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आईआईटी कानपुर में विकसित हुआ नैनो फाइबर एयर प्यूरीफायर

कोरोना, फ्लू और टीबी के संक्रमण का खतरा होगा कंट्रोल- आईआईटी कानपुर में विकसित हुआ नैनो फाइबर एयर प्यूरीफायर, अस्पताल में सकारात्मक परिणाम के बाद बाजार में उतारा

विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। घर में यदि कोई सदस्य कोरोना, फ्लू (इन्फ्लूएंजा) या टीबी जैसी श्वसन संक्रमण वाली बीमारी से पीड़ित है तो अन्य सदस्यों में संक्रमण फैलने का खतरा कम करने में एक नई तकनीक मददगार साबित हो सकती है। आईआईटी कानपुर से केमिकल इंजीनियरिंग (नैनो टेक्नोलॉजी) में पीएचडी करने वाले डॉ. संदीप पाटिल ने करीब दो वर्ष के शोध के बाद नैनो फाइबर आधारित एयर प्यूरीफायर विकसित किया है। शोधकर्ता का दावा है कि यह तकनीक हवा में मौजूद वायरस, बैक्टीरिया, बायो-एयरोसोल और अत्यंत सूक्ष्म प्रदूषक कणों को फिल्टर कर कमरे की हवा को अधिक स्वच्छ बनाने में मदद करती है। तकनीक का पेटेंट कराया जा चुका है और अब इसे बाजार में भी उतार दिया गया है।
डॉ. पाटिल बताते हैं कि पीएचडी के दौरान नैनो फाइबर फिल्ट्रेशन तकनीक पर काम करते समय उन्हें यह विचार आया था। इसी बीच कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। तब उन्होंने इस तकनीक को श्वसन संक्रमण के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से विकसित करने का निर्णय लिया। इसके बाद करीब दो वर्षों तक लगातार शोध, डिजाइन में सुधार और परीक्षण किए गए।

अस्पताल में परीक्षण, अब बाजार में तकनीक


शोधकर्ता के अनुसार एयर प्यूरीफायर को पहले एक निजी शिशु रोग अस्पताल में लगाया गया, जहां इसके सकारात्मक परिणाम मिले। अस्पताल से मिले अनुभव के बाद ही इसे घरेलू उपयोग के लिए बाजार में उपलब्ध कराया गया।

हवा तीन चरण में होती है साफइस एयर प्यूरीफायर में तीन स्तर की फिल्ट्रेशन तकनीक का उपयोग किया गया है।
– पहला प्री फिल्टर हवा में मौजूद बड़े धूल कणों को रोकता है, जो एलर्जी और दमा जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
– दूसरा एक्टिव कार्बन फिल्टर सीलन, बचे हुए भोजन, बाथरूम और अन्य स्रोतों से आने वाली दुर्गंध तथा कुछ गैसीय प्रदूषकों को कम करता है।
– तीसरा नैनो फाइबर फिल्टर इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। शोधकर्ता के अनुसार यह हवा में मौजूद वायरस, बैक्टीरिया, बायो-एयरोसोल और अत्यंत सूक्ष्म कणों को फिल्टर करने के लिए विकसित किया गया है।
डॉ. पाटिल के अनुसार यह उपकरण लगभग 200 वर्गफुट के कमरे की हवा को करीब दो घंटे में फिल्टर कर सकता है। साथ ही खिड़की-दरवाजों से आने वाले धूलकण और अन्य सूक्ष्म प्रदूषकों को भी कम करने में मदद करता है।

प्यूरीफायर 100 नैनो मीटर तक के कण करता है फिल्टरडॉ. पाटिल बताते हैं कि यह एयर प्यूरीफायर लगभग 100 नैनोमीटर आकार तक के सूक्ष्म कणों को फिल्टर करने की क्षमता रखता है। वाहन के धुएं से निकलने वाले सूक्ष्म कण, परागकण (पोलन) और अन्य बारीक प्रदूषक सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। यह तकनीक ऐसे कणों को कम करने में सहायक है।

रखरखाव आसान, कम बिजली खर्च


यह एयर प्यूरीफायर केवल 24 वोल्ट पर संचालित होता है। कम वोल्टेज के कारण इसकी बिजली खपत बेहद कम है। सामान्य घरेलू उपयोग में इसका नैनो फाइबर फिल्टर दो से ढाई वर्ष तक चल सकता है, जिससे रखरखाव का खर्च भी कम रहता है। शोधकर्ता के अनुसार नैनो फाइबर आधारित इस एयर प्यूरीफायर की बाजार कीमत लगभग 12 हजार रुपये रखी गई है। इसका उपयोग घरों के अलावा छोटे अस्पतालों, क्लीनिकों, कार्यालयों और बंद कमरों में भी किया जा सकता है।

कैसे फैलते हैं कोरोना, फ्लू और टीबी?


कोरोना, फ्लू और टीबी श्वसन (रेस्पिरेटरी) संक्रमण हैं। ये मुख्य रूप से नाक, गला और फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। जब संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता, बोलता या गाता है तो उसके मुंह और नाक से सूक्ष्म बूंदें (ड्रॉपलेट्स) और एयरोसोल हवा में फैलते हैं। यदि दूसरे लोग इन्हें सांस के साथ अंदर ले लेते हैं तो संक्रमण फैल सकता है। बंद कमरों और कम वेंटिलेशन वाली जगहों पर इसका खतरा अधिक होता है।

एयर प्यूरीफायर ऐसे करता है काम

  • कमरे की हवा लगातार मशीन के भीतर खिंचती है।
  • प्री फिल्टर बड़े धूल कणों को रोकता है।
  • कार्बन फिल्टर दुर्गंध और कुछ गैसीय प्रदूषकों को कम करता है।
  • नैनो फाइबर फिल्टर अत्यंत सूक्ष्म कणों, बायो-एयरोसोल तथा शोधकर्ता के अनुसार वायरस और बैक्टीरिया को फिल्टर करता है।
  • फिल्टर होने के बाद अपेक्षाकृत स्वच्छ हवा दोबारा कमरे में पहुंचती है।

प्यूरीफायर का यहां हो सकता है इस्तेमाल

  • घर, जहां कोई सदस्य श्वसन संक्रमण से पीड़ित हो।
  • अस्पताल और क्लीनिक।
  • नवजात और बच्चों के वार्ड।
  • बुजुर्गों के कमरे।
  • छोटे कार्यालय और मीटिंग रूम।
  • कम वेंटिलेशन वाले बंद कमरे।

ये सावधानियां भी हैं जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि एयर प्यूरीफायर संक्रमण के जोखिम को कम करने में सहायक तकनीक है, लेकिन यह इलाज या अन्य बचाव उपायों का विकल्प नहीं है। इसलिए—

  • संक्रमित व्यक्ति जरूरत पड़ने पर मास्क पहने।
  • कमरे में ताजी हवा का पर्याप्त आवागमन रखें।
  • खांसते-छींकते समय मुंह और नाक ढकें।
  • हाथों की नियमित सफाई करें।
  • लक्षण होने पर डॉक्टर से परामर्श लेकर समय पर इलाज कराएं।

इसे भी जाने- एक सामान्य व्यक्ति एक मिनट में 12 से 20 बार सांस लेता है।

  • एक दिन में हम लगभग 20 हजार से अधिक बार सांस लेते हैं।
  • इसलिए घर के भीतर की हवा की गुणवत्ता का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है।
    विशेषज्ञ की राय
    डॉ. संदीप पाटिल कहते हैं, “नैनो फाइबर आधारित एयर फिल्ट्रेशन तकनीक का उद्देश्य घर और बंद स्थानों की हवा को अधिक स्वच्छ बनाना तथा वायुजनित संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद करना है। भविष्य में अस्पतालों, कार्यालयों और घरों में ऐसी तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ सकता है।”

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