया गया था। हालांकि विदेशी मुद्रा जुटाने में NRI से आने वाली FCNR(B) जमा सबसे प्रमुख माध्यम बनी।
वीजा प्रतिबंधों से जुड़ा नहीं है आवक का आंकड़ा
विदेशी मुद्रा की इस बढ़ी आवक को लेकर यह सवाल भी उठता है कि क्या विदेशों में वीजा संबंधी सख्ती या भारत लौटने की तैयारी कर रहे NRI ने अपना पैसा भारत भेजा है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में इस आवक को ऐसी किसी वजह से नहीं जोड़ा गया है। RBI की ओर से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए दी गई विशेष सुविधा और बैंकों की ओर से FCNR(B) जमा जुटाने को ही इस अवधि में विदेशी मुद्रा आवक का प्रमुख संस्थागत आधार बताया गया है।
बैंकों के लिए भी विदेशी मुद्रा जुटाने का मौका
विशेष स्वैप सुविधा ने बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया। विदेश में रहने वाले भारतीयों की विदेशी मुद्रा जमा को आकर्षित कर बैंक अपनी विदेशी मुद्रा स्थिति मजबूत कर सके और जुटाई गई मुद्रा को RBI के साथ स्वैप कर सके। इस व्यवस्था से एक तरफ NRI की विदेशी मुद्रा भारतीय बैंकिंग प्रणाली में आई, वहीं दूसरी तरफ RBI को विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता प्रबंधन के लिए अतिरिक्त साधन मिला।
फॉरेक्स रिजर्व बढ़ने में भी मिला सहारा
NRI जमा के जरिए आई विदेशी मुद्रा ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में भी योगदान दिया। हालांकि रिजर्व में बदलाव केवल एक स्रोत पर निर्भर नहीं होता। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों, सोने के मूल्य, बाजार में केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप और अन्य अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का भी इसमें असर पड़ता है। ऐसे में इस बार की बढ़ोतरी में RBI की विशेष सुविधा के तहत जुटाई गई विदेशी मुद्रा और उसमें FCNR(B) जमा की बड़ी भूमिका महत्वपूर्ण आर्थिक संकेत के तौर पर सामने आई है।


