- कानपुर में कथित फर्जीवाड़े के बाद चर्चा में आई स्क्राइब व्यवस्था; जानिए कौन ले सकता है मदद, क्या हैं नियम और गलत जानकारी पर क्या हो सकती है कार्रवाई
Bharat 19/ कानपुर। IBPS परीक्षा के दौरान कथित नकल कराने वाले नेटवर्क के खुलासे के बाद स्क्राइब सिस्टम चर्चा में है। STF के अनुसार, मामले में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए बनी इस सुविधा के कथित दुरुपयोग का आरोप है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर स्क्राइब होता कौन है, IBPS परीक्षा में यह सुविधा किसे मिलती है और स्क्राइब के लिए क्या नियम तय हैं। IBPS की मौजूदा भर्ती प्रक्रियाओं में स्क्राइब से जुड़े अलग दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। 20 अगस्त 2026 को IBPS की स्पेशलिस्ट ऑफिसर (विशेषज्ञ अधिकारी) भर्ती प्रक्रिया के लिए भी स्क्राइब गाइडलाइंस और स्क्राइब डिक्लेरेशन फॉर्म जारी किया गया था।
स्क्राइब यानी लेखक सहायक। यह वह व्यक्ति होता है, जो ऐसे पात्र दिव्यांग अभ्यर्थी की परीक्षा देने में सहायता करता है जिसे अपनी शारीरिक स्थिति के कारण लिखने या टाइप करने में कठिनाई होती है। स्क्राइब का मतलब यह नहीं कि दूसरा व्यक्ति अभ्यर्थी की जगह परीक्षा हल करेगा। उसका काम पात्र अभ्यर्थी की जरूरत के अनुसार उत्तर लिखने या टाइप करने में सहायता देना होता है। सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के दिशानिर्देशों में स्क्राइब और अतिरिक्त समय को परीक्षा में उचित सुविधा के रूप में मान्यता दी गई है।
किसे मिल सकती है स्क्राइब की सुविधा?
स्क्राइब की सुविधा हर दिव्यांग अभ्यर्थी को स्वतः नहीं मिलती। सामान्य सिद्धांत यह है कि सुविधा उन अभ्यर्थियों के लिए है जिन्हें दिव्यांगता के कारण लिखने या टाइप करने में वास्तविक शारीरिक कठिनाई हो। IBPS से जुड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार, कुछ पात्र दिव्यांग श्रेणियों में अभ्यर्थी अपनी आवश्यकता के आधार पर स्क्राइब सुविधा ले सकते हैं। अन्य मामलों में लिखने की शारीरिक सीमा और स्क्राइब की आवश्यकता का सक्षम सरकारी चिकित्सा प्राधिकारी से प्रमाणपत्र जरूरी हो सकता है। केंद्र सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ परिस्थितियों में 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले व्यक्ति भी, यदि उन्हें लिखने में वास्तविक कठिनाई है और निर्धारित चिकित्सा प्रमाणन उपलब्ध है, स्क्राइब या सहायता सुविधा के पात्र हो सकते हैं।
क्या अभ्यर्थी अपना स्क्राइब खुद चुन सकता है?
IBPS की गाइडलाइन के अनुसार पात्र अभ्यर्थी अपना स्क्राइब स्वयं तय कर सकता है। लेकिन इसके लिए शर्तें हैं। स्क्राइब की शैक्षणिक योग्यता सामान्यतः परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी की योग्यता से एक स्तर नीचे होनी चाहिए। साथ ही उम्मीदवार और स्क्राइब को निर्धारित पात्रता संबंधी घोषणा या अंडरटेकिंग देनी होती है। स्क्राइब उसी परीक्षा में अभ्यर्थी के रूप में शामिल नहीं हो सकता। एक व्यक्ति एक ही परीक्षा में एक से अधिक उम्मीदवारों के लिए स्क्राइब की भूमिका भी नहीं निभा सकता।
स्क्राइब को कितना अतिरिक्त समय मिलता है?
पात्र अभ्यर्थियों को स्क्राइब सुविधा के साथ प्रति घंटे 20 मिनट तक प्रतिपूरक समय मिल सकता है, हालांकि अंतिम व्यवस्था संबंधित परीक्षा की अधिसूचना और निर्देशों पर निर्भर करती है। IBPS की भर्ती अधिसूचनाओं और स्क्राइब गाइडलाइंस में इस प्रावधान का उल्लेख है। यानी स्क्राइब सुविधा केवल किसी दूसरे व्यक्ति को साथ बैठाने की व्यवस्था नहीं है। यह परीक्षा प्रक्रिया का एक नियंत्रित प्रावधान है, जिसमें पात्रता, दस्तावेज और घोषणा जैसी शर्तें शामिल होती हैं।
गलत जानकारी देने पर क्या हो सकता है?
यदि अभ्यर्थी या स्क्राइब गलत जानकारी देता है, पात्रता संबंधी तथ्य छिपाता है या बाद में यह सामने आता है कि तय शर्तें पूरी नहीं की गई थीं, तो उम्मीदवार की अभ्यर्थिता रद्द की जा सकती है। IBPS की अधिसूचनाओं में गलत घोषणा या तथ्य छिपाने की स्थिति में उम्मीदवार और स्क्राइब के खिलाफ डिबारमेंट जैसी कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया है। यही वजह है कि कानपुर में सामने आए कथित फर्जीवाड़े का मामला केवल नकल तक सीमित नहीं है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो सवाल यह भी होगा कि दिव्यांगता संबंधी दस्तावेज, स्क्राइब की पात्रता और परीक्षा केंद्र तक उसकी एंट्री की प्रक्रिया में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई।
कानपुर मामले ने क्यों बढ़ाई चिंता?
स्क्राइब व्यवस्था वास्तविक जरूरतमंद दिव्यांग अभ्यर्थियों को बराबरी का अवसर देने के लिए है। इसलिए कथित फर्जीवाड़े के किसी मामले के बाद इस सुविधा को सीमित करना समाधान नहीं हो सकता। चुनौती यह है कि वास्तविक अभ्यर्थी को उसका अधिकार मिले और फर्जी दस्तावेज या गलत पहचान के जरिए कोई व्यक्ति परीक्षा व्यवस्था का दुरुपयोग न कर सके। IBPS ने अपनी 2026 की भर्ती प्रक्रियाओं में भी स्क्राइब के लिए अलग गाइडलाइंस और घोषणा व्यवस्था रखी है, जबकि आवेदन प्रक्रिया में यह सुविधा लेने वाले उम्मीदवारों के दस्तावेज बाद की जांच के अधीन हो सकते हैं।

