- जिलों से वंचित और जरूरतमंद परिवारों की सूची मांगी गई, विधवा, दिव्यांग और आपदा पीड़ितों को आवास आवंटन में प्राथमिकता
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण गरीबों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 1.16 लाख नए पक्के मकान बनाने की तैयारी के साथ लाभार्थियों की पहचान की प्रक्रिया तेज की जाएगी। सरकार ने जिलों को साफ संदेश दिया है कि आवास का लाभ केवल सूची पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि उन परिवारों तक पहुंचे जो वास्तव में कच्चे या असुरक्षित मकानों में रहने को मजबूर हैं।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम विकास विभाग को सभी जिलों में पात्र परिवारों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर असहाय विधवा महिलाएं, दिव्यांगजन, दैवीय आपदा से प्रभावित परिवार, गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग, अनुसूचित जाति-जनजाति और दूसरे वंचित परिवार प्राथमिकता में रहेंगे। नई कार्ययोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल मकान स्वीकृत करना नहीं, बल्कि सही लाभार्थी तक पहुंचना है। इसी वजह से अधिकारियों को गांव स्तर पर जरूरतमंद परिवारों की पहचान करने और जिलावार सूची संकलित करने को कहा गया है। चयन प्रक्रिया में लापरवाही, अनियमितता या पक्षपात मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
पांच लाख परिवारों के बाद नए लक्ष्य पर नजर
मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में अब तक करीब पांच लाख परिवारों को पक्का आवास मिलने का दावा किया गया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के लिए तैयार 1.16 लाख नए मकानों की कार्ययोजना के साथ सरकार का अगला फोकस उन परिवारों पर है जो किसी कारण अब तक आवास योजना के दायरे में नहीं आ सके। सरकार की नई प्राथमिकता सूची भी इस बार की कवायद का संकेत देती है। विधवा, दिव्यांग और आपदा प्रभावित परिवारों को अलग से प्राथमिकता देने के निर्देश से माना जा रहा है कि लाभार्थी चयन में सिर्फ आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि परिवार की सामाजिक और मानवीय परिस्थितियों को भी आधार बनाया जाएगा।
गांव में होगी वास्तविक जरूरतमंदों की पहचान
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों से गांव-गांव जाकर वास्तविक पात्र परिवारों का चिन्हांकन करने को कहा है। इसका मतलब है कि लाभार्थी चयन केवल पुराने आंकड़ों और उपलब्ध सूचियों पर निर्भर नहीं रहेगा। अधिकारियों को विशेष रूप से उन परिवारों की स्थिति देखने के निर्देश दिए गए हैं, जो गंभीर बीमारी, दिव्यांगता या प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों के कारण आवास की जरूरत रखते हैं। जिलों से सूची मिलने के बाद पात्रता के आधार पर आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मकान स्वीकृत करने के साथ निर्माण पूरा कराना चुनौती
सरकारी आवास योजनाओं में अक्सर स्वीकृति के बाद निर्माण की गुणवत्ता और समय पर मकान पूरा होने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। नई कार्ययोजना के साथ उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्धता पर भी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्तर पर आने वाली अड़चन को लंबित रखने के बजाय उसका तत्काल समाधान किया जाए। यानी विभाग के सामने केवल 1.16 लाख मकानों का लक्ष्य पूरा करना ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी चुनौती होगी कि स्वीकृत आवास अधूरे न छूटें और वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचें।
अब जिलों की सूची से आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
फिलहाल सरकार ने जिलों को पात्र और जरूरतमंद परिवारों की सूची संकलित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद आवास आवंटन की प्रक्रिया में यह देखना अहम होगा कि प्राथमिकता श्रेणी के कितने परिवारों को योजना का लाभ मिलता है और 1.16 लाख नए ग्रामीण आवासों की कार्ययोजना कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है।
