- इंडोनेशिया-कजाखस्तान के टिकाऊ प्रबंधन मॉडल होंगे प्रस्तुत, कृषि, जल संरक्षण, भूमि उपयोग व ऊर्जा पर 130 शोध पत्र
कानपुर/ छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में देश-दुनिया में विकसित किए जा रहे सस्टेनेबल मैनेजमेंट (टिकाऊ प्रबंधन) के मॉडल देखने और समझने का अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय में पहली बार आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के साथ श्रीलंका, कजाखस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया के शोधार्थी अपने शोध और उनसे विकसित मॉडलों को प्रस्तुत करेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन में छह देशों के करीब 250 शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। कृषि, जल संरक्षण, भूमि उपयोग, ऊर्जा, पर्यावरण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन समेत विभिन्न क्षेत्रों में किए गए शोध पर चर्चा होगी।
130 शोध पत्र होंगे प्रस्तुत
सीएसजेएमयू के स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट की ओर से अस्ताना इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, कजाखस्तान के सहयोग से शुक्रवार से ‘सस्टेनेबल मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। सम्मेलन में करीब 130 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। शोधार्थी ऐसे प्रबंधन मॉडल और नवाचारों को सामने रखेंगे, जिनका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का सीमित और प्रभावी उपयोग करते हुए विकास को गति देना है। सम्मेलन में खास तौर पर इंडोनेशिया और कजाखस्तान में अपनाए जा रहे टिकाऊ प्रबंधन के मॉडल प्रस्तुत किए जाएंगे। इन मॉडलों के माध्यम से यह समझने का प्रयास होगा कि कृषि, जल, ऊर्जा और भूमि जैसे सीमित संसाधनों का उपयोग किस तरह किया जाए, जिससे वर्तमान जरूरतें पूरी होने के साथ भविष्य के लिए भी संसाधन सुरक्षित रहें।
प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना विकास पर जोर
सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष एवं सीएसजेएमयू स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट के निदेशक प्रो. सुधांशु पांड्या ने बताया कि सस्टेनेबल मैनेजमेंट का मूल उद्देश्य वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना है। इसके तहत ऐसे बिजनेस और प्रबंधन मॉडल विकसित किए जाते हैं, जिनसे पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे और समाज, अर्थव्यवस्था तथा प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन कायम रहे। उन्होंने बताया कि जल, जंगल, भूमि और ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण टिकाऊ प्रबंधन के प्रमुख आधार हैं। इसका उद्देश्य ऐसे प्रबंधन मॉडल तैयार करना है, जिनसे संसाधनों की बर्बादी कम हो, प्रदूषण पर नियंत्रण हो और विकास की प्रक्रिया लंबे समय तक जारी रह सके।
भारतीय छात्रों को मिलेगा विदेशी शोध का अनुभव
सम्मेलन की खासियत यह है कि भारतीय छात्रों और शोधार्थियों को विदेशी विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों के साथ सीधे संवाद और उनके शोध मॉडल को समझने का अवसर मिलेगा। अलग-अलग देशों में संसाधनों के प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे तरीकों की तुलना भी की जाएगी। इससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप टिकाऊ प्रबंधन के नए मॉडल विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। उद्घाटन सत्र में सम्मेलन की सह-समन्वयक अस्ताना इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, कजाखस्तान की प्रो. स्मागुलोवा, संयोजक डॉ. प्रभात द्विवेदी समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद् और शोधार्थी मौजूद रहे।


