पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश से गंगा-यमुना समेत कई प्रमुख नदियों पर दबाव बढ़ गया है। कानपुर, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ने लगा है। बैराजों के गेट खोलकर पानी को नियंत्रित तरीके से आगे छोड़ा जा रहा है। विशेषज्ञों ने अगले 48 से 72 घंटे को बेहद महत्वपूर्ण बताया है।
विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। मानसूनी बारिश भले ही मैदानी इलाकों में अभी सामान्य से कम दर्ज की जा रही हो, लेकिन पहाड़ों पर हो रही लगातार तेज बारिश ने गंगा-यमुना समेत कई प्रमुख नदियों पर दबाव बढ़ा दिया है। हिमालयी क्षेत्रों से आने वाले तेज बहाव के कारण कानपुर, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ने लगा है।
जल विज्ञानी, भू-वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार अगले 48 से 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहा तो मैदानी इलाकों की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं।

यमुना पर भी बढ़ा दबाव
औरैया में यमुना का जलस्तर 102.320 मीटर रिकॉर्ड किया गया है। हालांकि यहां चेतावनी स्तर 112 मीटर और खतरे का स्तर 113 मीटर है। विशेषज्ञों के अनुसार यमुना में आने वाला पानी भी आसपास के इलाकों की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
क्यों बढ़ता है अचानक बाढ़ का खतरा?
- पहाड़ी इलाकों में ढलान अधिक होने के कारण बारिश का पानी तेजी से नीचे की ओर बहता है और कुछ समय में मैदानी नदियों का जलस्तर बढ़ा देता है।
- लगातार बारिश से बांधों और जलाशयों में पानी बढ़ने पर नियंत्रित मात्रा में पानी छोड़ा जाता है, जिससे नदियों में अचानक उफान आ सकता है।
- पहाड़ों से आने वाला पानी अपने साथ मिट्टी, पत्थर और मलबा लेकर आता है। इससे नदी की जलधारण क्षमता प्रभावित होती है और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
अगले 72 घंटे अहम
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रहने पर उसका असर कुछ समय बाद मैदानी नदियों में दिखाई देता है। इसलिए गंगा और यमुना के किनारे बसे जिलों में प्रशासन को लगातार जलस्तर की निगरानी करनी होगी।
पहाड़ों का पानी क्यों बनता मैदान में खतरा?
आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंस विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर राजीव सिन्हा के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति काफी हद तक पहाड़ों में होने वाली बारिश पर निर्भर करती है। उन्होंने बताया कि पहाड़ों से आने वाले पानी के बहाव को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। बैराजों के गेट खोलकर पानी को नियंत्रित तरीके से आगे छोड़ा जाता है, ताकि पीछे पानी का दबाव बढ़कर अचानक तबाही न मचाए। उनके अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का पानी तेजी से नदियों तक पहुंचता है। ऐसे में नदियों के किनारे बसे मैदानी क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी है।

— राजीव सिन्हा, वरिष्ठ प्रोफेसर, अर्थ साइंस विभाग, आईआईटी कानपुर
अब तेज बारिश का दौर
“जुलाई माह में सामान्य से अधिक बारिश इस बात का संकेत है कि आगे तेज बारिश होगी। तीन जुलाई को बारिश की सर्वाधिक मात्रा 99.8 मिमी दर्ज की गई जबकि जुलाई माह में 327.1 मिमी बारिश हुई है जबकि इस महीने बारिश की सामान्य मात्रा 272.5 मिमी है। मानसून के शुरुआती महीने जून से लेकर अब तक शहर में 600.3 मिमी बारिश हो चुकी है।”

— प्रो. नौशाद खान, मौसम वैज्ञानिक, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय


