- फर्रुखाबाद की छोटी दुकान से निकला खिलाड़ी, रुड़की में राष्ट्रीय पैरा पावर लिफ्टिंग चैंपियन बना
भारत 19
कानपुर। कभी पिता की छोटी सी फुटवियर की दुकान पर बैठने वाले सैयद मेंहदी हैदर के हाथों में आज राष्ट्रीय चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक है। हालात ऐसे नहीं थे कि खेल पर पूरा ध्यान दिया जा सके, लेकिन मैदान से उनका रिश्ता इतना मजबूत था कि दुकान और जिम्मेदारियों के बीच से भी उन्होंने अभ्यास का समय निकाल लिया। संघर्ष के इसी सफर ने फर्रुखाबाद के इस खिलाड़ी को राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियन बना दिया।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर हैदर की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी के स्वर्ण पदक तक पहुंचने की कहानी नहीं है। यह उन हालातों से लड़ने की कहानी है, जहां सीमित संसाधन थे, पारिवारिक जिम्मेदारियां थीं, लेकिन सपने बड़े थे। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में एमए योग के छात्र हैदर ने आखिरकार मेहनत और हौसले के दम पर राष्ट्रीय मंच पर अपनी ताकत का लोहा मनवाया।
दुकान के बाद मैदान, यही बन गई हैदर की दिनचर्या
हैदर के पिता फुटवियर की छोटी सी दुकान चलाते हैं। बचपन से ही हैदर भी पिता के साथ दुकान पर बैठते रहे। लेकिन दुकान से बाहर निकलते ही उनका मन खेल के मैदान की ओर दौड़ पड़ता था। जो समय जिम्मेदारियों से बचता, वह अभ्यास को देते। धीरे-धीरे खेल सिर्फ शौक नहीं रहा, बल्कि जिंदगी का लक्ष्य बन गया। स्टेडियम में अभ्यास के दौरान विशेषज्ञों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। नियमित ट्रेनिंग और लगातार मेहनत ने उनके खेल को नई दिशा दी। सीएसजेएमयू में योग विषय में प्रवेश के बाद शारीरिक शिक्षा विभाग के पावर लिफ्टिंग कोच सर्वेंद्र कुमार सिंह की नजर उनकी लगन पर पड़ी। यहीं से हैदर के प्रशिक्षण को नई गति मिली और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की राह तैयार होने लगी।
65 किलो वर्ग में उतरे, राष्ट्रीय स्वर्ण जीतकर लौटे
वर्ष 2026 हैदर के खेल जीवन का सबसे यादगार साल बन गया। उनका चयन राष्ट्रीय पैरा पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप के लिए हुआ। उत्तराखंड के रुड़की में देशभर के खिलाड़ियों के बीच अब उन्हें अपनी ताकत साबित करनी थी। पैरा पावरलिफ्टिंग में कदम रखे ज्यादा समय नहीं हुआ था, लेकिन हौसला किसी अनुभवी खिलाड़ी से कम नहीं था। 65 किलोग्राम जूनियर पुरुष वर्ग में हैदर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चैंपियनशिप अपने नाम कर ली और स्वर्ण पदक जीत लिया। उन्होंने 100 किलोग्राम का बेंच प्रेस उठाकर भी अपनी क्षमता का परिचय दिया। राष्ट्रीय मंच पर मिली यह जीत उनके अब तक के खेल सफर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई।

वेटलिफ्टिंग से शुरू हुआ था पदक जीतने का सिलसिला
हैदर के लिए खेल की राह वर्ष 2019 में खुली, जब उन्होंने वेटलिफ्टिंग के साथ प्रतिस्पर्धी खेलों की दुनिया में कदम रखा। बनारस में आयोजित उत्तर प्रदेश राज्य वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप उनकी पहली बड़ी प्रतियोगिता थी। शुरुआत आसान नहीं थी। मैदान में उतरना एक बात थी, लेकिन अपनी पहचान बनाना दूसरी। हैदर ने इस चुनौती का जवाब अभ्यास से दिया। वर्ष 2020 में सहारनपुर में आयोजित स्कूल गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीत लिया। यह उनके खेल जीवन का पहला बड़ा पदक था। इसके बाद उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एसएआई) के काशीपुर केंद्र में वेटलिफ्टिंग का ट्रायल दिया और वर्ष 2022 में उनका चयन एसएआई काशीपुर के लिए हो गया। इस दौरान उन्होंने आगरा में आयोजित उत्तर प्रदेश राज्य चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया और लगातार अपने प्रदर्शन को बेहतर करते रहे।
बरेली में बदला खेल, पहले मुकाबले में जीता सोना
वर्ष 2025 हैदर के करियर का टर्निंग प्वाइंट बन गया। इसी साल उन्होंने वेटलिफ्टिंग से आगे बढ़कर पैरा पावरलिफ्टिंग में अपनी नई चुनौती तलाश ली। बरेली में आयोजित उत्तर प्रदेश राज्य पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप उनके लिए इस खेल की पहली बड़ी परीक्षा थी। पहली ही प्रतियोगिता में उन्होंने अपने वर्ग में पहला स्थान हासिल करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। यहीं से राष्ट्रीय मंच का टिकट मिला। राज्य स्तर पर मिली सफलता के बाद रुड़की की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हैदर ने एक बार फिर स्वर्ण पदक जीतकर साबित कर दिया कि बरेली की जीत कोई संयोग नहीं थी।
अब राष्ट्रीय मंच के बाद नजर अंतरराष्ट्रीय पदक पर
राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद हैदर को सीएसजेएमयू में स्पोर्ट्स कोटा के तहत प्रवेश मिला। लेकिन उनके सपनों की मंजिल अभी राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं है। फर्रुखाबाद की एक छोटी सी दुकान से शुरू हुआ यह सफर अब अंतरराष्ट्रीय मंच की ओर बढ़ रहा है। हैदर की ख्वाहिश भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने की है।
